₹500 लागत, 30 दिन में प्रति कट्ठा ₹15 हजार तक आमदनी, गया में 100 बीघे में होती है इस हरी पत्ती की खेती

₹500 लागत, 30 दिन में प्रति कट्ठा ₹15 हजार तक आमदनी, गया में 100 बीघे में होती है इस हरी पत्ती की खेती


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₹500 लागत, 30 दिन में प्रति कट्ठा ₹15 हजार तक आमदनी, मालामाल बना देगी यह खेती

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Gaya Coriander Cultivation: गया जिले के मानपुर प्रखंड में किसान बड़े पैमाने पर धनिया की खेती कर रहे हैं. अक्टूबर से फरवरी तक चलने वाली इस खेती में मात्र 30 दिन में फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को प्रति कट्ठा 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है. खरीदार खेत से ही फसल खरीद लेते हैं.

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गया. गया जिले के मानपुर प्रखंड क्षेत्र में बड़े स्तर पर धनिया की खेती की जाती है. प्रखंड क्षेत्र के ननौक, सोंधी, महुआर, नौधरिया, नवादा, शादीपुर जैसे गांव में लगभग 100 बीघा में इसकी खेती होती है. अक्टूबर का महीना धनिया की खेती शुरू करने के लिए सबसे बेहतर समय माना गया है. यहां के किसान लगातार 4 महीने तक फसल लेते हैं और इसकी खेती से अच्छा मुनाफा करते हैं. इस क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से सुरेंद्र K-7, K-3, अशोका और वीएनआर कंपनी का बीज लगाते हैं और मात्र 30 दिनों में यह फसल तैयार हो जाती है.

अक्टूबर से शुरू होकर फरवरी माह तक यहां के किसान फसल लेते हैं और हर 30-32 दिन पर हार्वेस्टिंग करने के बाद इस खेत में फिर से धनिया की बुवाई कर देते हैं. बुवाई के तीसरे दिन बीज अंकुरित होने लगता है और एक महीने के अंदर 2 से 3 पटवन में धनिया की फसल पूरी तरह से तैयार हो जाती है.

खेत से ही बिक जाती है धनिया
धनिया बेचने के लिए यहां के किसानों को बाजार भी नहीं जाना होता और व्यापारी खुद इनके खेत तक पहुंचकर पूरे खेत की खरीदारी कर लेते हैं. फसल देखकर रेट तय किया जाता है और अच्छी फसल होने पर किसानों को प्रति कट्ठा 20 हजार रुपए तक मिल जाता है. अगात फसल से इस क्षेत्र के किसानों को अच्छी आमदनी हो जाती है और प्रति कट्ठा व्यापारी इन किसानों को 15 से 20 हजार रुपए दे देते हैं.

इन महीनों में कम हो जाता है भाव
दिसंबर-जनवरी माह के दौरान इसका भाव कम हो जाता है और उस समय 6-8 हजार रुपए प्रति कट्ठा धनिया बिकती है. इस क्षेत्र के किसान दो से तीन बार एक ही खेत से धनिया की फसल लेते हैं और सीजन में प्रति कट्ठा 35-40 हजार रुपये की कमाई कर लेते हैं. नवादा गांव के किसान जीवेश कुमार यादव, जो लगभग दो कट्ठे में धनिया की बुवाई कर रहे हैं, इन्होंने बताया कि धनिया की खेती में प्रति कट्ठा मात्र 500 रुपये की लागत आती है. 500 रुपये की लागत से एक बार में 10, 15 या 20 हजार रुपए तक आमदनी हो जाती है.

धनिया के साथ मेथी भी
वे आगे कहते हैं कि किसान अगर दो से तीन बार फसल लेते हैं तो आमदनी और बढ़ जाती है. धनिया की खेती में एक कट्ठा में 1 किलो बीज की बुवाई की जाती है. धनिया के खेत में मेथी की खेती साथ में कर लेते हैं और एक साथ दो फसल की खेती से किसानों की आमदनी और अधिक हो जाती है. ठंड के मौसम में धनिया पत्ता के साथ-साथ मेथी साग की भी खूब डिमांड रहती है और बाजार में ₹40 से लेकर ₹60 किलो तक इसकी बिक्री हो जाती है.



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