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सऊदी और हूतियों के बीच चल रही जंग की आग अब अफ्रीकी देशों तक पहुंच रही है. खासतौर से जिबूती पर सबसे ज्यादा खतरा है. इसके अलावा इथियोपिया भी जातीय हिंसा से जूझ रहा है. अगर इस तनाव की वजह से अंतराष्ट्रीय समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ तो हालात और बिगड़ जाएंगे.
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सऊदी अरब और हूतियों के बीच छिड़े नए संघर्ष का असर अब अफ्रीका तक दिख रहा है. लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों और जहाजों पर बढ़ते खतरे के बीच इथियोपिया में दोबारा हिंसा भड़क गई है. इससे क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी खतरा मंडरा रहा है. खास तौर से जिबूती और इथियोपिया पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है. ऐसा इसलिए क्योंकि इनका मुख्य व्यापार लाल सागर व अदन की खाड़ी से ही होता है.
दरअसल सऊदी और हूतियों के बीच युद्ध का केंद्र बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य है. यही लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. यह स्वेज नजर से रास्ते एशिया तथा यूरोप के बीच होने वाले समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है. अगर इस रास्ते पर आवाजाही बाधित होती है तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिण से होकर लंबा रास्ता लेना पड़ेगा.
यहां हूतियों के हमले की आशंका इसलिए ज्यादा है, क्योंकि 2023 में जब इजराइल ने हमास के विरुद्ध बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया था, तब भी हूतियों ने यहां से गुजरने वाले कई जहाजों को विरोध के तौर पर निशाना बनाया था. अगर ऐसा होता है तो बाकी देशों की तरह अफ्रीकी देशों को भी लंबा रास्ता लेना पड़ेगा. इससे महंगाई और आपूर्ति संबंधी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. इससे जिबूती और इथियोपिया पर भी असर पड़ेगा.
जिबूती अफ्रीका हॉर्न का प्रमुख देश है. इसकी आबादी तकरीबन 10 लाख है. बेशक ये आकार में छोटा है मगर इसकी भागौलिक स्थिति वैश्विक व्यापार और सैन्य गतिविधियों के लिए अहम मानी जाती है. लाल सागर और अदन की खाड़ी के प्रवेश मार्ग के पास होने की वजह से यहां के बंदरगाह जहाजों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण हैं. इसीलिए सिर्फ अमेरिका नहीं, बल्कि चीन, फ्रांस, इटली और जापान समेत कई देशों के सैन्य अड्डे जिबूती में है.
यहां के बंदरगाह न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी समुद्र तक पहुंच का प्रमुख माध्यम हैं. अगर हूती बाब अल मंडेब में जहाजों को निशाना बनाते हैा तो जिबूती के बंदरगाहों से माल ढुलाई ठप होने का खतरा बढ़ जाएगा. UNDP की प्रतिनिधि रोक्कासाल्वो के मुताबिक जिबूती की अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार से ही मजबूत होती है, लेकिन जब लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते से जहाज बचने लगते हैं तो अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है.
यमन में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर जिबूती में दिखने भी लगा है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी UNCHR के मुताबिक यमन से अब तक जिबूती में 3700 शरणार्थी पहुंचे हैं. इनमें ज्यादातर संख्या महिलाओं और बच्चों की है. ये लोग उत्तरी ओबॉक में पहुंचे हैं. संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के मुताबिक वह 10,000 लोगों की मदद करने की तैयारी कर रही है, जिनके जिबूती पहुंचने की संभावना है. DW ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के जिबूती प्रतिनिधि के हवाले से लिखा है किएक तरफ शरणार्थियों की संख्या बढ़ने से भोजन, पानी और आवास की जरूरतें प्रभावित हो रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ समुद्री व्यापार में बाधा से देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.
उधर इथियोपिया में दोबारा हिंसा भड़क गई है. इसका कारण टाइग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट और केंद्र सरकार के बीच विवाद है. 2022 में दोनों के बीच एक शांति समझौता हुआ था. मगर हाल ही में अमहारा और ओरोमिया जैसे अन्य क्षेत्रों में सशस्त्र संघर्ष और जातीय हिंसा भड़क गई है. मुसीबत इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इथियोपिया में लोग पहले ही गंभीर सूखा और अकाल जैसे आपदाएं झेल रहा है.
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