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Udaipur Edana Mata Temple: उदयपुर का ईडाणा माता मंदिर लकवा से पीड़ित मरीजों की आस्था और अग्नि स्नान के लिए प्रसिद्ध है. नवरात्र में यहां भक्तों का तांता लगता है. मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से पैरालिसिस में राहत मिलती है. महीने में दो-तीन बार यहां स्वतः अग्नि स्नान की अद्भुत घटना होती है. संतान प्राप्ति के लिए भी दंपती मन्नत मांगने आते हैं. अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर मेवाड़ का प्रमुख और चमत्कारी धार्मिक केंद्र है.
उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित ईडाणा माता मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं और चमत्कारी अग्नि स्नान की परंपरा के लिए देशभर में अपनी एक अलग पहचान रखता है. शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर यहां माता रानी के दर्शन करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे लकवा यानी पैरालिसिस से पीड़ित मरीजों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. ऐसा माना जाता है कि माता के दरबार में मत्था टेकने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को राहत मिलती है, जिसके कारण यहां सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है.
ईडाणा माता मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि माता रानी की कृपा से लाइलाज मानी जाने वाली समस्याएं भी दूर हो जाती हैं. लकवा जैसी गंभीर बीमारी से परेशान कई लोग अपने परिजनों के साथ यहां पहुंचते हैं और माता से जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं. हालांकि, चिकित्सा विज्ञान के नजरिए से लकवा एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसके लिए डॉक्टर की सलाह और सही समय पर इलाज बेहद जरूरी है, लेकिन श्रद्धालुओं की यह आस्था इस मंदिर को एक आध्यात्मिक और शक्तिशाली उपचार केंद्र के रूप में स्थापित करती है.
महीने में दो से तीन बार अग्नि स्नान का रहस्य
इस मंदिर की ख्याति केवल लकवा निवारण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां होने वाला रहस्यमयी ‘अग्नि स्नान’ भी देश भर में चर्चा का मुख्य विषय रहता है. मान्यता के अनुसार, महीने में दो से तीन बार माता की प्रतिमा के चारों तरफ अपने आप अचानक आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगती हैं. भक्तों का विश्वास है कि माता रानी स्वयं इस अग्नि में स्नान करती हैं. इस अनोखी और अलौकिक घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में इकट्ठा होते हैं. विज्ञान के स्तर पर इसके कारणों को लेकर भले ही कोई स्पष्ट पुष्टि न हो पाई हो, लेकिन भक्त इसे किसी बड़े चमत्कार के रूप में ही देखते हैं.
संतान प्राप्ति और मन्नतें पूरी होने की परंपरा
ईडाणा माता के दरबार में केवल रोग मुक्ति ही नहीं, बल्कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले निःसंतान दंपती भी अपनी झोली फैलाने आते हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार, जब भक्तों की मन्नतें पूरी हो जाती हैं, तो वे धन्यवाद स्वरूप मंदिर में पारंपरिक झूला और पवित्र त्रिशूल अर्पित करते हैं. नवरात्र के विशेष दिनों में यहां का धार्मिक माहौल और भी अधिक दिव्य हो जाता है, जहां हर भक्त माता की पूजा-अर्चना करके अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करता है.
अरावली की प्राकृतिक पहाड़ियों के बीच स्थित पवित्र धाम
उदयपुर शहर से लगभग 60 से 65 किलोमीटर की दूरी पर कुराबड़-बम्बोरा मार्ग पर स्थित यह मंदिर अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों के आंचल में बसा हुआ है. प्रकृति की गोद में स्थित होने के कारण यहां का वातावरण बेहद शांत और मनमोहक है. लकवा से राहत पाने की उम्मीद हो या जीवन में खुशहाली लाने की कामना, मेवाड़ अंचल के इस प्रमुख आस्था केंद्र पर आने वाला हर श्रद्धालु एक नई सकारात्मक ऊर्जा और अटूट विश्वास के साथ लौटता है.