मुजफ्फरपुर का अनोखा दुर्गा पूजा पंडाल! गुफा में दर्शन देंगी मां, मुकुट में लगेंगे 21 किलो ड्राई

मुजफ्फरपुर का अनोखा दुर्गा पूजा पंडाल! गुफा में दर्शन देंगी मां, मुकुट में लगेंगे 21 किलो ड्राई


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गुफा में विराजेंगी मां दुर्गा, 21kg ड्राई फ्रूट से बनेगा मां का मुकुट

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Muzaffarpur Durga Puja Pandal 2026: मुजफ्फरपुर के मोतीझील में महाराष्ट्र के केदारेश्वर गुफा मंदिर की थीम पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल बन रहा है. इसमें चार युगों की झलक और 21 किलो ड्राई फ्रूट से तैयार मां का विशेष मुकुट मुख्य आकर्षण होगा, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है.

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मुजफ्फरपुर: महाराष्ट्र के प्रसिद्ध केदारेश्वर गुफा मंदिर के दर्शन नहीं किए हैं, तो इस दुर्गा पूजा में मुजफ्फरपुर में ही आपको इसकी झलक देखने को मिलेगी. शहर के मोतीझील स्थित पांडे गली में मोतीझील दुर्गा पूजा समिति की ओर से केदारेश्वर गुफा मंदिर की थीम पर भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है. यहां चार युगों- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग को दर्शाने की तैयारी है. पंडाल में गुफा जैसा नजारा होगा, जहां भूत-प्रेत की आकृतियां श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगी. मां दुर्गा को भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध से अभिषेक करते हुए दिखाया जाएगा.

गुफा में दिखेगी चार युगों की कहानी
मोतीझील दुर्गा पूजा समिति के सदस्य आदित्य कुमार ने बताया कि समिति हर साल कुछ अलग करने का प्रयास करती है. पिछले वर्ष भी अनोखी थीम पर पंडाल बनाया गया था. इस बार महाराष्ट्र के प्रसिद्ध केदारेश्वर गुफा मंदिर की संरचना और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को पंडाल के माध्यम से दर्शाया जाएगा. मान्यता के अनुसार केदारेश्वर मंदिर के चार खंभों को चार युगों से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि तीन खंभे टूट चुके हैं. एक खंभे पर मंदिर टिका हुआ है. इसी अवधारणा को मुजफ्फरपुर के पंडाल में भी उतारने की कोशिश की जा रही है.  गुफा के अंदर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को अलग-अलग आकृतियां दिखाई देंगी. पूरा दृश्य साउंड के माध्यम से भी समझाया जाएगा. समिति के अनुसार आकृतियां स्थिर रहेंगी, लेकिन ध्वनि के जरिए धार्मिक कथा का चित्रण किया जाएगा.

21 किलो ड्राई फ्रूट से तैयार होगा मां का मुकुट
इस बार पंडाल का सबसे खास आकर्षण मां दुर्गा का मुकुट और सोलह शृंगार होगा. इसे तैयार करने में करीब 21 किलो ड्राई फ्रूट का इस्तेमाल किया जा रहा है. समिति के मुताबिक इस विशेष मुकुट और शृंगार को बनाने में लगभग 51 हजार रुपये खर्च होंगे. समिति का दावा है कि बिहार में इस तरह का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है.

स्थानीय कलाकार 25 दिनों से कर रहे मेहनत
पंडाल की सजावट मुजफ्फरपुर के स्थानीय कलाकार और समिति के सदस्य मिलकर कर रहे हैं. सोनेलाल जी के साथ गोलू कुमार, आकाश कुमार और अन्य सदस्य तैयारियों में जुटे हैं. समिति के अनुसार पिछले 25 दिनों से लगातार काम चल रहा है. मां के मुकुट को तैयार करने में कलाकार 12 दिनों से सुबह-शाम मेहनत कर रहे हैं. समिति के सदस्य आदित्य कुमार ने बताया कि इस बार पंडाल और पूजा की तैयारियों पर करीब 7 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे दुर्गा पूजा के दौरान मोतीझील की पांडे गली पहुंचकर इस अनोखी थीम और मां दुर्गा के दिव्य दर्शन का आनंद जरूर लें.



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