Pakistani Pilots Ban : एयर फ्रांस ने पाकिस्तान समेत 31 देशों के क्रू पर लगाया बैन, जानें क्यों नहीं रहा यहां के नागरिकों पर भरोसा?

Pakistani Pilots Ban : एयर फ्रांस ने पाकिस्तान समेत 31 देशों के क्रू पर लगाया बैन, जानें क्यों नहीं रहा यहां के नागरिकों पर भरोसा?


इंटरनेशनल एविएशन सेक्टर और ग्लोबल सिक्योरिटी के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं. दिग्गज एयरलाइन एअर फ्रांस ने पाकिस्तान समेत 31 देशों के नागरिक पायलटों और केबिन क्रू मेंबर्स के इजरायल जाने वाली उड़ानों में एंट्री पर रोक लगा दी है. ये सख्त फैसला इजराइली सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी कड़े आदेश के बाद लिया गया है. दरअसल, सितंबर के अंत में फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में ओमान के एक को-पायलट ने कॉकपिट के भीतर ही आतंकी हमले की साजिश रची थी, जिसके बाद यरुशलम ने अपनी हवाई सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं.

पाकिस्तान जैसे देशों से क्यों उठ गया एयरलाइन का भरोसा?

एयर फ्रांस के इस एक्शन और इजरायल के नए फरमान के बाद दुनिया भर की एविएशन कंपनियों में हड़कंप मच गया है. एयर फ्रांस ने कहा है कि वो अपने यात्रियों और जहाजों की सुरक्षा के लिए उन सभी देशों के एंट्री रूल्स को मानने के लिए मजबूर है, जहां के लिए वो सर्विस देती है. लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर पाकिस्तान और इन देशों के क्रू मेंबर्स पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा क्यों पूरी तरह डगमगा गया है?

इजराइल का नो-एंट्री फरमान: 31 मुल्कों के पायलटों और क्रू पर ब्रेक

इजरायल के परिवोन और सड़क सुरक्षा मंत्रालय (Ministry of Transport and Road Safety) ने दुनिया भर की कमर्शियल एयरलाइंस को एक आधिकारिक सीक्रेट डायरेक्टिव भेजा है. इस डायरेक्टिव में दो टूक शब्दों में कहा गया है कि इजराइली एयरस्पेस में प्रवोश करने वाले या तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाले किसी भी प्लेन के कॉकपिट या केबिन में ऐसे क्रू मेंबर्स नहीं होने चाहिए, जिनके देश का इजरायल के साथ कोई ऑफिशियल कूटनीतिक संबंध नहीं है.

इस बैन की जद में आने वाले 31 देशों में खास तौर पर मुस्लिम बहुल राष्ट्र और वो देश शामिल हैं जो इजरायल को मान्यता नहीं देते. इसमें प्रमुख नाम हैं.

  • पाकिस्तान: पाकिस्तान न तो इजरायल को एक देश मानता है और न ही कभी दोनों के बीच कूटनीतिक रिश्ते रहे हैं. इसके अलावा, पाकिस्तानी पायलटों के फर्जी लाइसेंस विवाद और कट्टरपंथी झुकाव के इतिहास ने वैश्विक स्तर पर उनकी साख को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है.
  • मध्य पूर्व और खाड़ी देश: ओमान, सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, लेबनान, सीरिया, यमन और कतर.
  • उत्तर अफ्रीकी व अन्य देश: अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, नाइजर, सूडान, सोमालिया, साथ ही उत्तर कोरिया और क्यूबा जैसे गैर-मुस्लिम राष्ट्र.

एयर फ्रांस ने अल जजीरा से बातचीत में माना है कि स्टाफ को इजराइली सिक्योरिटी अथॉरिटीज के नए गाइडलाइंस के बारे में बता दिया गया है और उनका रोस्टर बदल दिया गया है.

फ्लाईदुबई फ्लाइट में क्या हुआ था? हवा में 9/11 जैसी भयानक साजिश

इजरायल का ये ऐतिहासिक फैसला 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट में घटी उस खौफनाक घटना का नतीजा है, जिसने एविएशन वर्ल्ड की नींद उड़ा दी थी. दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक यात्री फ्लाइट में ओमानी को-पायलट ने बीच हवा में ही विमान को हाइजैक करने की कोशिश की.

उस ओमानी को-पायलट का प्लान इस कमर्शियल प्लेन को सीधे इजरायल के सबसे व्यस्त बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ले जाकर क्रैश कराने का था. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को बताया कि ये साजिश ठीक 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले की तर्ज पर बनाई गई थी, ताकि सैकड़ों लोगों की जान ली जा सके.

भारतीय कैप्टन ने बचाई सैकड़ों जानें, खुद अस्पताल में भर्ती

जब ओमानी को-पायलट ने कॉकपिट के अंदर आतंकी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की, तब प्लेन के भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मच्छर मसीहा बनकर खड़े हो गए. आतंकी मंशा वाले को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे कॉकपिट के भीतर ही खूनी भिड़ंत शुरू हो गई.

कैप्टन स्मित मच्छर ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी सूझबूझ, हिम्मत और ट्रेनिंग के दम पर उस सिरफिरे को-पायलट का सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया. उन्होंने विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई और सैकड़ों मासूम मुसाफिरों की जिंदगी बचा ली. कैप्टन स्मित फिलहाल अस्पताल में गंभीर चोटों का इलाज करा रहे हैं और पूरी दुनिया उनके साहस को सलाम कर रही है.

वैश्विक एयरलाइंस पर असर और एविएशन सेक्टर की चिंताएं

इस घटना के सामने आते ही पूरी दुनिया की एयरलाइंस सतर्क हो गई हैं. इजराइल के इस नए नियम को लेकर अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के रिएक्शन भी आने लगे हैं.

  • स्मार्टविंग्स : चेक गणराज्य की एयरलाइन ने पुष्टि की है कि उसे इजराइली अधिकारियों से सितंबर में ही ये सुरक्षा निर्देश मिल गया था और वो इसका पूरा पालन कर रहे हैं.
  • युनाइटेड एयरलाइंस : अमेरिकी दिग्गजों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फिलहाल इस कूटनीतिक डायरेक्टिव पर किसी भी सार्वजनिक टिप्पणी से दूरी बना ली है.

क्यों नहीं रहा पाकिस्तान और इन देशों के क्रू पर भरोसा?

ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी या कुछ खास देशों के पायलटों पर सुरक्षा एजेंसियों ने शक जताया हो. इससे पहले भी पाकिस्तानी पायलटों के फर्जी फ्लाइंग लाइसेंस का बड़ा खुलासा हो चुका है, जिसके बाद यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) पर बैन लगा दिया था.

इसके अलावा, कॉकपिट के भीतर रेडिकलाइजेशन का खतरा अब एक वास्तविक और खौफनाक ग्राउंड रियलिटी बन चुका है. फ्लाईदुबई की घटना ने साबित कर दिया है कि किसी पायलट की नागरिकता, बैकग्राउंड और उसके देश की कूटनीतिक विचारधारा सुरक्षा के लिहाज से कितनी अहम है.

कॉकपिट के अंदर जरा सी चूक या एक रेडिकलाइज्ड दिमाग पूरे मिडिल ईस्ट को तबाही में झोंक सकता था. एयर फ्रांस और इजरायल का ये फैसला एविएशन सिक्योरिटी का एक नया दौर शुरू कर रहा है, जहां अब सिर्फ यात्रियों का सामान ही नहीं, बल्कि प्लेन उड़ाने वाले पायलटों का राष्ट्र और विचार भी सबसे बड़ी जांच के दायरे में होगा.



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