उज्जैन में रावण दहन पर बढ़ा विवाद, ब्राह्मण समाज ने 4 आयोजकों को भेजा नोटिस

उज्जैन में रावण दहन पर बढ़ा विवाद, ब्राह्मण समाज ने 4 आयोजकों को भेजा नोटिस


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Ujjain Ravan Dahan Issue: संगठन के संरक्षक महेश पुजारी ने लोकल 18 से कहा कि रावण दहन का विरोध धार्मिक और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर किया जा रहा है. समय के साथ यह आयोजन धार्मिक परंपरा से आगे बढ़कर मनोरंजन का स्वरूप ले चुका है. रावण के चरित्र और उससे जुड़ी मान्यताओं को सिर्फ पुतला जलाने तक सीमित कर नहीं देखना चाहिए.

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उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरा पर्व से पहले रावण दहन की परंपरा को लेकर विरोध तेज हो गया है. अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस बार विरोध को औपचारिक कानूनी कार्रवाई तक पहुंचा दिया है. संगठन ने 20 अक्टूबर को विभिन्न स्थानों पर प्रस्तावित रावण दहन कार्यक्रमों के आयोजकों को अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. समाज ने आयोजकों से इस परंपरा को बंद करने की मांग की है. मांग पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में न्यायालय जाने की चेतावनी भी दी गई है. संगठन के संरक्षक महेश पुजारी के अनुसार, रावण दहन का विरोध धार्मिक और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर किया जा रहा है. उनका कहना है कि समय के साथ यह आयोजन धार्मिक परंपरा से आगे बढ़कर मनोरंजन का स्वरूप ले चुका है. समाज का मानना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी मान्यताओं को केवल पुतला जलाने तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. इसी आधार पर आयोजक संस्थाओं से रावण दहन बंद करने की अपील की गई है.

महेश शर्मा ने भी इस परंपरा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रावण के पुतले को मनोरंजन के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है. संगठन का कहना है कि उसकी मांग केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि इस परंपरा को लेकर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए. यदि आयोजक उनकी मांग को स्वीकार नहीं करते हैं, तो विरोध को आगे बढ़ाया जाएगा.

शहर के चार प्रमुख आयोजनों पर नजर
संगठन की ओर से दशहरा मैदान, शास्त्री नगर, कार्तिक मेला ग्राउंड और नानाखेड़ा क्षेत्र में रावण दहन कराने वाले आयोजकों को नोटिस भेजे गए हैं. दशहरा नजदीक आने के साथ ही इस मामले में आयोजकों की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर होने वाले घटनाक्रम पर नजर रहेगी. फिलहाल संगठन ने अपनी आपत्ति स्पष्ट करते हुए कानूनी विकल्प खुला रखा है.

पिछले साल भी सड़कों पर उतरा था समाज
गौरतलब है कि रावण दहन के विरोध का यह मामला नया नहीं है. पिछले वर्ष भी संगठन के कार्यकर्ताओं ने दशहरा आयोजन से पहले रावण के पुतले के सामने नारेबाजी की थी और काली मटकियां फोड़कर विरोध दर्ज कराया था. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र भेजकर रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की गई थी. शहर के कुछ स्थानों पर रावण के गुणों का उल्लेख करने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे. इस बार कानूनी नोटिस जारी होने से दशहरे से पहले यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है.



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