पॉलीकैब इंडिया के शेयरों में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली है. बुधवार, 14 अक्टूबर को कारोबारी सेशन के दौरान कंपनी का शेयर NSE पर 5.40% तक गिरकर ₹7,842 के लो लेवल पर पहुंच गया. हालांकि, बाद में इसमें रिकवरी आई और शेयर करीब ₹8,310.50 पर कारोबार करता दिखा. पिछले दो कारोबारी सेशन में शेयर करीब 6% टूट चुका है. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि आखिर कंपनी के शेयर में इतनी हलचल क्यों है और क्या इसका अदालत में चल रहे मामले से कोई संबंध है?
दरअसल, पॉलीकैब के शेयरों पर इस समय दो फैक्टर्स का असर देखने को मिल रहा है. पहली, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने कंपनी को फ्यूचर और ऑप्शन यानी F&O सेगमेंट से बाहर करने का फैसला लिया है. दूसरी, कंपनी के खिलाफ ₹2.79 करोड़ के कथित बकाये को लेकर दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का मामला अदालत में पहुंचा है. हालांकि, National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने इस प्रक्रिया को शुरू करने वाले आदेश पर रोक लगा रखी है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी.
F&O से बाहर होने का क्या मतलब है?
NSE ने 12 अक्टूबर को जारी सर्कुलर में कहा कि पॉलीकैब के मौजूदा फ्यूचर और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2026 तक चलते रहेंगे. लेकिन 30 दिसंबर के बाद कंपनी के लिए नए एक्सपायरी महीनों के कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किए जाएंगे. यानी तय समय के बाद ट्रेडर्स पॉलीकैब के शेयरों में F&O के नए कॉन्ट्रैक्ट नहीं बना सकेंगे.
इसके अलावा, NSE ने मौजूदा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट पर 100% मार्जिन लगाने का भी फैसला किया है. यह नियम 13 अक्टूबर तक ओपन पोजीशन और 14 अक्टूबर से बनाई गई नई पोजीशन पर लागू होगा. इसका मतलब है कि ट्रेडर्स को इन कॉन्ट्रैक्ट में कारोबार करने के लिए ज्यादा रकम मार्जिन के तौर पर रखनी होगी. इससे डेरिवेटिव बाजार में कारोबार करना महंगा हो सकता है और कुछ ट्रेडर्स अपनी पोजीशन कम कर सकते हैं.
₹2.79 करोड़ के बकाये से कैसे जुड़ा है अदालत का मामला?
आसिर मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड ने पॉलीकैब के खिलाफ ₹2.79 करोड़ के कथित कारोबारी बकाये को लेकर याचिका दायर की थी. 7 अक्टूबर को अहमदाबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने याचिका एक्सेप्ट करते हुए कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया यानी Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) शुरू करने का आदेश दिया था.
इसके बाद पॉलीकैब ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील की. 9 अक्टूबर को NCLAT ने NCLT के आदेश पर रोक लगा दी और उसे अगले आदेश तक स्थगित रखा. इसका मतलब है कि फिलहाल दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने वाला आदेश लागू नहीं है. यह मामला अभी अंतिम रूप से खत्म नहीं हुआ है.
14 अक्टूबर को कंपनी ने बताया कि NCLAT ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार कर ली है. पहले सुनवाई 26 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन अब यह 15 अक्टूबर को होगी. इसलिए अदालत का अगला फैसला शेयर पर निवेशकों की नजर बनाए रखने की एक अहम वजह है.
क्या कारोबार पर असर पड़ेगा?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीकैब का कहना है कि उसके पास इस मामले में अपना पक्ष रखने के मजबूत आधार हैं. कंपनी इसे ₹2.79 करोड़ का व्यावसायिक विवाद बताती है और अदालत के आदेश को चुनौती दे रही है. कंपनी ने यह भी कहा है कि फिलहाल उसका कारोबार और प्रबंधन सामान्य रूप से चल रहा है.
वित्तीय स्थिति पर कंपनी के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिट किए गए आंकड़ों के अनुसार उसके पास ₹4,000 करोड़ से ज्यादा का नेट कैश था और नेटवर्थ ₹11,682 करोड़ थी. कंपनी का कहना है कि इस मामले से उसके कारोबार या वित्तीय स्थिति पर किसी बड़े नेगेटिव असर की आशंका नहीं है. ये कंपनी की ओर से दिए गए आंकड़े और दावे हैं. अदालत में मामले का अंतिम नतीजा अभी आना बाकी है.
निवेशकों को अब किन बातों पर नजर रखनी चाहिए
पॉलीकैब के शेयरों में मौजूदा गिरावट के पीछे F&O से बाहर होने का फैसला और दिवालिया मामले से जुड़ी अनिश्चितता दोनों चर्चा में हैं. हालांकि, सिर्फ शेयर की गिरावट से यह तय नहीं किया जा सकता कि आगे इसकी कीमत किस दिशा में जाएगी. 15 अक्टूबर को NCLAT की सुनवाई में क्या होता है, यह अहम रहेगा. साथ ही, F&O कॉन्ट्रैक्ट बंद करने और मार्जिन से जुड़े NSE के नियम भी बाजार के कारोबार को प्रभावित कर सकते हैं.
पॉलीकैब के शेयरों ने पिछले पांच साल में 200% से ज्यादा रिटर्न दिया है, लेकिन पिछला रिटर्न भविष्य में भी वैसा ही परफॉर्मेंस होने की गारंटी नहीं देता. निवेशकों के लिए कंपनी के आधिकारिक अपडेट, अदालत के आदेश और एक्सचेंज के ऐलान पर नजर रखना जरूरी है.