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Jio IPO : जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ इसी महीने लॉन्च होगा. यह इश्यू भारत का सबसे बड़ा इश्यू हो सकता है. जियो इस आईपीओ के लिए 10.30 लाख करोड़ के वैल्यूएशन का टारगेट रख रही है. अगर जियो के शेयर इसी वैल्यूएशन पर लिस्ट होते हैं तो कंपनी भारत की चौथी ऐसी कंपनी बन जाएगी जिसका मार्केट कैप 10 लाख करोड़ से अधिक होगा. अभी इस क्लब में केवल तीन कंपनियां ही हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास वर्तमान में जियो प्लेटफॉर्म्स की करीब 66.4% हिस्सेदारी है.
नई दिल्ली. जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) भारतीय शेयर बाजार में एक नया इतिहास रचने की तैयारी में है. जियो आईपीओ (IPO) की लिस्टिंग के बाद उन चुनिंदा कंपनियों के क्लब में शामिल हो सकती है, जिनका मार्केट कैप 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ के लिए करीब 10.30 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन का टारगेट रख रही है. अभी 10 हजार करोड़ वैल्यूएशन वाले क्लब में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के जरिए करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटाने की की तैयारी में है. अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा. यह इश्यू साल 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ का रिकॉर्ड तोड़ देगा. जियो आईपीओ 21 अक्टूबर को खुल सकता है. हालांकि, अभी इसकी डेट का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.
रिलायंस की जियो में 66.4% हिस्सेदारी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास वर्तमान में जियो प्लेटफॉर्म्स की करीब 66.4% हिस्सेदारी है. अलग से लिस्टिंग होने से रिलायंस के कुल वैल्यूएशन में जियो के वास्तविक योगदान और वित्तीय प्रदर्शन को लेकर पारदर्शिता आएगी. साल 2016 में किफायती डेटा और कॉलिंग से टेलीकॉम क्रांति लाने वाली जियो अब केवल मोबाइल नेटवर्क तक सीमित नहीं है. फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, डिजिटल एंटरटेनमेंट, क्लाउड सर्विसेज, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक इसने पंख फैलाए हैं. मार्च 2026 तक कंपनी के पास करीब 52.44 करोड़ ग्राहक थे.
बैलेंस शीट हुई मजबूत, कर्ज का बोझ घटा
वित्त वर्ष 2024 (FY24) में कंपनी का नेट लेवरेज रेशियो 0.88 गुना और वित्त वर्ष 2025 (FY25) में 0.71 गुना था. वित्त वर्ष 2026 (FY26) में घटकर महज 0.36 गुना रह गया है. कर्ज में आई इस कमी से कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है. आने वाले समय में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, एंटरप्राइज डिजिटल सेवाओं और नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बढ़ती मांग से जियो को विकास के नए अवसर मिल सकते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर भी कंपनी के लिए अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकते हैं.
जियो का प्रस्तावित आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है. इससे घरेलू और वैश्विक निवेशकों को भारत के सबसे बड़े डिजिटल इकोसिस्टम में सीधे हिस्सेदारी का मौका मिलेगा. बाजार जानकारों के अनुसार, निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि इश्यू प्राइस कंपनी के कैश फ्लो और भविष्य की ग्रोथ के मुकाबले कितना संतुलित रखा जाता है.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)