Atar Singh Bhadana Murder Case : गहराते अंधेरे के बीच 1घंटे खेली गई खून की होली, देखें बेखौफ भीड़ ने कैसे मचाया था तांडव?


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Atar Singh Bhadana Murder Case Ground Report : राजस्थान के भरतपुर के भौंडा गांव में पूर्व विधायक अतर सिंह भडाना की जहां हत्या की गई वहां का मंजर अभी भी खौफनाक बना हुआ है. हैरानी की बात यह है कि भडाना न सिर्फ इसी इलाके से विधायक रहे थे बल्कि वे राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवा नेता भी थे. भड़ाना की जिस भौंडा गांव के लोगों ने हत्या की उसमें भी अधिकतर गुर्जर ही हैं. यहां 11 अक्टूबर की शाम को जो कुछ हुआ वह दिल को दहला देने वाला था. दर्जनों हमलावरों की भीड़ भड़ाना के खून की प्यासी हो रखी थी और वे जान बचाने के लिए इधर से उधर भाग रहे थे. देखें मौके के हालात और क्या हुआ था भड़ाना के साथ.

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अतर सिंह भड़ाना : हत्या के लिए गहराते अंधेरे के बीच 1 घंटे खेली गई खून की होलीZoom

अतर सिंह भड़ाना को मौत के घाट उतारने के लिए हमलावरों ने उनके कमरे का गेट भी तोड़ा डाला था.

भरतपुर. भौंडा गांव से करीब दो किलोमीटर दूर एक जगह पर सन्नाटा पसरा है. टूटी हुई जेसीबी मशीनें, एलएनटी और जगह जगह बिखरें कांच. 11 अक्टूबर को शाम करीब 6 बजे करीब 80 लोगों की भीड़ हाथों में पत्थर, डंडे, फरसे कुल्हाड़ी और बंदूकें लेकर इस ओर बढ़ी जहां खदान में खुदाई की मशीनें रखी थी. भीड़ ने आते ही पथराव शुरू कर दिया. मशीनों के शीशे तोड़ डाले और अन्य जगहों पर भी तोड़फोड़ की. यहां अभी भी जेसीबी और एलएनटी मशीनों के टूटे कांच बता रहे हैं कि वो भी भीड़ गुस्से का निशाना बनी थी. ये मशीनें भड़ाना के रेस्ट हाउस के ठीक सामने रखी थी. इन मशीनों के पीछे और रेस्ट हाउस के सामने खड़े थे भडाना के सुरक्षा गार्ड, खदान के कर्मचारी और खुद भडाना भी. भड़ाना की हत्या के लिए वहां करीब एक घंटे तक खूनी होली का खेल चलता रहा.

सुरक्षा गार्डों ने भीड़ को रोकने की कोशिश की तो पथराव इतना तेज हुआ कि बचाव के लिए कर्मचारियों और खुद भडाना को इन मशीनों के पीछे छिपना पड़ा. यानी इन मशीनों के एक तरफ हमलावरों की भीड़ थी और दूसरी तरफ भडाना तथा उनके सुरक्षा गार्ड और कर्मचारी. भीड़ के निशाने पर न कर्मचारी थे न सुरक्षा गार्ड. उनके असली निशाने पर थे अतर सिंह भड़ाना. पत्थर भडाना के सिर में लगे तो वो घायल हो गए.

हमलावरों की भीड़ कमरे पर टूट पड़ी
हमलावारों की भीड़ ने जैसे ही डंडों से सुरक्षा गार्ड और कर्मचारियों को पीटना शुरू किया तो वे पीछे हट गए. इस बीच पत्थरबाजी में घायल भड़ाना को सुरक्षा गार्डों ने हाथों में उठाकर रेस्ट हाउस के अंदर ले गए. वहां के ग्राउंड फ्लोर पर खदान का दफ्तर और एक कर्मचारियों के आराम का कमरा है. ऊपरी मंजिल पर भडाना का खुद का रेस्ट रूम है. उसमें उस समय उनकी पत्नी कमलेश मौजूद थी. हमलावर रेस्ट हाउस तक पहुंच जाने के कारण सुरक्षा गार्ड घायल भड़ाना को उपर न ले जा सके. वे उनको नीचे ही कमरे में ले गए. अंदर से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया ताकि हमवावरों की भीड़ अंदर न आ सके. लेकिन हमलावरों की भीड़ कमरे पर टूट पड़ी.

चूल्हे से जलती लकड़ियां उठाई और कमरे में फेंकी
कमरे के लोहे का दरवाजा लगा हुआ और वह बंद था. लिहाजा हमलावरों ने सरियों से पहले खिड़की को तोड़ा फिर ऊपर से दरवाजे को तोड़ा. फिर सरियों से बाहर से ही भड़ाना पर हमले शुरू कर दिए. सुरक्षा गार्डों ने घायल भड़ाना को बचाने की तमाम कोशिशें की लेकिन वो नाकाम रही. भड़ाना जान बचाने के लिए कमरे में भागने लगे. वो बाहर ना निकल सके इसलिए हमलावरों ने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया. फिर दरवाजे के बाहर जहां चूल्हे पर कर्मचारियों के लिए खाना बन रहा था उसी चूल्हे से जलती लकड़ियां उठाई और वापस पहुंच भड़ाना के कमरे के पास. उन्होंने जलती लकड़ियों को वहां से अंदर फेंकना शुरू कर दिया.

भड़ाना के शरीर पर 40 गहरी चोटें पाई गईं
इससे कमरे में रखे गद्दे और बैड सब जलने लगे. हमलावर भड़ाना को जिंदा जलाना चाहते थे. भड़ाना जैसे ही बाहर निकलने की कोशिश करने लगे हमलावरों ने बाहर का दरवाजा खोल दिया. भड़ाना के बाहर निकलते ही हमलावर सरियों और लाठियों से उन पर टूट पड़े. कमरे के बाहर भड़ाना के खून की नदी बहने लगी. कमरे के बाहर खून ही खून बिखर फैल गया. जले हुए गद्दे और कमरे का टूटा दरवाजा, टूटी खिड़कियां और मौके के हालात बता रहे हैं वहां वहशी दरिदों की भीड़ भडाना के खून की प्यासी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भड़ाना के शरीर पर 40 गहरी चोटें पाई गईं. इसमें सिर में चार इंच का जख्म के साथ ही सिर और हाथ पैर की अधिकतर हड्यिां टूटी हुई मिली.

हमलावरों के अगले निशाने पर थी भड़ाना की पत्नी कमलेश
भड़ाना की निर्मम हत्या के बाद हमलावरों के अगले निशाने पर थी उनकी पत्नी कमलेश. हमलावर पहली मंजिल पर बाहर की सीढ़ियों से चढे़. उन्होंने उनके कमरे का दरवाजा तोड़ने की भी कोशिश की. दरवाजे पर मारे गए फरसे और कुल्हाड़ी के निशान उनके दरवाजे पर अभी भी बने हैं. नीचे से पत्थर फेंके गए. फायरिंग की गई. इससे रेस्ट हाउस की उपरी मंजिल के कांच टूट गए. हालात देखकर घबराई कमलेश भडाना रेस्ट हाउस की ऊपरी मंजिल में बने बेडरूम में चली गई. वहां करीब एक घंटे तक तांडव चलता रहा. उसके बाद हमलावर भड़ाना को लहूलुहान में छोड़कर लौट गए.



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