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Bahraich News: दुर्गा देवी और उनके पति अय्यर का परिवार मूल रूप से मद्रास तमिलनाडु के मदुरै जिले का रहने वाला है. दुर्गा देवी के माता-पिता करीब 40 साल पहले शादी के बाद यहां आकर बस गए थे. अय्यर जी मद्रास में एक बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और उस समय उनकी सैलरी लगभग 20,000 रुपये थी. हालांकि, परिवार के आग्रह और मां के अकेले होने पर वे अपनी नौकरी और दक्षिणी जीवन को छोड़कर लगभग 15 साल पहले बहराइच आ गए.
बहराइचः जिले में दक्षिण भारत मद्रास से आकर बसे एक परिवार की कहानी आज कई लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल बन चुकी है. मद्रास के एक बैंक में मैनेजर की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने के बाद, परिवार ने बहराइच की धरती पर आकर संघर्ष किया और आज एक सफल रेस्टोरेंट व डोसे का व्यापार चला रहा है. जो अब बहराइच वासियों को खूब पसंद भी आ रहा है.
मदुरै की रहने वाली हैं दुर्गा
दुर्गा देवी और उनके पति अय्यर का परिवार मूल रूप से मद्रास तमिलनाडु के मदुरै जिले का रहने वाला है. दुर्गा देवी के माता-पिता करीब 40 साल पहले शादी के बाद यहां आकर बस गए थे. अय्यर जी मद्रास में एक बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे और उस समय उनकी सैलरी लगभग 20,000 रुपये थी. हालांकि, परिवार के आग्रह और मां के अकेले होने पर वे अपनी नौकरी और दक्षिणी जीवन को छोड़कर लगभग 15 साल पहले बहराइच आ गए.
भाषा की अनभिज्ञता और शुरुआती संघर्ष
बहराइच आने के बाद इस परिवार को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी दिक्कत भाषा की थी, क्योंकि अय्यर जी को हिंदी बिल्कुल नहीं आती थी. शुरुआत में भाषा की इस दीवार और तमाम परेशानियों के बीच उन्होंने भाई के साथ मिलकर एक दुकान की शुरुआत की. लगभग 10 साल तक कड़ा संघर्ष करने के बाद उन्होंने व्यापार में अपनी पकड़ मजबूत की. पति-पत्नी का अटूट साथ और स्वादिष्ट व्यंजनों का सफर अय्यर जी ने हिंदी न जानते हुए भी मंडी जाना, ग्राहकों को संभालना और पूरे मैनेजमेंट को बखूबी संभाला. आज वे बहराइच में अपने हाथों से बने दक्षिण भारतीय व्यंजनों जैसे डोसा आदि और बेहतरीन स्वाद के जरिए लोगों का दिल जीत रहे हैं. दुर्गा देवी बताती हैं कि उनके पति की मेहनत और स्थानीय लोगों के मिले-जुले सहयोग के कारण ही आज उनकी गाड़ी सफलतापूकड़ चल रही है.
पति पत्नि मिलकर चलाते हैं रेस्टोरेंट
आज दुर्गा देवी और उनके पति अपने दो बच्चों के साथ बहराइच में एक खुशहाल और सफल जीवन जी रहे हैं. शुरुआती असहजता के बाद बहराइच के लोगों से मिले भरपूर समर्थन और आपसी तालमेल के दम पर इस परिवार ने साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों और मजबूत हौसले के साथ कहीं भी नई शुरुआत की जा सकती है. इनका एक छोटा सा रेस्टोरेंट जो काफी फेमस भी है बहराइच शहर में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के गेट के सामने बना हुआ है जहां पर पति-पत्नी मिलकर इस रेस्टोरेंट को चलते हैं.