Aaj Ka Mausam: देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह विदाई हो गई है. हालांकि, इसके साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू हो गई है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 15 से 28 अक्टूबर तक के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अगले 2 सप्ताह के दौरान तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है. इस दौरान तमिलनाडु, केरल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कई दिनों तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. वहीं, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, केरल तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कुछ दिनों के दौरान अत्यंत भारी बारिश होने की भी आशंका है. IMD के अनुसार, 22 से 28 अक्टूबर के दौरान दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे अंडमान सागर के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की संभावना है. इसके प्रभाव से सप्ताह के मध्य में दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है. इसी तरह, दक्षिण-पूर्वी अरब सागर और उससे सटे लक्षद्वीप क्षेत्र में भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन विकसित होने का अनुमान है. इसके प्रभाव से दूसरे सप्ताह के अंत में दक्षिण-पूर्वी और उससे सटे पूर्व-मध्य अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है. इन वेदर सिस्टम के कारण दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं. मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है. वहीं, अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है.
IMD के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के सभी हिस्सों से विदाई ले ली है. इससे पहले मानसून महाराष्ट्र के शेष हिस्सों, गोवा, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के कुछ हिस्सों तथा झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ और क्षेत्रों से वापस लौट गया था. इसके बाद सिक्किम, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और गोवा के शेष हिस्सों के साथ असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी हुई. दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ ही 16 अक्टूबर से तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा केरल और माहे में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू हो गई है. आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों का प्रमुख कारण पूर्वोत्तर मानसून के साथ समुद्र के ऊपर बनने वाली मौसमी प्रणालियां होंगी.
देश के किस हिस्से में मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान
16 से 21 अक्टूबर के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में व्यापक बारिश होने की संभावना है. केरल और माहे, लक्षद्वीप तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 21 अक्टूबर तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है. तटीय कर्नाटक में 16 से 21 अक्टूबर, उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 17 से 20 अक्टूबर तथा तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 18 से 20 अक्टूबर तक कई स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है. रायलसीमा में भी 16 से 20 अक्टूबर के दौरान बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं. मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 17 से 21 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. केरल और माहे में 16 से 21 अक्टूबर, तटीय कर्नाटक में 16 और 17 अक्टूबर तथा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 15 अक्टूबर और फिर 17 से 21 अक्टूबर तक भारी वर्षा की संभावना है. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 16 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. तेलंगाना में 18 अक्टूबर को भी भारी वर्षा का अनुमान है.
भारत के तट से लगते समंदर में लो प्रेशर बनने का असर तटवर्ती इलाकों में देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग ने दक्षिण भारत के कई इलाकों में जोरदार बारिश होने का पूर्वानुमान जताया है. (फाइल फोटो)
दिल्ली-एनसीआर से पंजाब-हरियाणा तक कैसा रहेगा मौसम
उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से कई राज्यों में बारिश और खराब मौसम की संभावना है. हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और उत्तराखंड में कुछ स्थानों पर व्यापक बारिश हो सकती है. पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी बारिश का अनुमान है. IMD ने हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की आशंका जताई है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 16 अक्टूबर को गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है. हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है. हवा के झोंकों की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.
बंगाल की खाड़ी से अरब सागर तक में कैसी हलचल
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. 22 से 28 अक्टूबर के दौरान दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां और व्यापक हो सकती हैं. मौसम विभाग के अनुसार, दूसरे सप्ताह में प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों और पूर्वी तट के साथ कई स्थानों पर छिटपुट से लेकर व्यापक बारिश होने की संभावना है. दक्षिण-पश्चिम अरब सागर से दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक केरल और तमिलनाडु से गुजरने वाला एक ट्रफ कुछ दिनों तक सक्रिय रह सकता है. इसके अलावा, उत्तर-पश्चिम भारत में एक और पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव पड़ने की संभावना है. हालांकि, देश के समग्र पूर्वानुमान में उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है.
कई राज्यों में रात के तापमान को लेकर क्या अनुमान
बारिश के साथ तापमान को लेकर भी मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी किया है. 16 से 21 अक्टूबर के दौरान देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है. दक्षिण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ और उत्तरी तेलंगाना के कुछ हिस्सों में कुछ दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है. हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर भारत में कुछ दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस कम रहने का अनुमान है. 22 से 28 अक्टूबर के दौरान भी देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है. दक्षिण हरियाणा, उससे सटे राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य के आसपास या सामान्य से कम रह सकता है.
अल नीनो भी लगातार मजबूत हो रहा है. भारत में सर्दियों के मौसम में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है. (फाइल फोटो)
अल नीनो की स्थिति कैसी रहेगी
मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल मजबूत से अत्यंत मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है. मध्य-पूर्वी और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक है. पूर्वानुमान के अनुसार, 2026 के अंत तक अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है तथा जनवरी से मार्च 2027 तक इसके मजबूत से अत्यंत मजबूत बने रहने की संभावना है.
हिंद महासागर में कैसा रहेगा माहौल
हिंद महासागर में फिलहाल इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) की तटस्थ स्थिति बनी हुई है. हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है, लेकिन पश्चिमी हिस्से में गर्मी ज्यादा है. मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वानुमान अवधि के दौरान आईओडी की तटस्थ स्थिति जारी रहने की संभावना है.
चक्रवाती तूफान की क्या संभावना
इसके अतिरिक्त, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) फिलहाल अपने दूसरे चरण में है और इसका आयाम एक से अधिक है. 16 अक्टूबर से इसके तीसरे चरण में पहुंचने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, इसकी स्थिति अगले दो सप्ताह के दौरान उत्तर हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में माहौल में चक्रवाती प्रणालियों (Cyclonic Systems) के विकास के अनुकूल हो सकती है. अगले दो सप्ताह के दौरान दक्षिण भारत में बारिश प्रमुख मौसमी गतिविधि बनी रह सकती है. उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि की आशंका है, जबकि बाद के दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में किसी बड़े मौसम परिवर्तन का अनुमान नहीं है. दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कम दबाव के क्षेत्र बनने की संभावनाओं के कारण मौसम विभाग की नजर समुद्री क्षेत्रों में विकसित होने वाली प्रणालियों पर बनी रहेगी.