एलन मस्क भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ‘स्टारलिंक’ बेचने के लिए मरे जा रहे हैं. जब भारत में बिना शर्त लाइसेंस मिलने का रास्ता साफ नहीं हुआ, तो मस्क बौखलाहट में गुंडागर्दी पर उतर आए, भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट करने लगे. माहौल बनाने लगे कि वो दुनिया के भले के लिए स्टारलिंक बेच रहे हैं. हालांकि, अब इसी स्टारलिंक की असलियत दुनिया के सामने आ गई है. मस्क ने पहले एक युद्धग्रस्त देश को स्टारलिंक बेचा, उससे पैसे कमाए और फिर जब उस देश पर सबसे बड़ी आफत आई, तो बिना कोई बताए सर्विस का स्विच बंद कर दिया. अब उदाहरण के साथ ये साबित हो गया है कि स्टारलिंक कोई टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अमेरिका का ब्लैकमेलिंग हथियार है.
जंग के बीच यूक्रेन के साथ स्टारलिंक की धोखेबाजी, मस्क ने बंद किया स्विच
स्टारलिंक की ये धोखेबाजी यूक्रेन के साथ हुई है, जो पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा सबक है. एलन मस्क जिसे ‘डिजिटल क्रांति’ बताकर बेच रहे हैं, वो स्टारलिंक असल में अमेरिकी हथियार है. कितने भी पैसे खर्च कर लो, इसका कंट्रोल सिर्फ मस्क और वाशिंगटन के हाथों में ही रहता है.
यूक्रेनी सरकार और सेना ने आधिकारिक पुष्टि की है कि बिना किसी चेतावनी के स्टारलिंक की स्पीड पर कैप लगा दिया गया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने खुलासा किया कि मस्क की कंपनी ने यूक्रेन की सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्टारशील्ड ‘मिलिट्री सर्विस पैकेज’ की स्पीड लिमिट कर दी है.
मस्क और ट्रंप ने पुतिन से ही सीक्रेट डील और स्टारलिंक बंद
यूक्रेन के युद्ध के मैदान में इस बार तबाही किसी रूसी मिसाइल या तोप के गोले से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में तैरते सैटेलाइट्स से आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई एक सीक्रेट डील के ठीक बाद, एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने यूक्रेन में स्टारलिंक की स्पीड को अचानक और बुरी तरह सीमित कर दिया है.
नियम ये बनाया गया है कि यदि कोई स्टारलिंक टर्मिनल लगभग 160 किमी प्रति घंटा से अधिक की रफ्तार से चल रहे वाहन या ड्रोन में होगा, तो उसकी इंटरनेट स्पीड तुरंत गिरा दी जाएगी. युद्ध के मैदान में इस एक पाबंदी ने यूक्रेन के सैन्य अभियानों को अपाहिज बना दिया है.
- इंटरसेप्टर ड्रोन हुए बेकार: यूक्रेन रूसी हवाई हमलों और मिसाइलों को रोकने के लिए जिन हाई-स्पीड काउंटर-ड्रोन का इस्तेमाल करता था, वो इसी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पर निर्भर थे. स्पीड सीमित होते ही ये ड्रोन हवा में ही नाकाम होने लगे हैं.
- अग्रिम मोर्चे पर थमी सेना: रूसी ठिकानों पर सटीक हमले करने, आर्टिलरी को कोऑर्डिनेट करने और रक्षात्मक मोर्चेबंदी बनाए रखने के लिए यूक्रेनी सैनिक स्टारलिंक पर ही टिके थे. इस अचानक लगे प्रतिबंध से फ्रंटलाइन पर यूक्रेन की हमले और डिफेंस की दोनों रणनीतियां ठप पड़ गई हैं.
यूक्रेन का कहना है कि ट्रंप और पुतिन की डील के तुरंत बाद मस्क द्वारा उठाया गया ये कदम कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सोची- साजिश है.
ट्रंप-पुतिन की डीजल डील और मस्क की जुगलबंदी
अमेरिका में आने वाले मिडटर्म चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है. वहां आम जनता महंगाई और खासकर डीजल के रिकॉर्ड दामों से बेहद नाराज है. अपनी घटती लोकप्रियता को बचाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने सारा दोष यूक्रेन और राष्ट्रपति जेलेंस्की पर मढ़ना शुरू कर दिया. ट्रंप का आरोप है कि यूक्रेन द्वारा रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर किए जा रहे हमलों की वजह से दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा है.
ट्रंप ने जेलेंस्की पर दबाव बनाया कि वो रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोक दें. लेकिन जेलेंस्की ने साफ कह दिया कि जब तक पुतिन यूक्रेन के बिजली और तेल ठिकानों पर बमबारी बंद नहीं करते, तब तक यूक्रेन अपने हमले नहीं रोकेगा.
इसके बाद अमेरिकी वोटरों को रिझाने के लिए ट्रंप ने पुतिन के साथ 18 लाख टन डीजल खरीदने की डील कर ली, जिससे पुतिन की झोली में करीब 33,000 करोड़ रुपए जाने का अनुमान है. इसी डील को अमलीजामा पहनाने और यूक्रेन को घुटनों पर लाने के लिए एलन मस्क ने स्टारलिंक का इस्तेमाल एक डिजिटल हथियार की तरह किया.
फ्लोरिडा में ब्लैकमेलिंग और खुफिया जानकारी रोकने की धमकी
द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोरिडा में अमेरिकी और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच हुई एक सीक्रेट बैठक में ट्रंप के करीबियों ने जेलेंस्की की टीम को ब्लैकमेल किया. अमेरिकी वार्ताकारों ने धमकी दी कि अगर यूक्रेन ने रूस पर हमले बंद नहीं किए, तो अमेरिका उसे दी जाने वाली सभी सैन्य खुफिया जानकारियां बंद कर देगा.
इससे पहले भी ट्रंप व्हाइट हाउस में जेलेंस्की के साथ लाइव टीवी के सामने बदसलूकी कर चुके हैं और सैन्य मदद रोक चुके हैं. लेकिन इस बार मस्क का स्टारलिंक अमेरिका का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है.
एलन मस्क का ‘मास्टर स्विच’ और भारत के लिए चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम ने ये साबित कर दिया है कि एलन मस्क के पास एक ऐसा ‘मास्टर स्विच’ है, जिसे दबाकर वो किसी भी देश की सुरक्षा व्यवस्था को पलक झपकते ही अपाहिज बना सकते हैं. मस्क ने ऐसा पहली बार नहीं किया है. इससे पहले सितंबर 2022 में भी जब यूक्रेनी सेना खेरसॉन के मोर्चे पर रूस के खिलाफ जवाबी हमला कर रही थी, तब भी मस्क के इशारे पर स्टारलिंक के 100 से ज्यादा टर्मिनल्स बंद कर दिए गए थे.
यही वजह है कि भारत जैसे देश के लिए मस्क की जिद के आगे न झुकना बिल्कुल सही साबित हुआ है. अगर भारत बिना कड़े सुरक्षा क्लीयरेंस और बिना लोकल कंट्रोल के स्टारलिंक जैसी विदेशी सैटेलाइट सेवाओं को एंट्री दे देता, तो कल को किसी कूटनीतिक तनाव की स्थिति में एलन मस्क भारत का भी डिजिटल स्विच बंद करने की हिम्मत कर सकते थे.
यूक्रेन का ये संकट दुनिया भर के देशों के लिए एक चेतावनी है कि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे को किसी विदेशी उद्योगपति या उसकी मनमर्जी पर छोड़ना कितना घातक हो सकता है.