इस साल जनवरी में ईरानी की सड़कों पर हजारों लोग सरकार के विरोध में प्रदर्शन पर उतरे थे. लेकिन अब उनमें से एक 23 साल की ईरानी लड़की नजमेह अमीनी को लोग इंटरनेट पर जा-जाकर ढूंढ रहे हैं. अकाउंटिंग की इस छात्रा पर ‘ईशनिंदा’ का आरोप लगा है. अब इसे मौत की सजा सुनाई गई है. जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान इस लड़की को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन नजमेह अमीनी का नाम सुनते ही लोगों को एक और ईरानी लड़की महसा अमीनी की याद आ गई है. यही वो लड़की है जिसके लिए साल 2022 में दुनियाभर समेत बनारस में भी लोग सड़कों पर आए थे. क्या महसा और नजमा में कोई संबंध है या इस कहानी का कोई और पहलू है? क्यों ईरान की इन लड़कियों के लिए भारत में भी आवाजें उठती हैं.
कौन है नजमेह अमीनी
7 अक्टूबर को ईरानी अखबार खोरासान में खबर आई, कि नजमेह अमीनी को मौत की सजा सुनाई गई है. नजमेह 23 साल की अकाउंटिंग की स्टूडेंट हैं जो सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रही हैं. जनवरी में ईरान में सरकार विरोध प्रदर्शन हुए थे. तभी मशहद शहर से गिरफ्तार किया गया. ईरान में ‘फाटा’ नाम की एक ‘मॉरलिंग पुलिस’ होती है. ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार फाटा ने नजमेह की साइबर गतिविधियों पर नजर रखी और न पर धार्मिक हस्तियों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया.
जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान नजमेह अमीनी को गिरफ्तार किया गया था. (फोटो साभार रायटर्स)
ईशनिंदा क्या है?
ईशनिंदा (Blasphemy) का मतलब है किसी धर्म, ईश्वर, पैगंबर, धार्मिक ग्रंथ, पवित्र प्रतीक या धार्मिक विश्वास के प्रति जानबूझकर अनादर, अपमान या उपहास करना. सरल शब्दों में, जब कोई बोल, लेख, चित्र, वीडियो या कार्य किसी धर्म की आस्था को जानबूझकर चोट पहुँचाने के इरादे से किया जाए, तो उसे ईशनिंदा कहा जा सकता है. ईशनिंदा या उससे जुड़े अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान मुख्य रूप से कुछ मुस्लिम-बहुल देशों में है. अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रुनेई, ईरान, मॉरीतानिया, पाकिस्तान और सऊदी अरब ऐसे देश हैं जहां ईशनिंदा से जुड़े कानूनों में मृत्युदंड का प्रावधान है.
हालांकि इस कानून पर अक्सर दुनियाभर में विवाद होता रहा है. उसकी वजह है 2 अपराधों का टकराना, एक है धार्मिक भावनाओं का सम्मान और दूसरा अभिव्यक्ति की आजादी. यूएन की मानवाधिकार काउंसिल ने 2017 और 2019 के प्रस्तावों में कहा कि ईशनिंदा, धर्मत्याग, व्यभिचार और सहमति पर आधारित समलैंगिक संबंधों जैसे अपराधों के लिए मृत्युदंड नहीं दिया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने 2023 में कहा कि ईशनिंदा जैसे अपराध “सबसे गंभीर अपराध” की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए इन पर मृत्युदंड देना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है.
नजमेह अमीनी का नाम सुन क्यों याद आई महसा अमीनी?
नजमेह और महसा अमीनी, दोनों ही ईरान की लड़कियां हैं. इन दोनों का सरनेम एक होने की वजह से कई लोग इन्हें आपस में जोड़ रहे हैं. पर सच ये है कि कोई आपसी रिश्तेदारी न होते हुए भी इन दोनों की किसमत ईरान और मौत से जुड़ी है. महसा ने ईशनिंदा नहीं की थी. पर कुर्दिस्तान के सक्केज शहर की रहने वालीं 22 साल की कुर्द महिला महसा का अपराध था कि उसने हिजाब सही से नहीं पहना था. महसा अमीनी को नैतिक पुलिस ने हिजाब नहीं पहनने पर गिरफ्तार किया था और उनकी पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. इसके बाद ईरान में बड़े पैमाने पर महिलाओं ने सड़कों पर उतर विरोध प्रदर्शन किया. अमीनी की मौत पर संयुक्त राष्ट्र ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी अधिकारियों से महिलाओं के पहनावे को लेकर पुलिसिंग करने पर रोक लगाने का आग्रह किया है.
22 साल की कुर्द महिला महसा का अपराध था कि उसने हिजाब सही से नहीं पहना था. (फोटो साभार- रायटर्स)
पुलिस हिरासत में हुई महसा की मौत ने पूरी दुनिया में शोर मचा दिया. इस घटना के बाद भारत के वाराणसी की मुस्लिम महिलाओं ने भी प्रदर्शन किया. वो ईरान में महिलाओं पर हो रही सख्ती और हिजाब नियमों के खिलाफ सड़कों पर उतरी थीं. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में महिलाओं ने एक ही सवाल पूछा, ‘जिंदगी जरूरी है या हिजाब?’