Inspiring Story: न फीस, न इलाज का खर्च, जयपुर के शिव शंकर 25 साल से जरूरतमंदों की आंखों में भर रहे रोशनी

Inspiring Story: न फीस, न इलाज का खर्च, जयपुर के शिव शंकर 25 साल से जरूरतमंदों की आंखों में भर रहे रोशनी


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Shiv Shankar Prajapati Inspiring Story: किसी की आंखों की रोशनी लौटाना उसके जीवन को दोबारा खुशियों से भरने जैसा है. जयपुर के महादेवपुरा निवासी शिव शंकर प्रजापति पिछले 25 साल से इसी संकल्प के साथ समाजसेवा कर रहे हैं. वे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए नि:शुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित करवाते हैं, जिनके जरिए अब तक 1000 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन हो चुके हैं. ग्रामीण इलाकों में इलाज का खर्च, अस्पताल तक पहुंचने की परेशानी और तीमारदार की कमी कई लोगों को उपचार से दूर रखती है. शिव शंकर इन बाधाओं को दूर करने के लिए मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाने से लेकर ऑपरेशन, दवाइयों, चश्मे, भोजन और ठहरने तक की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध करवाते हैं. खास बात यह है कि वे मरीजों के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भी परिवार के सदस्य की तरह उनकी देखभाल करते हैं. उनका सेवा कार्य जरूरतमंदों को बेहतर जीवन देने के साथ समाज के लिए प्रेरणा बन रहा है.

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जयपुर. सेवा और समर्पण की मिसाल पेश कर रहे कोटखावदा तहसील क्षेत्र के महादेवपुरा निवासी शिव शंकर प्रजापति पिछले 25 वर्षों से जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने के प्रयास में जुटे हैं. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मोतियाबिंद के इलाज में परेशानी नहीं हो, इसके लिए वे लगातार निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित करवा रहे हैं. उनके प्रयासों से हजारों जरूरतमंदों को नेत्र उपचार का लाभ मिला है. अब तक करीब 1000 से अधिक लोगों के निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन करवाए जा चुके हैं. शिव शंकर प्रजापति की यह सेवा यात्रा वर्ष 2001 से 2010 तक पंचायती राज जन चेतना संस्थान के माध्यम से शुरू हुई.

इसके बाद वर्ष 2011 से वे कामधेनु गौशाला महादेवपुरा के बैनर तले प्रतिवर्ष औसतन चार निशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर आयोजित करवा रहे हैं. प्रजापति ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक तंगी और अस्पताल में मरीज के साथ रहने वाले परिजन की कमी इलाज में बड़ी बाधा बनती है. इसे देखते हुए केलगिरी नेत्र चिकित्सालय, जयपुर के सहयोग से शिविर में मरीजों को एंबुलेंस, आंखों की जांच, ऑपरेशन, लेंस प्रत्यारोपण, दवाइयां, चश्मा, भोजन, चाय-नाश्ता और अस्पताल में रहने की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है. मरीजों से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता.

अस्पताल में तीमारदार बनकर रहते हैं साथ

शिव शंकर प्रजापति केवल मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखते. वे मरीजों के भर्ती होने से लेकर उपचार के बाद करीब चार दिन में उन्हें वापस गौशाला लाने तक साथ रहते हैं. जरूरतमंद मरीजों की देखभाल वे अपने परिवार के सदस्य की तरह करते हैं. इसी भरोसे के कारण ग्रामीण परिवार अपने बुजुर्गों को इलाज के लिए उनके साथ भेजने में संकोच नहीं करते.

आंखों की रोशनी लौटी तो खुद करने लगे काम

शिविर से लाभान्वित एक बुजुर्ग ने बताया कि आंखों की रोशनी कम होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के काम करने में काफी परेशानी होती थी. एक बार तो उन्हें कुत्ते के साथ एक ही थाली में खाना खाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा. उपचार के बाद उनकी आंखों की रोशनी लौटी और अब वे अपने ज्यादातर काम खुद कर पा रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगे लेंस प्रत्यारोपण और अस्पताल आने-जाने के खर्च के कारण कई जरूरतमंद इलाज नहीं करवा पाते. ऐसे लोगों की परेशानी को समझते हुए शिव शंकर प्रजापति पिछले 25 वर्षों से सेवा कार्य में जुटे हैं. उनका यह प्रयास जरूरतमंदों के जीवन में नई रोशनी लाने के साथ समाजसेवा की प्रेरणा भी दे रहा है.



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