Why Political Science is Called Science: राजनीति विज्ञान आर्ट्स का विषय है या साइंस का? समझिए इसका साइंटिफिक लॉजिक


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Why Political Science is Called Science: क्या राजनीति विज्ञान में कोई लैब या टेस्ट ट्यूब होती है? अगर नहीं तो इसे ‘विज्ञान’ क्यों कहा जाता है? राजनीति को सिर्फ आर्ट्स या इतिहास समझना आपकी भूल है. महान दार्शनिक अरस्तू इसे ‘मास्टर साइंस’ कहते थे. समझिए इसके पीछे के ऐसे ठोस कारण, जो इसे साइंटिफिक और एनालिटिकल विषय बनाते हैं.

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राजनीति विज्ञान आर्ट्स का विषय है या साइंस का? समझिए इसका साइंटिफिक लॉजिकZoom

Why Political Science is Called Science: राजनीति विज्ञान विषय को लेकर अक्सर लोग कंफ्यूज्ड रहते हैं

नई दिल्ली (Why Political Science is Called Science). विज्ञान शब्द सुनते ही दिमाग में लैब, टेस्ट ट्यूब, केमिकल्स और गणितीय फार्मूले घूमने लगते हैं. यही वजह है कि जब कोई ‘राजनीति विज्ञान’ को विज्ञान कहता है तो आम लोगों के मन में सबसे पहला सवाल आता है कि इसमें भला लैब या केमिकल का क्या काम? चुनाव, सरकार, कानून और नेताओं की बयानबाजी को विज्ञान की श्रेणी में क्यों रखा जाता है? राजनीति विज्ञान विषय के नाम पर अक्सर बहस छिड़ती है.

अक्सर स्टूडेंट्स और आम लोग राजनीति विज्ञान को केवल इतिहास, समाजशास्त्र या कला का हिस्सा मान लेते हैं. लेकिन असल में राजनीति विज्ञान केवल नेताओं की भाषणबाजी या चुनावी आंकड़ों का खेल नहीं है. इसके पीछे गहरी और व्यवस्थित स्टडी छिपी होती है. समझिए आखिर क्यों अरस्तू (Aristotle) जैसे महान विचारकों ने राजनीति को मास्टर साइंस कहा था और क्यों इसे विज्ञान माना जाता है. प्रतियोगी परीक्षाओं में भी यह सवाल अक्सर पूछा जाता है.

राजनीति विज्ञान को विज्ञान क्यों कहते हैं?

हाल ही में यूपीपीएससी पीसीएस इंटरव्यू हुए थे. इसमें शामिल हुए उम्मीदवारों ने बताया कि उनसे यह सवाल पूछा गया था. अगर आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं या जनरल नॉलेज के लिए जानना चाहते हैं कि राजनीति विज्ञान जैसे आर्ट्स वाले विषय में साइंस क्यों लगा है तो आज समझिए इसकी वजह.

1- सिस्टमैटिक और सीक्वेंशियल स्टडी

विज्ञान की सबसे पहली पहचान होती है कि उसमें किसी भी विषय का अध्ययन बहुत व्यवस्थित तरीके से किया जाता है. राजनीति विज्ञान भी बिल्कुल इसी थ्योरी पर काम करता है.

  • ऑब्जर्वेशन और फैक्ट्स: इसमें राज्य के जन्म, सरकार के स्ट्रक्चर, कानूनों के निर्माण और नागरिकों के अधिकारों का मनगढ़ंत अध्ययन नहीं होता. इसमें ऐतिहासिक तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है.
  • वैज्ञानिक चरण: किसी भी पॉलिटिकल सिस्टम का एनालिसिस करने के लिए पहले डेटा जुटाया जाता है, फिर उसका क्लासिफिकेशन होता है और आखिर में निष्कर्ष निकाले जाते हैं.

2- कारण और प्रभाव का संबंध

फिजिक्स की तरह पॉलिटिकल साइंस में भी ‘कारण और प्रभाव’ (Cause and Effect) का गहरा संबंध देखने को मिलता है. राजनीतिक घटना घटने के पीछे कोई न कोई ठोस कारण जरूर होता है.

  • उदाहरण से समझें: अगर किसी देश में बेरोजगारी और महंगाई तेजी से बढ़ती है (कारण) तो वहां की जनता सरकार के खिलाफ वोट करती है या क्रांति करती है (प्रभाव).
  • नियम और पैटर्न: राजनीति वैज्ञानिक इसी ‘कारण-प्रभाव’ का पैटर्न समझकर बताते हैं कि कौन सा कानून या नीति समाज पर कैसा असर डालेगी.

3. ऑब्जर्वेशन और एक्सपेरिमेंट

बहुत लोग सोचते हैं कि राजनीति विज्ञान में लैबोरेटरी या एक्सपेरिमेंट संभव नहीं हैं. लेकिन सच्चाई यही है कि पूरा समाज ही राजनीति विज्ञान की प्रयोगशाला है.

  • सोशल लैब: जब कोई देश अपनी शासन व्यवस्था बदलता है- जैसे राजतंत्र से लोकतंत्र अपनाना या नया संविधान लागू करना- तो वह एक तरह का राजनीतिक प्रयोग ही होता है.
  • पॉलिसी टेस्टिंग: सरकार जब भी कोई नई योजना या टैक्स सिस्टम लागू करती है तो उसके नतीजों को ऑब्जर्व और सुपरवाइज किया जाता है.

4. भविष्यवाणी की संभावना

राजनीति विज्ञान में रसायन विज्ञान (Chemistry) की तरह 100% सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है, क्योंकि इसका संबंध मानव स्वभाव से है. लेकिन इसके बावजूद सटीक रुझान और पूर्वानुमान लगाए जा सकते हैं.

  • इलेक्शन एनालिसिस: इलेक्शन के समय ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल डेटा के आधार पर पूर्वानुमान लगाते हैं कि किस पार्टी का पलड़ा भारी है.
  • भविष्य की नीतियां: राजनीतिक विचारक डेटा देखकर पहले ही बता सकते हैं कि किसी देश की विदेश नीति या आर्थिक नीति का आने वाले समय में क्या परिणाम होगा.

5. क्या यह Pure Science है?

यहां यह समझना बहुत जरूरी है कि राजनीति विज्ञान को ‘सामाजिक विज्ञान’ कहा जाता है, ‘प्राकृतिक विज्ञान’ (Natural Science) नहीं.

  • मानव स्वभाव की अनिश्चितता: इसमें पढ़ाई का विषय इंसान और समाज है, जो परिस्थिति और मूड के हिसाब से बदलते रहते हैं.
  • फ्लेक्सिबल नियम: ग्रैविटी का नियम पूरी दुनिया में समान रहता है. लेकिन राजनीति का नियम देशों और संस्कृतियों के हिसाब से बदल सकता है. इसीलिए यह इवॉल्विंग और डायनैमिक साइंस है.



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