सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में माता सिंहासिनी के रूप में विराजमान हैं, रहषु भगत और मां सिंहासिनी की कथा जानिए


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देशभर में आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो गई है. कलश स्थापना के साथ देवी मंदिरों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जा रही है. बिहार के प्रमुख सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में भी मां सिंहासिनी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. मंगला आरती के बाद माता का पट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया है. क्या है इस मंदिर को लेकर मान्यता और क्या है महत्व, आइए जानते हैं.

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थावे दुर्गा मंदिर में माता सिंहासिनी के रूप में विराजमान हैं, जानिए मान्यताएंZoom

बिहार के सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में नवरात्रि की धूम

गोपालगंज. बिहार के गोपालगंज स्थित प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां सिंहासिनी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. मंगला आरती के बाद माता का पट भक्तों के लिए खोल दिया गया. वहीं, नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है. भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए स्टील पाइप से बैरिकेडिंग की गई है. श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है, ताकि दर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके. मान्यता है कि मां थावेवाली अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

थावे मंदिर में नवरात्रि पर उमड़ी भीड़

बता दें कि रविवार (11 अक्टूबर) से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हुई है. पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जा रही है. गोपालगंज के थावे स्थित दुर्गा मंदिर में सुबह से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी है. श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं.

सुरक्षा के लिए प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम

नवरात्रि में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में स्टील पाइप से बैरिकेडिंग की गई है. भक्तों को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है. सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है. डीएम समीर सौरभ और एसपी विनय तिवारी व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं.

क्या है सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर की मान्यता?

गोपालगंज जिले में स्थित थावे दुर्गा मंदिर बिहार के प्रमुख शक्तिस्थलों में गिना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, यहां मां दुर्गा सिंहासिनी के रूप में विराजमान हैं. भक्तों के बीच माता को थावे वाली मां के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी आस्था के कारण साल भर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है.

मां सिंहासिनी से जुड़ी है रहस्यमयी लोककथा

थावे दुर्गा मंदिर की प्रसिद्धि के पीछे एक प्रचलित लोककथा भी है. मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में हथुआ के राजा के शासनकाल में रहषु भगत नाम के एक भक्त मां दुर्गा की आराधना करते थे. कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उन्हें दर्शन दिए थे. इस कथा में मां के कामरूप से थावे आने का भी उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि इसी घटना से इस स्थान की धार्मिक महत्ता जुड़ी हुई है.

बिहार ही नहीं, दूसरे राज्यों और नेपाल से भी आते हैं श्रद्धालु

थावे दुर्गा मंदिर में नवरात्रि के दौरान बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं. नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर में पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहता है. श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच प्रशासन की प्राथमिकता दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है, ताकि भक्त शांतिपूर्ण तरीके से मां सिंहासिनी के दर्शन कर सकें.



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