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Lachhu Maharaja Birth Anniversary: आज महान तबला वादक पंडित लच्छू महाराज की बर्थ एनिवर्सरी है. बनारस के इस महान कलाकार ने जनता के प्यार को ही अपनी सबसे बड़ी पूंजी माना था और इसी वजह से उन्होंने पद्मश्री सम्मान ठुकरा दिया था.
लच्छू महाराज
नई दिल्ली: आज यानी 16 अक्टूबर को महान तबला वादक पंडित लच्छू महाराज की बर्थ एनिवर्सरी है. इस खास मौके पर हर कोई उन्हें याद कर रहा है. बनारस की माटी से ताल्लुक रखने वाले लच्छू महाराज ने अपनी जादुई उंगलियों से तबले की ऐसी थाप दी कि पूरी दुनिया उनकी कला की दीवानी हो गई. उन्होंने अपनी जिंदगी में बेशुमार नाम और शोहरत कमाई, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी दौलत हमेशा उनके चाहने वालों का प्यार ही रही. वह उन अनोखे कलाकारों में से एक थे जिन्होंने सरकार की तरफ से मिलने वाले पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान को भी ठुकरा दिया था.
उनका साफ कहना था कि किसी भी कलाकार के लिए जनता की तालियां और उनका प्यार ही सबसे बड़ा अवॉर्ड है. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास और दिलचस्प बातें.
जब पद्मश्री ठुकराकर फैंस के प्यार को चुना
लच्छू महाराज के जीवन से जुड़ा यह किस्सा आज भी बहुत मशहूर है जब सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान देने का फैसला किया था. लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था. उनका मानना था कि कलाकार को उसके काम की असली सराहना दर्शकों से मिलती है. वह नहीं चाहते थे कि कोई भी पुरस्कार उनकी कला की पहचान का पैमाना बने. उनके लिए दर्शकों की वाहवाही और उनका साथ ही सब कुछ था.
संगीत से जुड़ा परिवार और बनारस से लगाव
उनका असली नाम लक्ष्मी नारायण सिंह था और उनका जन्म 16 अक्टूबर 1944 को बनारस में हुआ था. उनके पिता वासुदेव महाराज भी संगीत की दुनिया से जुड़े थे, जिस वजह से उन्हें बचपन से ही घर में संगीत का माहौल मिला. उन्होंने अपने पिता से ही तबला बजाना सीखा और बहुत कम उम्र में मंच पर अपनी कला का जादू बिखेरना शुरू कर दिया था. उनकी उंगलियों की गजब की तेजी और ताल पर पकड़ देखकर हर कोई हैरान रह जाता था.
फिल्मों में योगदान और गोविंदा से रिश्ता
लच्छू महाराज ने केवल शास्त्रीय संगीत ही नहीं बल्कि हिंदी फिल्मों में भी अपना शानदार योगदान दिया. उन्होंने महल, मुगल ए आजम, छोटी छोटी बातें और पाकीजा जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया. मुगल ए आजम और पाकीजा जैसी फिल्मों में उन्होंने शास्त्रीय नृत्य और कथक को पर्दे पर बेहद खूबसूरती से पेश किया था. इसके अलावा अभिनेता गोविंदा के साथ भी उनका गहरा रिश्ता था क्योंकि वह गोविंदा के मामा थे. गोविंदा ने उन्हें मुंबई लाने की पूरी कोशिश भी की थी, लेकिन उनका मन हमेशा अपने होमटाउन बनारस में ही लगा रहा. उन्होंने अपनी पसंद के मुताबिक अपनी जिंदगी जी और 28 जुलाई 2016 को बनारस में ही अंतिम सांस ली.