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Seoni News: मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की SNCU में छह महीनों में 80 नवजातों की मौत हुई. बीजेपी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने लापरवाही के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की. वहीं, अस्पताल प्रशासन ने समय से पहले जन्म और कम वजन को मौतों की प्रमुख वजह बताया है.
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Seoni Hospital Newborn Deaths: मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में 6 महीनों के दौरान कम से कम 80 नवजात बच्चों की मौत हुई है. स्थानीय बीजेपी विधायक दिनेश राय मुनमुन ने इन मौतों की जांच की मांग की है. अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच करीब 34 और जुलाई से सितंबर के बीच 46 बच्चों की मौत हुई.
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार नवकर ने बताया कि जिले के दूर-दराज इलाकों से गंभीर रूप से बीमार नवजातों को यहां रेफर किया जाता है. कई बच्चे 6, 7 या 8 महीने में ही पैदा हो जाते हैं और उन्हें खास देखभाल की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों में मौत का खतरा ज्यादा होता है. उनके अनुसार, ऐसे मामलों में मृत्यु दर (Mortality rate) 48 % तक हो सकती है.
अस्पताल ने छह महीनों में 1,188 नवजातों का इलाज किया. इनमें से 642 बच्चों का जन्म के समय वेट नॉर्मल से कम था. कुछ बच्चों का वजन तो सिर्फ 500 ग्राम था. डॉ. नवकर ने कहा कि SNCU की मृत्यु दर 7.5 प्रतिशत से कम है, जो जबलपुर के बाकी जिलों से कम है. उन्होंने बताया कि इसके लिए सुझाया गया मानक 10 प्रतिशत है. उन्होंने मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग से और सहयोग की जरूरत भी बताई.
बीजेपी विधायक ने लगाए आरोप
विधायक दिनेश राय ने बीते मंगलवार यानी 13 अक्टूबर को आरोप लगाया कि रात में बच्चों को देखने के लिए डॉक्टर मौजूद नहीं रहते हैं. उनके मुताबिक, सांस की तकलीफ से 46 बच्चों की मौत हुई. अस्पताल में वेंटिलेटर है, लेकिन उसे संभालने के लिए डॉक्टर नहीं होते और नर्सों को भी ट्रेनिंग नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टरों की लापरवाही से बच्चों की जान गई है, तो दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए.
राय ने बताया कि शिकायतों के बाद वे अचानक निरीक्षण करने पहुंचे. आउटसोर्स कर्मचारियों ने पहले उन्हें अंदर जाने से रोकने की कोशिश की. उस समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था. उन्होंने यह भी कहा कि गंभीर बच्चों को दूसरी जगह रेफर किया जाता है, इसलिए अस्पताल के आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं बताते हैं.
परिवारों की शिकायत
कई परिजनों ने भी इलाज में देरी के आरोप लगाए हैं. बरघाट ब्लॉक के मनीष वरकड़े ने कहा कि जुलाई में पत्नी को रेफर कर सिवनी लाया गया, लेकिन समय पर ध्यान नहीं दिया गया और बच्चे की मौत हो गई. जावरकाठी के संजय उइके के अनुसार, उनका बच्चा 7वें महीने में पैदा हुआ था और वजन करीब 1.6 किलो था. कई दिन SNCU में रहने के बाद दूसरी मशीन पर ले जाने के कुछ घंटों में उसकी मौत हो गई.