इस मंदिर में होते चमत्कार! नवजातों को लाती हैं महिलाएं, रोचक है कहानी
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Chhathi Mata Temple Khargone: शारदीय नवरात्रि में खरगोन शहर का प्राचीन छठी माता मंदिर हजारों लोगों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र बना है. 100 साल पुराने मंदिर में महिलाएं अपने नवजात बच्चों को लेकर पहुंच रही हैं. मान्यता है कि माता के दर्शन और मंदिर के कुंड में स्नान कराने से बच्चों के रोग दूर होते हैं.
खरगोन. शारदीय नवरात्रि में देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. मध्य प्रदेश के खरगोन शहर के जवाहर मार्ग स्थित प्राचीन छठी माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. खास बात यह है कि यहां महिलाएं अपने छोटे बच्चों और नवजातों को लेकर आती हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, छठी माता के दर्शन और आशीर्वाद से बच्चों की रक्षा होती है. वहीं मंदिर परिसर में स्थित कुंड में बच्चों को स्नान कराने की भी परंपरा है. श्रद्धालु मानते हैं कि इससे बच्चों को बीमारी और कुपोषण जैसी समस्याओं से राहत मिलती है.
छठी माता मंदिर के पुजारी श्याम अत्रे और अभय जोशी लोकल 18 को बताते हैं कि यह क्षेत्र का प्रमुख और प्राचीन छठी माता मंदिर है. यहां बच्चे के जन्म के बाद उसकी छठी पूजने की परंपरा से माता का विशेष संबंध माना जाता है. इसी आस्था के चलते महिलाएं अपने नवजात बच्चों को माता के दर्शन कराने लाती हैं और उनके स्वस्थ जीवन और लंबी आयु की कामना करती हैं.
नवजातों के दूर होते हैं रोग!
मान्यता है कि यदि कोई बच्चा अस्वस्थ है, कुपोषण का शिकार है या कुष्ठ रोग से ग्रसित है, तो उसे छठी माता के दर्शन कराने और मंदिर के पवित्र कुंड में स्नान कराने से लाभ मिलता है. पांच मंगलवार या पांच रविवार को यहां बच्चों को स्नान कराने की मान्यता हैं. इसके बाद बच्चे के पहने हुए कपड़े मंदिर परिसर में छोड़ने की भी परंपरा है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से बच्चों के शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और वे स्वस्थ होकर जीवनभर निरोगी रहते हैं.
सपने में चौकीदार को दिए थे दर्शन!
मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह मंदिर करीब 100 साल से भी अधिक पुराना है. पहले यहां माता एक छोटी डेरी में विराजित थीं. बताया जाता है कि वर्षों पहले इस क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था. उस समय वन विभाग में तैनात एक चौकीदार को सपने में छठी माता के दर्शन हुए थे. माता ने चौकीदार को पीपल के पेड़ के पास स्थित पिंडी के बारे में बताया और उसे चबूतरे पर स्थापित करने का संदेश दिया. इसके बाद पीपल के पास चबूतरा बनाकर पिंडी की स्थापना की गई और पूजा-अर्चना शुरू हुई. समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया. साल 2012 में लोगों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया.
छठ पर 56 भोग, दशहरे पर विशाल भंडारा
मंदिर समिति के सचिव जिग्नेश पटेल ने बताया कि शारदीय नवरात्रि के दौरान छठी माता मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं. नवरात्रि के छठे दिन (16 अक्टूबर 2026) शाम को माता को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा. इससे पहले दिन में बागेश्वरी माता मंदिर से चुनरी यात्रा भी मंदिर पहुंचेगी. मंदिर समिति की ओर से यात्रा का स्वागत केसरिया फूलों और खिचड़ी प्रसादी से किया जाएगा. वहीं नवमी पर हवन-पूजन होगा जबकि दशहरे पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा. भंडारे में 11 क्विंटल हलवा, सवा क्विंटल खीर, नुक्ती, सब्जी और पूड़ी की प्रसादी तैयार की जाएगी. कन्याओं को भोजन कराने के साथ उन्हें सामग्री भी वितरित की जाएगी. नवरात्रि के दिनों में माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को 9 दिनों में सवा 12 क्विंटल प्रसादी वितरित की जा रही है.
20 साल से कर रहीं माता के दर्शन
मंदिर दर्शन करने पहुंचीं श्रद्धालु कुसुम जोशी ने लोकल 18 से कहा कि वह करीब 20 साल से छठी माता के दरबार में आ रही हैं. माता के प्रति उनकी गहरी आस्था है. उनके अनुसार, यहां रोजाना कई महिलाएं अपने छोटे और नवजात बच्चों को लेकर आती हैं. महिलाएं विशेष रूप से मंगलवार और रविवार को अपने 10 दिन, 20 दिन या महीने भर के बच्चों को कुंड में स्नान कराती हैं और माता से उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं. कई बच्चे स्नान के बाद स्वस्थ हो जाते हैं.