JPNIC पर सियासी घमासान, क्या है 865 करोड़ का विवाद? सत्ता से लेकर विपक्ष तक एक-दूसरे को घेर रहे

JPNIC पर सियासी घमासान, क्या है 865 करोड़ का विवाद? सत्ता से लेकर विपक्ष तक एक-दूसरे को घेर रहे


लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ में बनी एक बड़ी परियोजना JPNIC को लेकर उत्तर प्रदेश में फिर सियासत तेज हो गई है. जयप्रकाश नारायण के नाम पर बने इस सेंटर को लेकर बीजेपी के नेता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से सवाल पूछ रहे हैं. मुद्दा सिर्फ इसके निर्माण पर खर्च हुए करोड़ों रुपये का नहीं है, बल्कि यह भी है कि इतने पैसे खर्च होने के बाद भी यह परियोजना पूरी तरह शुरू क्यों नहीं हो सकी. अब योगी सरकार के इसे लीज पर देने के फैसले पर भी चर्चा हो रही है. आइए, समझते हैं कि JPNIC क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों हो रहा है.

क्या है JPNIC और इसे क्यों बनाया गया?
JPNIC का पूरा नाम जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर है. यह लखनऊ के गोमती नगर में बना है. इसे अखिलेश यादव की सरकार के दौरान शुरू किया गया था. इसका मकसद एक ऐसा सेंटर बनाना था, जहां खेल, संस्कृति, बैठकों और दूसरे बड़े कार्यक्रमों के लिए सुविधाएं मिल सकें.

इस परियोजना में म्यूजियम, कार्यक्रमों के लिए बड़े हॉल, होटल, जिम, स्विमिंग पूल और पार्किंग जैसी सुविधाएं रखने की योजना थी. यानी यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि कई तरह की सुविधाओं वाला बड़ा सेंटर था. हालांकि, 2017 में उत्तर प्रदेश में सरकार बदलने के बाद इसका काम आगे नहीं बढ़ सका और यह पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया.

865 करोड़ रुपये का खर्च, फिर भी अधूरा क्यों रहा सेंटर?
JPNIC को लेकर सबसे ज्यादा सवाल इसके निर्माण पर खर्च हुई रकम को लेकर उठ रहे हैं. परियोजना की शुरुआती स्वीकृत लागत करीब 265.59 करोड़ रुपये थी. बाद में इसकी लागत बढ़ती गई. नवंबर 2016 में इसकी संशोधित लागत करीब 864.99 करोड़ रुपये तय की गई थी. लखनऊ विकास प्राधिकरण के दस्तावेजों में इस पर करीब 813.13 करोड़ रुपये खर्च होने का भी जिक्र है.

क्या बोले मंत्री ओपी राजभर?
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि जब इस परियोजना पर करीब 865 करोड़ रुपये खर्च करने की बात सामने आई, तो यह अधूरी क्यों रह गई? उन्होंने सेंटर की संचालन समिति में अखिलेश यादव के परिवार के सदस्यों को शामिल करने और होटल, क्लब व जिम से होने वाली कमाई को लेकर भी सवाल उठाए.

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मांगा जवाब
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी परियोजना की लागत बढ़ने पर अखिलेश यादव से जवाब मांगा. उन्होंने सवाल किया कि जिस परियोजना की शुरुआत कम बजट से हुई थी, उसकी लागत इतनी ज्यादा कैसे हो गई? उन्होंने सेंटर में होटल और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं पर खर्च को लेकर भी सवाल उठाए.

योगी सरकार ने JPNIC को लीज पर क्यों दिया?
JPNIC को लेकर दूसरा बड़ा सवाल इसके भविष्य का है. सालों से अधूरे पड़े इस सेंटर को चालू करने के लिए योगी सरकार ने इसे लीज पर देने का फैसला किया है. अगस्त 2026 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. सामने आई जानकारी के मुताबिक, सेंटर को 30 साल की लीज पर देने की व्यवस्था की गई है.

सरकार का कहना है कि इस फैसले से सेंटर का बचा हुआ काम पूरा करने और इसे चलाने में मदद मिलेगी. यानी सरकार चाहती है कि लंबे समय से अधूरी पड़ी इस परियोजना का इस्तेमाल शुरू हो सके. दूसरी तरफ, इस फैसले को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि सेंटर को किस तरह चलाया जाएगा और इससे होने वाली कमाई का हिसाब कैसे रखा जाएगा.

JPNIC पर अखिलेश को क्यों घेर रही बीजेपी?
जयप्रकाश नारायण की जयंती के मौके पर JPNIC का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में आ गया. ओमप्रकाश राजभर ने परियोजना पर हुए खर्च और इसके संचालन को लेकर अखिलेश यादव पर सवाल उठाए. उन्होंने अखिलेश को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देने वाला बयान भी दिया.

क्या बोले ब्रजेश पाठक
वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के प्रदर्शन को नाटक बताया और कहा कि जयप्रकाश नारायण के विचारों का सम्मान उनके बताए रास्ते पर चलकर किया जाना चाहिए. उन्होंने भ्रष्टाचार और परिवारवाद के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी को घेरा.

JPNIC को लेकर अखिलेश यादव का आया बयान
JPNIC को लेकर जारी सियासत के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा. लखनऊ में जेपी सेंटर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आरोप लगाया कि पैसों के दबाव में इस सेंटर को बेच दिया गया. अखिलेश ने कहा कि सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान नहीं करती और सरकारी संपत्तियों को बेचने में जुटी है. उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के नारे का जिक्र करते हुए कहा कि जेपी के एक आह्वान से देश में बदलाव आया था. अब उनके दिखाए रास्ते पर चलकर फिर परिवर्तन लाया जाएगा. अखिलेश ने कार्यक्रम में कहा कि यहां आने की अनुमति मिलना भी बदलाव की शुरुआत का संकेत है.



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