नई दिल्ली. रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने आईपीओ (Jio IPO) से पहले अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत कर रही है. कंपनी की बैलेंस शीट में सबसे बड़ा बदलाव उसके फ्री कैश फ्लो में देखने को मिला है. पूंजीगत खर्च (Capex) पूरा करने के बाद कंपनी के पास वित्त वर्ष 2024 में जहां महज 1,449 करोड़ रुपये नकदी थी, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह उछलकर सीधे 42,071 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है. नकदी में आए इस भारी उछाल और कर्ज में आई तेज कमी ने IPO से ठीक पहले कंपनी की वित्तीय सेहत को पूरी तरह चमका दिया है.
कंपनी ने नए शेयर जारी करने से पहले अपनी बैलेंस शीट को कर्ज-मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट लीवरेज रेशियो वित्त वर्ष 2024 में 0.88 गुना था, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर केवल 0.36 गुना रह गया है. जियो IPO के तहत जुटाई जाने वाली पूंजी का इस्तेमाल रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) का कर्ज चुकाने और शेष राशि का यूज सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.
राजस्व ₹1.47 लाख करोड़ और मुनाफा ₹30,000 करोड़ के पार
कंपनी के राजस्व और शुद्ध लाभ में भी भारी इजाफा हुआ है. परिचालन से राजस्व वित्त वर्ष 2024 में 1.10 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया. शुद्ध मुनाफा (PAT) भी अवधि में 21,423 करोड़ रुपये से बढ़कर 30,049 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. अब कंपनी का मुख्य फोकस नेटवर्क विस्तार और ग्राहक जोड़ने के बजाय पिछले एक दशक में तैयार किए गए बुनियादी ढांचे से अधिकतम कमाई (Monetization) करने पर आ चुका है.
ARPU और डेटा खपत में भारी उछाल
ग्राहकों से होने वाली कमाई के मामले में भी जियो की स्थिति में बड़ा सुधार आया है. वित्त वर्ष 2024 में प्रति ग्राहकऔसत मासिक ARPU 181.7 रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 214 रुपये हो गया है. प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा खपत 28.7 GB से बढ़कर 42.3 GB के स्तर पर पहुंच गई है. एम्बिट कैपिटल रिसर्च के विश्लेषक विवेकानंद एस. के मुताबिक, जियो की पूंजी संरचना अब अधिक संतुलित है और कंपनी पूंजीगत खर्च में अनुशासन बरतते हुए अपने विशाल बुनियादी ढांचे से कमाई बढ़ाने के अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है.
5G तकनीक, पेटेंट और 6G की तैयारी
जियो ने मोबाइल कनेक्टिविटी से आगे बढ़ते हुए पूरी तरह स्वदेशी 5G कोर नेटवर्क तकनीक, रेडियो उपकरण और नेटवर्क सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं. मार्च 2026 तक कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों ने कुल 6,817 पेटेंट आवेदन दाखिल किए. इनमें से 1,009 पेटेंट को वैश्विक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है. कंपनी ने प्री-6G तकनीक और Giga MIMO Radio भी विकसित कर लिया है, जिसका प्रदर्शन हाल ही में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में किया गया था.
होम ब्रॉडबैंड में 42.6% हिस्सेदारी
जियो आईपीओ के ड्रॉफ्ट प्रोस्पेक्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के अंत तक जियो के पास 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक थे और इस क्षेत्र में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 42.6 फीसदी तक पहुंच चुकी है. कंपनी अपने फाइबर नेटवर्क और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) के जरिए उन क्षेत्रों में तेजी से पहुंच रही है जहां केबल बिछाना कठिन है. जियो अपनी इन-हाउस नेटवर्क तकनीक को पार्टनरशिप और मैनेज्ड सर्विस मॉडल के जरिए विदेशी टेलीकॉम कंपनियों को उपलब्ध कराने की योजना बना रही है.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)