सड़ी-गली लकड़ियां पचाकर साढ़े 6 करोड़ साल से जिंदा है, डायनासोर के खात्मे के ठीक बाद धरती पर पनपा था यह फंगस

सड़ी-गली लकड़ियां पचाकर साढ़े 6 करोड़ साल से जिंदा है, डायनासोर के खात्मे के ठीक बाद धरती पर पनपा था यह फंगस


चीन के युन्नान प्रांत के घने जंगलों में साइंटिस्ट्स ने एक ऐसे विशालकाय फंगस की खोज की है जो साढ़े 6 करोड़ साल से छिपा हुआ था. इस नई प्रजाति को डायनजुनस रेक्स या डी-रेक्स नाम दिया गया है. यह फंगस अपने विशाल आकार के चलते अब तक की हमारी वैज्ञानिक समझ को चुनौती देता है. इसके फ्रूटिंग बॉडीज यानी फलने वाले हिस्से सीधे खड़े होकर 50 सेंटीमीटर या 20 इंच तक ऊंचे हो सकते हैं. इनका वजन 2.2 किलोग्राम यानी करीब 4.9 पाउंड तक पहुंच जाता है. यह एस्कोमाइकोटा फाइलम के तहत अब तक पाया गया सबसे बड़ा फंगस है. डीएनए एनालिसिस से पता चला है कि इस अनोखे फंगस की उत्पत्ति धरती से डायनासोर के खात्मे के ठीक 10 लाख साल बाद हुई थी.

साइंटिस्ट्स को जंगल में कहां मिला यह फंगस और इसकी बनावट कैसी है?

कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी के साइंटिस्ट्स ने दमाइदी और यिपिंगलांग के पास शीतोष्ण शंकुधारी जंगलों में फील्डवर्क किया था. इसके साथ ही नानबांग के पास ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट में भी सैंपल की तलाश की गई. इसी दौरान टीम को सफेद रंग के बड़े फ्रूटिंग बॉडीज मिले जिन्हें स्ट्रोमाटा कहा जाता है. ये फंगस चाइनीज कॉर्क ओक के पेड़ों की लकड़ी वाली जड़ों पर उगे थे और राइजोस्फीयर से बाहर निकल रहे थे.

स्कोमाइसेट्स फंगस का सबसे बड़ा ग्रुप है जिसमें 64 हजार से ज्यादा प्रजातियां शामिल हैं. इनमें आम मशरूम की तरह छतरी नहीं उगती है. इसके बजाय ये अपने फ्रूटिंग बॉडीज के अंदर या सतह पर बनी छोटी थैली जैसी संरचनाओं से स्पोर्स यानी बीजाणु छोड़ते हैं.

साइंटिस्ट्स ने इन सैंपल्स को जमा करके इंस्टीट्यूट के कलेक्शन में रखा. इसके बाद फंगस की बनावट को समझने के लिए लैब में स्पोर्स उगाए गए और इसके पूरे जीनोम की सीक्वेंसिंग की गई.

खेत में Dianjunus rex के स्ट्रोमाटा. (a, c, d, f) होस्ट की जड़ों से जुड़े स्ट्रोमाटा. (b, e, g, h) होस्ट पौधे के आस-पास स्ट्रोमाटा. (a) इकट्ठा करने वाले. (i) सबसे बड़े दो-पिंड वाले (bilobed) स्ट्रोमाटा का कुल वजन. (Image Credit: Frontiers in Fungal Biology (2026). DOI: 10.3389/ffunb.2026.1940464)

इस अनोखे फंगस को डी-रेक्स नाम क्यों दिया गया?

जीनोम और बनावट की स्टडी से कन्फर्म हुआ कि यह फंगस जाइलैरिएल्स ऑर्डर के अंदर एक नई प्रजाति और नया जीनस है. इतना ही नहीं, यह डायनजुनेसी नाम की एक बिल्कुल नई फंगल फैमिली का प्रतिनिधित्व करता है.

  • कुनमिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बॉटनी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. इंदुनिल सी. सेनानायके ने कहा, ‘यह अद्भुत प्रजाति एक नई फंगल फैमिली डायनजुनेसी को दर्शाती है और विशालकाय फंगस के विकास को समझने का दुर्लभ मौका देती है. यह खोज बताती है कि पूर्वी एशिया के जंगलों में अभी कितनी फंगल बायोडायवर्सिटी खोजी जानी बाकी है.’
  • साइंटिस्ट्स ने इसके शाही आकार और प्राचीन डायन साम्राज्य के नाम पर इसे डायनजुनस रेक्स नाम दिया है. डी-रेक्स का सबसे करीबी रिश्तेदार ग्राफोस्ट्रोमा प्लैटिस्टोमा है जो उत्तरी गोलार्ध में मृत लकड़ियों पर उगता है.
  • जाइलैरिएल्स ग्रुप के फंगस सेकेंडरी कंपाउंड्स और खास एंजाइम्स बनाने के लिए जाने जाते हैं. ये एंजाइम्स पौधों के जटिल मॉलिक्यूल्स को तोड़ने का काम करते हैं और इन्हीं की मदद से डी-रेक्स सूखी लकड़ियों को आसानी से पचा लेता है.

डायनासोर के खात्मे वाली घटना से इस विशालकाय फंगस के पनपने का क्या संबंध है?

साइंटिस्ट्स ने इस नई प्रजाति के डीएनए का मॉलिक्यूलर क्लॉक एनालिसिस किया और सैकड़ों अन्य फंगस के जीनोम से इसकी तुलना की. इससे पता चला कि डायनजुनेसी फैमिली की उत्पत्ति करीब 6.5 करोड़ साल पहले हुई थी. यह समय क्रेटेशियस-पैलियोजीन मास एक्सटिंक्शन की घटना के ठीक 10 लाख साल बाद का है. इसी महाविनाश में धरती से डायनासोर और अनगिनत पेड़-पौधे खत्म हो गए थे.

डॉ. सेनानायके ने कहा, ‘यह समय एक दिलचस्प संभावना की ओर इशारा करता है. महाविनाश के बाद जंगलों में भारी बदलाव आए और अचानक बड़ी मात्रा में मृत पेड़-पौधों का मटेरियल जमा हो गया. लकड़ी को सड़ाने वाले फंगस के लिए इस पर्यावरणीय उथल-पुथल ने आगे बढ़ने के नए इकोलॉजिकल मौके पैदा किए.’

डी. रेक्स (HKAS148941, होलोटाइप). (Image Credit: Frontiers in Fungal Biology (2026). DOI: 10.3389/ffunb.2026.1940464)

आखिर आकार में इतना बड़ा क्यों हो जाता है डी-रेक्स?

अब तक एस्कोमाइसेट ग्रुप के सबसे बड़े फंगस की ऊंचाई 20 से 30 सेंटीमीटर यानी 8 से 12 इंच तक ही दर्ज की गई थी. ऐसे में डी-रेक्स का 50 सेंटीमीटर तक बढ़ना साइंटिस्ट्स के लिए भी काफी अहम है.

डॉ. सेनानायके ने कहा, ‘आसपास की वनस्पति और मलबे से ऊपर उठने वाला फ्रूटिंग बॉडी घने जंगलों में हवा के जरिए अपने स्पोर्स को बेहतर तरीके से फैला सकता है. हालांकि इतने बड़े स्ट्रक्चर को बनाने में काफी एनर्जी लगती है, जिससे लगता है कि यह रणनीति तभी विकसित हुई जब इसके इकोलॉजिकल फायदे इसकी लागत से ज्यादा रहे.’

रिसर्चर्स का अनुमान है कि सबट्रॉपिकल चीन के जंगलों में अभी कई और फंगस की खोज होगी. यहां का विविधता भरा माहौल और स्थिर जलवायु फंगस के विकास को बढ़ावा देते हैं. फील्ड सैंपलिंग की मुश्किलों और आर्थिक रूप से जरूरी फंगस पर ज्यादा ध्यान देने के कारण अब तक इन जंगलों की विविधता को कम आंका गया था.



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