जेल जाएंगे संजय राउत और निखिल वागले? अटॉर्नी जनरल ने दी अवमानना की मंजूरी, सीजेआई सूर्यकांत पर की थी टिप्पणी

जेल जाएंगे संजय राउत और निखिल वागले? अटॉर्नी जनरल ने दी अवमानना की मंजूरी, सीजेआई सूर्यकांत पर की थी टिप्पणी


नई दिल्ली: सीजेआई सूर्यकांत के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक टिप्पणियों को लेकर पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत पर कानूनी शिकंजा कस गया है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा दायर याचिका पर तुरंत संज्ञान लेते हुए देश के शीर्ष विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की हरी झंडी दे दी है. यह सहमति अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(1)(b) के तहत दी गई है. अटॉर्नी जनरल के इस कदम के बाद अब देश की शीर्ष अदालत में दोनों हस्तियों के खिलाफ औपचारिक न्यायिक कार्यवाही चलने का रास्ता साफ हो चुका है.

निखिल वागले ने मुख्य न्यायाधीश को लेकर सोशल मीडिया पर क्या लिखा था?

यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर की गई एक आपत्तिजनक पोस्ट से भड़का. पत्रकार निखिल वागले ने 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सीजेआई को निशाना बनाते हुए बेहद अभद्र और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था. दरअसल, ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने से पहले मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात का समय मांगा था, जिसे सीजेआई ने खारिज कर दिया था.

इसी रिपोर्ट को री-ट्वीट करते हुए वागले ने आपत्तिजनक पोस्ट की थी. हालांकि, जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस पर सख्त रुख अपनाया और अवमानना याचिका दायर की, तो वागले ने अपनी वह पोस्ट हटा दी. इसके साथ ही उन्होंने 15 अक्टूबर को अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय से बिना शर्त माफी भी मांगी है.

संजय राउत के बैडमिंटन वाले फर्जी दावे पर क्यों भड़का बार एसोसिएशन?

वहीं दूसरी तरफ, शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने 12 अक्टूबर को मीडिया से बात करते हुए न्यायपालिका को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया था. राउत ने आरोप लगाया था कि सीजेआई समेत 60 से 70 जजों को लंदन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के साथ बैडमिंटन खेलते हुए देखा गया था.
एससीबीए ने अपनी याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जून के एक आदेश का हवाला देते हुए इस दावे की हवा निकाल दी. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हुई बैडमिंटन खेलने की तस्वीरें लंदन की नहीं थीं, बल्कि वे नवंबर 2024 में नई दिल्ली में आयोजित एक खेल कार्यक्रम की थीं. अदालत और वकीलों की संस्था का मानना है कि जानबूझकर झूठी तस्वीरों के सहारे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर लांछन लगाने की कोशिश की गई.

अटॉर्नी जनरल ने अपनी सहमति में क्या कहा?

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अपने सहमति पत्र में दोनों बयानों को न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ माना. उन्होंने स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि निखिल वागले की पोस्ट न केवल अपमानजनक थी, बल्कि बेहद निचले स्तर की थी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जजों के किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम में शामिल होने से जुड़े संजय राउत के दावे पूरी तरह तथ्यहीन और मनगढ़ंत हैं.

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