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Atar Singh Bhadana Murder Case : सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में गुर्जर नेता पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद राजस्थान में सियासी तूफान आया हुआ है. पूरा विपक्ष बीजेपी सरकार पर हमलावर हो रहा है. वहीं गुर्जर समाज में भी जबर्दस्त आक्रोश है. अतर सिंह भड़ाना भले ही विधायक एक बार ही रहे हों लेकिन उनकी गुर्जर आरक्षण आंदोलन में बड़ी भूमिका रही है. राजस्थान की सियासत गुर्जर समाज से बेहद संवेदनशील तरीके से जुड़ी हुई है. भड़ाना की हत्या से इस पर कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं.
अतर सिंह भड़ाना गुर्जर आरक्षण आंदोलन के समय सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद सेतु की भूमिका में थे.
जयपुर. पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड ने राजस्थान में सियासी तूफान ला दिया है. क्रेशर लीज के रास्ते के विवाद में भड़ाना को रविवार रात को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया. पूर्व विधायक की हत्या के बाद पूरा विपक्ष सूबे की भजनलाल सरकार पर हमलावर हो गया है. पूर्व सीएम अशोक गहलोत और राजस्थान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा समेत पूरी कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेर लिया है. सीएम भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में हुए पूर्व विधायक के खौफनाक हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है. कांग्रेस का कहना है कि सूबे में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है.
राजस्थान में आरक्षण को लेकर सबसे बड़ा आंदोलन गुर्जर समाज ने ही शुरू किया था
राजस्थान की राजनीति में गुर्जर समाज का अहम रोल अदा करता है. आरक्षण की मांग को लेकर अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन गुर्जर समाज ने ही खड़ा किया था. इस आंदोलन में करीब 72 लोगों की जानें गई थी. इस आंदोलन के बाद आज भी गुर्जर समाज इस जंग को लड़ रहा है. यही वजह कि उसके बाद राजस्थान में जितनी भी सरकारें बनीं चाहे वह बीजेपी की हो या फिर कांग्रेस की गुर्जर से समुदाय को उनमें प्रतिनिधत्व मिलता रहा है. राजस्थान के दिग्गज नेता सचिन पायलट भी गुर्जर समाज से आते हैं. कांग्रेस के तेज तर्रार नेता प्रहलाद गुंजल भी गुर्जर समाज से है. गुर्जर आरक्षण आंदोलन में वे भड़ाना के साथ काम कर चुके हैं.
भड़ाना सरकार और गुर्जर समाज के बीच एक सेतु की भूमिका में थे
आरक्षण आंदोलन को कवर कर चुके राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार सुधीर शर्मा बताते हैं कि इस आंदोलन की प्रारंभिक रूपरेखा भड़ाना के आवास पर ही बनी थी. भड़ाना इस आंदोनल में सरकार और गुर्जर समाज के बीच एक सेतु की भूमिका में थे. आरक्षण आंदोलन को लेकर उनकी दोनों की पक्षों (सरकार और आंदोलनकारियों) के विभिन्न मंचों पर मजबूत उपस्थिति रही. इसलिए भड़ाना का गुर्जर समाज का एक मजबूत स्ंतभ माना जाता रहा है. इस आंदोलन ने गुर्जर समाज को एक नई राजनीतिक पहचान दी.
गुर्जर आरक्षण आंदोलन की आग राजस्थान में ऐसी धधकी थी कि बाद में बीजेपी और कांग्रेस ने गुर्जर समाज को लेकर अतिरिक्त सर्तकता बरतनी शुरू कर दी. पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में गुर्जर समाज के कोटे से अशोक चांदना मंत्री रहे थे. वहीं वर्तमान भजनलाल सरकार में गुर्जर समाज के नेता जवाहर सिंह बेढ़म गृह राज्यमंत्री हैं. बेढम भी भरतपुर जिले से ही है. राजस्थान में गुर्जर समाज की मौजूदगी अधिकतर पूर्वी राजस्थान के दौसा, करौली, सवाई माधोपुर और भरतपुर इलाके में है.
भड़ाना बयाना से ही विधायक रहे थे
गुर्जर आरक्षण आंदोलन का केन्द्र बिन्दु रहा पीलूपुरा भी भरतपुर के बयाना इलाके में है. अतर सिंह भड़ाना बयाना से ही बीजेपी के विधायक रहे थे. लाजिमी है उसमें उनका हस्तक्षेप रहा. वे आंदोलनकारियों और सरकार के बीच संवाद सेतु भी थे. राजस्थान में जब साल 2007 में गुर्जर आरक्षण भड़का था तब सूबे बीजेपी की सरकार थी. वसुंधरा राजे सूबे की सीएम थीं. बताया जाता है कि आरक्षण आंदोलन को लेकर ही भड़ाना के सरकार से मतभेद हुए थे. उसके बाद वे पहले बहुजन समाज पार्टी और बाद में कांग्रेस में गए थे. लेकिन फिर बीजेपी में लौट आए.
गुर्जर आरक्षण आंदोलन ने पार्टियों को झुका दिया था
आरक्षण आंदोलन ने राजस्थान की सियासत में गुर्जर समाज के सामने पार्टियों को झुका दिया था. उसके बाद गुर्जर समाज का राजस्थान की राजनीति में एक अलग ही दबदबा कायम हो गया. गुर्जर आरक्षण आंदोलन को लीड करने वाले कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला से चाहे बीजेपी या हो या फिर कांग्रेस सरकार सभी ने सामजंस्य बनाए रखा. अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद गुर्जर समाज आक्रोशित है. गुर्जर समाज का कहना है कि भड़ाना की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता. अगर इस मामले में जल्द ही कुछ नहीं हुआ तो आने वाले समय में इसका असर राजनीति में कई तरह से देखने को मिल सकता है.