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लुधियाना में मतदाता सूची में भगत सिंह की फोटो छपने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. चुनाव आयोग ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि गलती पहले ही सुधार ली गई थी. हालांकि कांग्रेस ने ऐसे करीब 8 और मामलों को लेकर सवाल उठाए हैं.
मतदाता सूची में भगत सिंह की तस्वीर पर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, चुनाव आयोग ने दिया ये जवाब.
पंजाब के लुधियाना में एसआईआर में मतदाता सूची में भगत सिंह जैसी दिखने वाली तस्वीर लगने से बवाल हो गया. पूर्व विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में एक मतदाता के नाम के आगे स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह जैसी दिखने वाली तस्वीर छपी थी. जिसके बाद से राजनीतिक हलकों में इसे लेकर बहसबाजी शुरू हो गई. कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाते हुए मतदाता रिकॉर्ड की सटीकता पर ही सवाल उठा दिए.
कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाते हुए ट्वीट किया. लुधियाना पूर्व के पार्ट 38 में सीरियल नंबर 422 पर दर्ज मतदाता के सामने भगत सिंह जैसी फोटो दिखने पर उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “बस यही देखना बाकी रह गया था.” उन्होंने इस गड़बड़ी पर नाराजगी भी जताई.
एसआईआर में लगातार आ रही कमियों को लेकर कांग्रेस हमलावर है. इससे पहले लुधियाना अर्बन कांग्रेस अध्यक्ष संजय तलवार ने भी उसी बूथ पर आठ अन्य प्रविष्टियों में गलत तस्वीरें छपी होने का आरोप लगाया था. उन्होंने पूरे क्षेत्र के 235 मतदान बूथों की मतदाता सूची की जांच कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की थी. तलवार ने कहा कि सही मतदाता रिकॉर्ड योग्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है.
यह मुद्दा तब सामने आया है जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी हरियाणा में चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगा रहे हैं. ऐसे में लुधियाना की यह घटना जोरों से चर्चा में आ गई.
राहुल गांधी ने हाल ही में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर में गड़बड़ी और वोटरों के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से मुलाकात की अनुमति मांगी थी, हालांकि ज्ञानेश कुमार ने इनकार कर दिया.
बता दें कि भगत सिंह की फोटो वाले मामले पर जिला प्रशासन ने प्रतिक्रिया दी है और इस दावे को ‘भ्रामक’ बताया है. लुधियाना जिला चुनाव अधिकारी-सह-डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय के अनुसार, गलत तस्वीर पहले की मतदाता सूची में थी और 13 अगस्त 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में भी चली गई थी. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान सत्यापन में यह गलती पकड़ी गई और उसे ठीक कर दिया गया. सही तस्वीर वाली अंतिम मतदाता सूची 12 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली थी.
प्रशासन का कहना है कि गलती पहले ही सुधार ली गई थी, इसलिए भगत सिंह की फोटो वाले दावे को भ्रामक माना जा रहा है. फिर भी विपक्षी दल मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की गहन जांच की मांग कर रहे हैं. यह घटना चुनावी प्रक्रिया में छोटी-छोटी गलतियों के बड़े राजनीतिक असर को फिर से रेखांकित करती है.