खान-मोहम्मद और अली क्यों बन गए इस ईसाई देश के बच्चे? सिर्फ 3 दशकों में हुआ ये हाल, 6 हजार लड़कों ने पलट दिया इतिहास

खान-मोहम्मद और अली क्यों बन गए इस ईसाई देश के बच्चे? सिर्फ 3 दशकों में हुआ ये हाल, 6 हजार लड़कों ने पलट दिया इतिहास


इंग्लैंड में कभी स्मिथ, जोंस और विलियम्स जैसे सरनेम यानी उपनाम आम हुआ करते थे. ये नाम ब्रिटेन की पारंपरिक ईसाई पहचान का हिस्सा माने जाते थे. लेकिन अब नई पीढ़ी के बच्चों के नामों में बड़ा बदलाव दिख रहा है. 30 साल पहले नवजात बच्चों के बीच सबसे आम सरनेम की लिस्ट में स्मिथ, जोंस और विलियम्स का दबदबा था. अब इसी लिस्ट में खान, अहमद, अली, सिंह, पटेल और कौर जैसे उपनाम भी शीर्ष 10 में शामिल हो गए हैं. वहीं नामों की बात करें तो 2025 में मोहम्मद नाम सबसे ज्यादा रखा गया. लगातार बढ़ते मुस्लिम नामों के कारण सवाल उठ रहा है कि क्या ब्रिटेन में डेमोग्राफी बदल रही है. डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन में बच्चों के टाइटल में पहले से ज्यादा विविधता देखी जा रही है. जबकि कई पारंपरिक ब्रिटिश सरनेम कम हुए हैं.

1996 में इंग्लैंड और वेल्स में जन्मे बच्चों के बीच स्मिथ, जोंस और विलियम्स सबसे आम उपनाम थे. उस समय टेलर, ब्राउन, डेविस, इवांस, थॉमस, जॉनसन और विल्सन भी टॉप 10 में शामिल थे. लेकिन तीन दशक बाद तस्वीर काफी बदल गई है. अब नवजात बच्चों के सबसे आम सरनेम की लिस्ट में स्मिथ पहले स्थान पर है. खान दूसरे और अहमद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. अली चौथे, जोंस पांचवें और हुसैन छठे स्थान पर हैं. वहीं, सिंह सातवें, विलियम्स आठवें, पटेल नौवें और कौर दसवें स्थान पर हैं.

30 साल में कितने बदले सरनेम?

आंकड़ों के मुताबिक, कई पारंपरिक ब्रिटिश उपनामों की लोकप्रियता में गिरावट आई है. जोंस अब भी टॉप 10 में है, लेकिन इसकी लोकप्रियता 43 फीसदी घट गई है. विलियम्स के मामले में भी लगभग इतनी ही गिरावट दर्ज की गई है. 1990 के दशक में आम रहे कई दूसरे उपनाम अब 11वें से 17वें स्थान के बीच पहुंच गए हैं. इसके उलट, खान, अहमद और अली जैसे उपनामों की लोकप्रियता दोगुनी हो गई है. ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ONS) से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, सिंह और कौर जैसे उपनामों का इस्तेमाल कम से कम पांच गुना बढ़ा है. ये नाम परंपरागत रूप से सिख पुरुषों और महिलाओं के सरनेम के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं.

अब बच्चों को दिए जा रहे हैं ज्यादा सरनेम

बदलाव सिर्फ शीर्ष 10 नामों तक सीमित नहीं है. बच्चों के साथ दर्ज किए जाने वाले उपनामों की कुल संख्या भी बढ़ी है. 2025 में जन्मे बच्चों के साथ 23,400 से ज्यादा अलग-अलग उपनाम दर्ज किए गए. 1996 में यह संख्या करीब 21,600 थी. एक और दिलचस्प बदलाव यह है कि अब बहुत बड़ी संख्या में बच्चों को एक ही उपनाम देने का चलन पहले के मुकाबले कम दिखाई देता है. 2025 में सिर्फ 23 उपनाम ऐसे थे, जो कम से कम 1,000 बच्चों के साथ दर्ज किए गए. तीन दशक पहले ऐसे उपनामों की संख्या 57 थी.

स्मिथ अब भी सबसे आम उपनाम बना हुआ है, लेकिन इस नाम वाले बच्चों की संख्या में भी गिरावट आई है. 1996 में 7,276 बच्चों के साथ स्मिथ उपनाम दर्ज किया गया था. 2025 में यह संख्या घटकर 4,102 रह गई. ये आंकड़े इंग्लैंड और वेल्स में दर्ज जन्मों पर आधारित हैं. इनमें उन सरनेम को शामिल नहीं किया गया, जिनकी संख्या दो या उससे कम थी. आंकड़ों में नामों की वर्तनी को भी बिल्कुल उसी रूप में गिना गया है, जिस रूप में उसे दर्ज किया गया था. इसलिए एक ही उपनाम की अलग-अलग वर्तनी को अलग-अलग नाम माना गया है.

ब्रिटेन की बदलती आबादी पर क्या बोले एक्सपर्ट्स?

ब्रिटेन में उपनामों की बदलती तस्वीर पर प्रवासन नियंत्रण से जुड़े थिंक टैंक सेंटर फॉर माइग्रेशन कंट्रोल के रॉब बेट्स ने कहा कि ये आंकड़े देश में तेजी से हो रहे आबादी की डेमोग्राफी में बदलाव को दिखाते हैं. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ब्रिटेन अपनी विरासत से दूर हो सकता है और इसके कारण समाज में लोगों के बीच बिखराव बढ़ सकता है. हालांकि, उपनामों के ये आंकड़े अपने आप में किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता, नागरिकता या उसकी पूरी पहचान नहीं बताते. ये सिर्फ यह दिखाते हैं कि इंग्लैंड और वेल्स में जन्मे बच्चों के साथ अलग-अलग उपनाम कितनी बार दर्ज किए गए.

मोहम्मद नाम सबसे ज्यादा रखा गया

ब्रिटेन में बच्चों के नामों को लेकर बदलाव सिर्फ सरनेम तक सीमित नहीं है. इस साल गर्मियों में जारी आंकड़ों के मुताबिक, मुहम्मद लगातार तीसरे साल इंग्लैंड और वेल्स में लड़कों का सबसे लोकप्रिय नाम रहा. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2025 में 5,957 लड़कों का नाम मुहम्मद रखा गया. लड़कियों के नामों में ओलिविया लगातार चौथे साल पहले स्थान पर रही, जबकि लिली दूसरे स्थान पर पहुंच गई. 2024 में लड़कियों के बीच दूसरे स्थान पर रही अमेलिया अब तीसरे नंबर पर आ गई है. लड़कों के नामों में नूह दूसरे और लियो तीसरे स्थान पर रहे.



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