एक डिग्री के दो दावेदार, न सिर्फ सिस्टम में एंट्री.. बल्कि प्रमोशन भी, फर्जी डॉक्टर बनकर 17 साल तक की नौकरी

एक डिग्री के दो दावेदार, न सिर्फ सिस्टम में एंट्री.. बल्कि प्रमोशन भी, फर्जी डॉक्टर बनकर 17 साल तक की नौकरी


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मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक शख्स ने डॉक्टर की फर्जी डिग्री के आधार पर न सिर्फ सिस्टम में एंट्री ले ली बल्कि प्रमोशन भी पा लिया. सालों से ही स्वास्थ्य विभाग में डिग्री की जांच का मामला चल रहा था. इसमें एक डिग्री असली और दूसरे की डिग्री नकली थी. यानी की एक डिग्री के दो दावेदार थे. अब दूध का दूध और पानी का पानी भी हो गया.

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मध्य प्रदेश अजब है सबसे गजब है. देश में वोट चोरी का मुद्दा चल रहा होगा. जहां पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है. लेकिन एमपी में तो डिग्री चोरी का मामला चल रहा है, जहां पर एक डॉक्टर फर्जी डिग्री के आधार पर न सिर्फ सिस्टम में एंट्री ले ली बल्कि प्रमोशन भी पा लिया. सालों से जांच भी होती रही लेकिन अब तक सख्त एक्शन तक नहीं हो सका. लेकिन बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाती आखिर कुर्बानी वाला दिन आ ही गया और फर्जी डिग्री पर नौकरी ही प्रमोशन हासिल करने वाले मुन्ना भाई एमबीबीएस पर अब प्रशासन ने ही एफआईआर दर्ज करवाई है.

सुनील कुमार नाम के दो शख्स काम कर रहे थे. दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग जगह लेकिन नाम ही नहीं बल्कि सारी जानकारी एक समान है. एक सुनील कुमार सिंह बालाघाट के बिरसा में बीएमओ रहे. वहीं, दूसरे सुनील कुमार देवास में पदस्थ है. इसमें चौकानें वाली बात ये थी कि दोनों की डिग्री में नाम सुनील सिंह और पिता का नाम मोहन सिंह और तो और डेथ बर्थ एक फरवरी 1978 है. वहीं, डिग्री भी एक कॉलेज एपीएसयू रीवा और कोर्स एमबीबीएस है. लेकिन दोनों एक दूसरे को जानते तक नहीं है.

2009 से सिस्टम में सेंध के साथ शुरू हुई नौकरी
फर्जी डिग्री के आरोप वाले सुनील सिंह साल 2009 से पीएचसी दमोह (बालाघाट के बिरसा ब्लॉक) में नौकरी कर रहे है. इसके बाद साल 2012 में बिरसा से संविदा डॉक्टर के तौर पर सेवाएं दे रहे थे. लेकिन साल आया 2023 का जब वह फर्जी डिग्री के साथ ही प्रमोट होकर बीएमओ यानी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर बने. इसके साथ उनकी डिग्री पर सवाल खड़े होना शुरू हो गए. लेकिन तत्कालीन सीएचएमओ ने उन्हें उस समय हुई जांच में क्लीन चिट दे दी. वहीं, दूसरी तरफ देवास में पदस्थ डॉक्टर सुनील कुमार तीन बार पेश होकर अपनी असली डिग्री साबित कर चुके हैं.

जांच में अफसरों के भी उड़े होश
आपको बता दे कि फर्जी डॉक्टर के दस्तावेजों में गृह जिला कभी मुरैना, कभी रीवा तो कभी बालाघाट दर्ज था. इसके अलावा उसके पास परमानेंट रजिस्ट्रेशन का कोई रिकॉर्ड नहीं था, सिर्फ प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के कागज जमा थे. मेडिकल काउंसिल की जांच में जब सच सामने आया, तो अफसरों के भी होश उड़ गए.

लंबी जांच के बाद एफआईआर
सीएचएमओ डॉक्टर शत्रुघन दहिया ने बताया कि जांच समिति के प्रतिवेदन और पेश किए गए अभिलेखों के परीक्षण के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है. जांच में पाया गया कि देवास में पदस्थ डॉक्टर के असली कागजात की नकल और फर्जी दस्तावेज तैयार कर आरोपी ने सरकारी नौकरी हासिल की थी.

राज्य स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिरसा पुलिस ने आरोपी सुनील सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 340(2) और 336(3) के तहत केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने मामला कायम कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.



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