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इंदौर में इस साल कम बारिश ने आने वाले दिनों में जल संकट की आशंका बढ़ा दी है. संभावित संकट से निपटने के लिए सरकार और नगर निगम ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, अधिकारियों और विधायकों के बीच हुई चर्चा में राहत से लेकर भविष्य की जल जरूरतों तक का खाका तैयार करने पर जोर दिया गया. इसके अलावा संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री से 50 करोड़ रुपए के फंड की भी मांग की गई है. हर वार्ड का मास्टर प्लान, टैंकरों की व्यवस्था, नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज सुधारने और जरूरत पड़ने पर निजी बोरिंग के अधिग्रहण जैसे विकल्पों पर काम किया जा रहा है.
इंदौर में पानी के संकट से निपटने के लिए क्या इंतजाम
इंदौर में कम बारिश के चलते जल संकट की आशंका अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. ऐसे में संकट गहराने का इंतजार करने के बजाय नगर निगम ने पहले से तैयारी शुरू करने का दावा किया है. मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मौजूदगी में विस्तार से चर्चा हुई है. नगर निगम हर वार्ड का मास्टर प्लान तैयार कर रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों तक पानी पहुंचाया जा सके. इसके लिए पर्याप्त हाइड्रेंट, टैंकरों की उपलब्धता और जीपीएस के जरिए टैंकरों की निगरानी की व्यवस्था बनाने की योजना है. जिन इलाकों में नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत टैंकरों की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है. बोरिंग और पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने और लीकेज सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है.
मुख्यमंत्री से की गई 50 करोड़ रुपए के फंड की मांग
इसी तैयारी के बीच मुख्यमंत्री से कम से कम 50 करोड़ रुपये के फंड की मांग रखी गई है. अधिकारियों के मुताबिक पिछली बार टैंकरों से पानी पहुंचाने पर करीब 20 से 25 करोड़ रुपए खर्च हुए थे. प्रस्तावित फंड का इस्तेमाल टैंकरों की व्यवस्था, नए बोरिंग और आपातकालीन जरूरतों के लिए किया जा सकता है. संकट की स्थिति में निजी बोरिंग के अधिग्रहण का विकल्प भी रखा गया है.
पाइप से गाड़ियां धोने पर हो सकती है कार्रवाई
बताया जा रहा है कि कानून के तहत आपातकालीन परिस्थितियों में कलेक्टर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं. अगर पानी की कमी के बीच कोई बोरिंग से पानी बेच रहा है और आम लोगों को परेशानी हो रही है, तो लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है. वहीं, पानी की बर्बादी रोकने के लिए भी सख्ती की तैयारी है. अवैध रूप से मोटर लगाकर पानी खींचने, बिना अनुमति वॉशिंग सेंटर चलाने और पाइप से गाड़ियां धोकर पानी बर्बाद करने वालों पर चालानी कार्रवाई की जा सकती है. नागरिकों से शॉवर के बजाय बाल्टी का इस्तेमाल करने और आरओ से निकलने वाले वेस्ट पानी का घरेलू सफाई में उपयोग करने की अपील की गई है.
जल संरक्षण अभियान से लोगों को जोड़ने का प्लान
जल संरक्षण को जनभागीदारी अभियान से जोड़ने की योजना भी है, ताकि स्वच्छता की तरह पानी बचाना भी इंदौर के नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी बने. दूसरी ओर बिलावली और यशवंत सागर तालाब को दिसंबर में दोबारा भरने के लिए एनवीडीए से अनुमति लेने की योजना बनाई जा रही है. नर्मदा परियोजना के चौथे चरण के तहत साल 2029 से 2050 तक की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालीन योजना पर भी काम किया जा रहा है. इसके साथ ही ट्रीटेड वॉटर और एसटीपी से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने, नियमित निगरानी करने और रैंडम सैंपल लेकर जांच करने की बात कही गई है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये तमाम योजनाएं समय रहते जमीन पर उतर पाएंगी? क्योंकि कम बारिश के बीच इंदौर के सामने चुनौती सिर्फ पानी के इंतजाम की नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी को बचाने, उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने और हर जरूरतमंद तक पहुंचाने की भी है.
(रिपोर्ट-मिथिलेश गुप्ता)