लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी कथित वोट चोरी को लेकर राजधानी दिल्ली में धरना प्रदर्शन करने में जुटे हैं. वह विपक्षी नेताओं की पुरानी परिपाटी को तोड़ते हुए दिल्ली पुलिस को चकमा देकर राजधानी में अलग-अलग जगहों पर गुरिल्ला स्टाइल में अपना विरोध जताने के लिए जुटते हुए देखे जा रहे हैं. उनके अब तक के प्रयास को देखकर तो शायद ही कोई कहे कि उन्हें देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अगले कुछ महीनों में होने वाले यूपी चुनाव की तनिक भी फिक्र है. उल्टा राहुल गांधी की कांग्रेस को यूपी चुनाव में जिस समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना है, उसी के खिलाफ हर रोज तीखी बयानबाजी की जा रही है. हद तो 11 अक्टूबर को लखनऊ कांग्रेस मुख्यालय में हो गई. कांग्रेसी आपस में ही एक दूसरे को गाली गलौज करते देखे गए. पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तो महिला नेता के लिए ‘दो कौड़ी की औरत’ जैसे शब्द प्रयोग करते दिखे.
कांग्रेस आलाकमान की इशारे पर सपा को सुनाई जा रही खरी-खोटी?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता पिछले ढाई तीन महीने से जिस तरह लगातार समाजवादी पार्टी को हर रोज खरी-खोटी सुना रहे हैं, उसको लेकर मन में दो ही सवाल आते हैं. एक तरफ राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनाव के समय से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ जुगलबंदी दर्शाने की कोशिश करते रहे हैं. मंच चाहे संसद भवन का हो, धरना प्रदर्शन या चुनावी रैली. हर मौके पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव कदमताल मिलाते देखे जाते हैं.
लेकिन जब इन दोनों को ईमानदारी से एक दूसरे से तालमेल बिठाने की नौबत आई तब कांग्रेस के सुर बदले हुए हैं. नये कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ढाई-तीन महीने से करीब-करीब हर रोज सम्मानजनक सीटों की डिमांग करते हैं और छूटते ही अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को अपने बयानों में औकात दिखाते हैं. इमरान मसूद सहारपुर से सांसद भी हैं. दिलचस्प बात यह है कि 2014 और 2019 में कांग्रेस के टिकट पर बुरी तरह हारने वाले इमरान मसूद पहली बार 2024 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन होने पर ही पहली बार सांसद बन पाए. अब संसद पहुंचने के बाद हर रोज रूटीन से समाजवादी पार्टी और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को जी भर के सुनाते हैं.
दूसरी तरफ हाल ही में आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आए राजेंद्र पाल गौतम ने जब से प्रदेश प्रभारी का पद संभाला है उसी रोज से समाजवादी पार्टी के सामने 403 में कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी ठोक रहे हैं. राजेंद्र पाल गौतम उत्तर प्रदेश में आकर बता रहे हैं कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उसकी हैसियत किसी भी क्षेत्रीय पार्टी से ज्यादा है. इससे पहले अजय राय जब तक प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहे तब तक वह भी समाजवादी पार्टी को हैसियत बताने का एक मौका नहीं चूकते दिखे. जबकि अजय राय वो नेता हैं जो 2014 से पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन अपनी जमानत तक नहीं बचा पा रहे थे. 2024 में सपा का सहयोग पाने के बाद कई राउंड की गिनती में पीएम मोदी से बढ़त बनाते दिखे. साथ ही अपनी जमानत भी बचा पाए.
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि राजेंद्र पाल गौतम, इमरान मसूद और अजय राय यूपी कांग्रेस के ऐसे चेहरे हैं जिनकी पहुंच पार्टी आलाकमान तक डायरेक्ट है. इसके बावजूद समाजवादी पार्टी की ओर से इनकी जुबान पर लगाम नहीं लगाई गई है. इससे उत्तर प्रदेश के वोटरों के बीच क्या मैसेज जा रहा होगा, य तो कोई भी समझ सकता है.
सपा लड़ते-लड़ते खुद में गाली-गलौज करने लगे कांग्रेसी
अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस ने बड़े ही दंभ के साथ आराधना को प्रदेश अध्यक्ष घोषित करते समय महिलाओं के सम्मान के प्रति पार्टी की सजगता दर्शाने की बात कही गई थी. लेकिन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पार्टी की महिला नेता के लिए ‘दो कौड़ी की औरत’ जैसे शब्द प्रयोग करते दिखे. कांग्रेस मुख्यालय में जो कुछ भी हुआ उसके तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं. इन्हें देखकर तो यही कहा जा सकता है कि राहुल गांधी की कांग्रेस में ना तो महिलाओं का उचित सम्मान है और ना ही पार्टी में कोई अनुशासन है. चुनावी रण में उतरने से पहले कांग्रेसी पहले सहयोगी सपा को भला बुरा कह रहे थे, अब आपस जूतम पैजार करते दिख रहे हैं.