AC की टेंशन खत्म, मिट्टी बांस से बने घरों में मिलेगी नैचुरल ठंडक
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Delhi Eco Friendly House: अगर आप भी इको-फ्रेंडली घर बनाने का आइडिया तलाश रहे है तो इसके लिए आपको किसी दूर-दराज के गांव जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आप दिल्ली की एक ऐसी जगह पर जा सकते है. जहां देश के अलग-अलग हिस्सों में बनने वाले इको-फ्रेंडली घरों की पूरी जानकारी मिल जाएगी. अच्छी बात यह है कि यहां एंट्री बिल्कुल फ्री है. आइए जानते है उस जगह के बारे में.
नई दिल्ली: ग्लोबल वार्मिंग की वजह से भारत के मौसम में लगातार बदलाव आ रहा है. कहीं बहुत ज्यादा बारिश हो रही है, तो कहीं सूखा पड़ रहा है. तापमान बढ़ने के कारण अब लोगों को एक घर में 2 एयर कंडीशनर (AC) तक चलाने पड़ रहे हैं, जिससे बिजली का बिल और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे है. यही वजह है कि लोग अब एक बार फिर ‘इको-फ्रेंडली’ (पर्यावरण के अनुकूल) घरों की तरफ लौट रहे है. दिल्ली-एनसीआर में ऐसे घर बनाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
अगर आप भी इको-फ्रेंडली घर बनाने का आइडिया तलाश रहे है तो इसके लिए आपको किसी दूर-दराज के गांव जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आप दिल्ली की एक ऐसी जगह पर जा सकते है. जहां देश के अलग-अलग हिस्सों में बनने वाले इको-फ्रेंडली घरों की पूरी जानकारी मिल जाएगी. अच्छी बात यह है कि यहां एंट्री बिल्कुल फ्री है. आइए जानते है उस जगह के बारे में.
यहां बने हैं इको-फ्रेंडली घर
दिल्ली में भारत मंडपम और सुप्रीम कोर्ट के पास ‘नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम’ (राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय) स्थित है. यहां प्रवेश बिल्कुल निःशुल्क है. इस जगह को भारत के गांवों की तर्ज पर बसाया गया है, जिससे विदेशी पर्यटक खरीदारी करने के साथ-साथ भारतीय गांवों की झलक भी देख सकें. खास बात यह है कि यहां देश-विदेश के बड़े-बड़े एक्सपर्ट और रिसर्चर भी आते है जो इको-फ्रेंडली घर बनाने के तरीके सीखना चाहते है. नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम में झारखंड से लेकर बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक के पारंपरिक ग्रामीण घरों की पूरी झलक देखने को मिलती है.
इस तरह बनाए गए हैं ये घर
इन घरों के निर्माण में मिट्टी, पत्थर, लकड़ी, बांस और स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. यहां आपको घरों का खुला आंगन, बरामदा, छायादार हिस्से, खिड़कियों की सही स्थिति और हवा के आने-जाने (वेंटिलेशन) की बेहतरीन व्यवस्था देखने को मिलेगी. इसके अलावा, आपको यह भी सीखने को मिलेगा कि बिना एयर कंडीशनर के भी गांवों के घर कैसे प्राकृतिक रूप से ठंडे रहते थे.
कम रोशनी में भी घरों के अंदर ज्यादा उजाला कैसे किया जाता था, इनकी साफ-सफाई कैसे होती थी और दरवाजे-खिड़कियां किस तरह बनाए जाते थे. यह सब यहां बहुत ही बारीकी से दर्शाया गया है. यही वजह है कि आर्किटेक्चर (वास्तुकला) की पढ़ाई कर रहे छात्र और इस क्षेत्र में भविष्य बनाने का सपना देखने वाले युवा भी यहां आकर इको-फ्रेंडली घरों के डिजाइन पर रिसर्च करते है. अगर आप भी यहां जाना चाहते हैं, तो इसके सबसे पास ‘सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन’ है.