सर्दी में मशरूम की खेती करने वाले जान लें ये बात, बाजार में दाम गिरने पर भी नहीं होगा नुकसान

सर्दी में मशरूम की खेती करने वाले जान लें ये बात, बाजार में दाम गिरने पर भी नहीं होगा नुकसान


देवघरः सर्दी का मौसम आने वाला है और इसके साथ ही गांव-गांव में मशरूम की खेती की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. देवघर समेत झारखंड के कई इलाकों में किसान ठंड के दिनों में ओयेस्टर और बटन मशरूम की खेती करते हैं. इस मौसम में मशरूम का उत्पादन अच्छा होता है, लेकिन किसानों के सामने एक बड़ी परेशानी भी खड़ी हो जाती है. जब एक साथ बड़ी मात्रा में मशरूम बाजार में पहुंचता है, तो कई बार इसकी कीमत गिर जाती है.ऐसे में किसान जिस फसल को उगाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, उसे कम दाम पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं. कुछ मशरूम समय पर नहीं बिक पाता और खराब होने से नुकसान भी उठाना पड़ता है. लेकिन अगर किसान खेती के साथ थोड़ी समझदारी दिखाएं, तो यही मशरूम उनकी कमाई बढ़ाने का जरिया बन सकता है.

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
दरअसल, मशरूम की खेती करने वाले किसानों को केवल ताजा मशरूम बेचने पर निर्भर रहने के बजाय उससे अलग-अलग खाद्य उत्पाद तैयार करने के बारे में भी सोचना चाहिए. देवघर कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थापित डॉ. विवेक कश्यप ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि किसानों को मशरूम की खेती शुरू करने से पहले ही अपनी बिक्री की योजना तैयार रखनी चाहिए. अगर बाजार में ताजा मशरूम की अच्छी कीमत मिल रही है, तो उसे सीधे बेच सकते हैं. लेकिन जब बाजार में कीमत कम हो जाए या मांग घटने लगे, तो मशरूम से दूसरे उत्पाद तैयार करके बिक्री की जा सकती है. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा और कम कीमत मिलने की स्थिति में नुकसान का दबाव भी कम हो सकता है.

मशरुम से तैयार करें खाद्य सामग्री 
मशरूम से कई तरह के खाद्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं. किसान मशरूम की भुजिया, बिस्कुट, बड़ी, अचार, पापड़ और मशरूम पाउडर जैसे उत्पाद बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं. इसके अलावा स्थानीय पसंद और बाजार की मांग के हिसाब से दूसरे उत्पाद भी तैयार किए जा सकते हैं. उदाहरण के लिए, मशरूम पाउडर का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में किया जा सकता है, जबकि अचार और पापड़ जैसे उत्पादों को पैक करके कुछ समय तक बिक्री के लिए रखा जा सकता है. इस तरह किसान सिर्फ कच्चा मशरूम बेचने वाले नहीं रहेंगे, बल्कि अपने उत्पाद की पहचान बनाकर ग्राहकों तक सीधे पहुंचने की कोशिश भी कर सकेंगे.

मशरुम कम होंगे बर्बाद, बढ़ेगा फायदा 
इस तरीके का सबसे बड़ा फायदा मशरूम की बर्बादी को कम करने में मिल सकता है. ताजा मशरूम ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रहता, इसलिए इसकी तुड़ाई के बाद जल्दी बिक्री करना जरूरी होता है. अगर किसान के पास बिक्री की उचित व्यवस्था नहीं है, तो कम कीमत मिलने पर भी उसे मशरूम बेचना पड़ सकता है. वहीं, मशरूम को सुखाकर पाउडर बनाने या दूसरे उत्पादों में बदलने से उसे संभालकर रखने की अवधि बढ़ाई जा सकती है. हालांकि, उत्पाद कितने समय तक सुरक्षित रहेगा. यह उसकी तैयारी, नमी, पैकेजिंग और भंडारण के तरीके पर निर्भर करता है.

साफ-सफाई, सही पैकेजिंग और गुणवत्ता पर दें ध्यान 
कमाई बढ़ाने के लिए किसानों को एक बात और ध्यान रखनी होगी.मशरूम से बने उत्पादों की बिक्री में केवल उत्पादन करना ही काफी नहीं है, बल्कि साफ-सफाई, सही पैकेजिंग, गुणवत्ता और ग्राहकों की पसंद भी जरूरी है. शुरुआत में किसान कम मात्रा में उत्पाद बनाकर स्थानीय बाजार, किराना दुकानों, स्वयं सहायता समूहों और सीधे ग्राहकों के बीच उनकी मांग समझ सकते हैं. साथ ही उत्पाद तैयार करने से पहले कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह लेना भी फायदेमंद रहेगा.



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