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Jalore Siblings Inspiring Story: दिल्ली में CJP और Gen-Z के प्रदर्शनों के बीच राजस्थान के जालोर से आई दो किशोर विद्यार्थियों की कहानी मेहनत, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव की मिसाल है. माधव जोशी और उनकी छोटी बहन अर्चना जोशी ने करीब 100 दिनों में 100 उपनिषदों का हस्तलेखन पूरा किया. माधव ने 65 और अर्चना ने 35 उपनिषद लिखे. दोनों पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन के साथ साहित्यिक और रचनात्मक गतिविधियों में भी सक्रिय हैं. अर्चना का चयन राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के पद्माक्षी पुरस्कार के लिए भी हो चुका है. इससे पहले दोनों ने कोरोना काल में 2,100 पृष्ठों में रामचरितमानस लिखी थी. भाई-बहन की यह पहल बताती है कि कम उम्र में भी संकल्प और निरंतर प्रयास से भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और सहेजने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया जा सकता है.
जालोर के माधव जोशी और उनकी छोटी बहन अर्चना जोशी ने करीब 100 दिनों में 100 उपनिषदों का हस्तलेखन पूरा किया
जालोर. आज के दौर में युवा पीढ़ी को लेकर अक्सर अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती हैं. दिल्ली में CJP और Gen-Z के प्रदर्शन के बीच राजस्थान के जालोर से दो स्कूली विद्यार्थियों की ऐसी कहानी सामने आई है, जो युवाओं की मेहनत, लगन और कुछ नया करने के जज्बे को दिखाती है. जालोर के माधव जोशी और उनकी छोटी बहन अर्चना जोशी ने करीब 100 दिन में 100 उपनिषदों को हाथों से लिखकर सबका ध्यान खींचा है. खास बात यह है कि माधव कक्षा दसवीं में पढ़ते हैं जो महज 15 वर्ष के हैं. वही छोटी बहन 14 वर्षीय अर्चना कक्षा 9 की छात्रा हैं. दोनों ने छुट्टियों के समय को यूं ही बिताने के बजाय भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने और उसे अपनी नोटबुक में संकलित करने में लगाया.
2,100 पन्नों में लिख चुके हैं संपूर्ण रामचरितमानस
दोनों भाई बहन इसके अलावा कविता लेखन, काव्य पाठ सहित रचनात्मक एवं तकनीकी कार्यों मे रूचि लेते हैं. माधव एवं अर्चना के पिता संदीप जोशी शिक्षक है, जिनसे उन्हें निरंतर प्रेरणा भी मिलती रहती है. यह इन बच्चों की पहली साधना नहीं है, इससे पूर्व 2020 में कोरोना काल के दौरान भी दोनों ने 2,100 पन्नों में संपूर्ण रामचरितमानस का हस्तलेखन किया था, जब इनकी यह यात्रा शुरू हुई थी तो दोनों तीसरी और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे. यह पहल केवल लिखने तक सीमित नहीं रही. उपनिषदों को लिखते हुए उन्हें भारतीय दर्शन, आध्यात्मिक विचारों और प्राचीन ज्ञान परंपरा को करीब से जानने का अवसर भी मिला.
दोनों भाई-बहनों ने युवा शक्ति की एक अलग तस्वीर पेश की