इंदौर का वो स्कूल जो बच्चों के सोशल मीडिया बैन कराने पहुंच गया सुप्रीम कोर्ट, क्यों रखी ये डिमांड?


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इंदौर में एक स्कूल और उसके डायरेक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें बच्चों को सोशल मीडिया के यूज पर रोक लगाने की मांग की है. याचिका में बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले खतरों के बारे में भी बताया गया है. बताया गया है कि बच्चों के लिए वहां सुरक्षित माहौल नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका पर सुनवाई के लिए तारीख तय नहीं की है.

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'बच्चों के सोशल मीडिया पर लगे रोक', इंदौर का ये स्कूल पहुंचा SC, रखी डिमांडZoom

इंदौर के एक स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में बच्चों के सोशल मीडिया बैन को लेकर लगाई याचिका (AI तस्वीर)

मध्य प्रदेश के इंदौर में एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके डायरेक्टर सिद्धार्थ सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लगाई है, जिसमें उन्होंने बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है. इसके अलावा याचिका में ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए एक रेगूलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की मांग की है. उनकी तरफ से बताया गया है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए सिर्फ टेक्नोलॉजी कंपनियों के भरोसे पर नहीं छोड़ा जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए तय नहीं हुई है तारीख
एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके डायरेक्टर सिद्धार्थ सिंह ने जो PIL दाखिल की है. उसमें साइबर बुलिंग, यौन शोषण, हानिकारक कंटेंट का सामना करना, इसकी लत लगना और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बताई गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका पर सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की है.

याचिका ने इन अनुच्छेद का किया गया जिक्र
याचिका में एक तय उम्र से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने और उससे ज्यादा उम्र वालों के लिए इसके इस्तेमाल को रेगुलेट करने, या खास प्लेटफॉर्म पर बच्चों के अकाउंट पर उम्र के आधार पर लागू होने वाली पाबंदियां लगाने की मांग की गई है.

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 39(f) का जिक्र किया गया है, जो राज्य को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देता है कि बच्चों का विकास स्वस्थ तरीके से और आजादी, सम्मान के माहौल में हो. याचिका में अनुच्छेद 39(e) का भी हवाला दिया गया है, जो बच्चों की कम उम्र का फायदा उठाकर उनके शोषण से सुरक्षा से संबंधित है.

सोशल मीडिया से होने वाले चुनौतियों से किया आगाह
याचिकाकर्ताओं की तरफ से याचिका वकील वैभव चौधरी ने दायर की है. इसे वकील खुशबू जैन, मयंक सिंह रावत और जैद अहमद ने तैयार किया था. याचिका के अनुसार सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान तब तक बिना ध्यान में आए पनप सकते हैं, जब तक कि गंभीर नुकसान न हो जाए. सिर्फ भरोसा दिलाने वाले बयानों, प्लेटफॉर्म के स्वैच्छिक उपायों या माता-पिता के कंट्रोल से इनका ठीक से समाधान नहीं किया जा सकता.

क्या बोली वकील खुशबू जैन?
वकील खुशबू जैन ने कहा संविधान में ऐसे बचपन की कल्पना नहीं की गई है जो शोषण, परेशानी या उपेक्षा से भरा हो. यह चाहता है कि बच्चे आजादी और सम्मान के माहौल में स्वस्थ तरीके से विकसित हों. बच्चे सोशल मीडिया पर रहते हैं और वह सुरक्षित माहौल नहीं देता है.



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