हार्दिक पांड्या के 33वें जन्मदिन पर गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा ने शेयर किया दिल छू लेने वाला नोट, संघर्ष से सफलता तक के सफर को किया बयां


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हार्दिक के 33वें जन्मदिन पर महिका शर्मा ने शेयर किया दिल छू लेने वाला नोट

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Happy Birthday Hardik Pandya: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या आज 33 साल के हो गए हैं. हार्दिक के 33वें जन्मदिन के मौके पर उनकी गर्लफ्रेंड महिका शर्मा ने एक दिल छू लेने वाला नोट शेयर किया. इस लंबे-चौड़े नोट में महिका ने हार्दिक के बचपन से लेकर उनके संघर्ष और सफलता की कहानी को बयां किया है.

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हार्दिक पांड्या और महिका शर्मा

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के धाकड़ ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या का आज 33वां जन्मदिन है. 11 अक्टूबर 1993 को गुजरात के चोर्यासी में एक साधारण से परिवार में जन्मे हार्दिक आज क्रिकेट जगत के सुपरस्टार हैं. लग्जरी गाड़ियां, करोड़ों की घड़ी और लैविश लाइफस्टाइल के साथ हार्दिक आज फैंस के लिए आइकन बन चुके हैं. हालांकि, पिछले कुछ महीनों से हार्दिक चोटिल होने के कारण क्रिकेट से दूर हैं.

ऐसे में उनकी गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा ने उनके 33वें जन्मदिन पर हार्दिक के लिए एक दिल छू लेने वाला नोट शेयर किया है. माहिका ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर हार्दिक के लिए लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर कर उनके बचपन से लेकर अब तक के संघर्षों के बारे में बताया. माहिका ने इस पोस्ट में बताया कि कैसे हार्दिक पांड्या ने गेंदबाजी की शुरुआत की थी और कैसे उनके साथ भेदभाव हुआ था.

हार्दिक पांड्या के लिए महिका का मैसेज

महिका ने हार्दिक पांड्या के लिए लिखा, “19 साल की उम्र तक, हार्दिक बड़ौदा में विशुद्ध रूप से चौथे नंबर के बल्लेबाज थे. नटखट और चुलबुले छोटे भाई के रूप में मैदान पर उनकी मौजूदगी बस एक इत्तेफाक जैसी थी. बेहद चंचल और फुर्तीले होने के कारण, क्रिकेट उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने का जरिया बन गया. नाममात्र की पढ़ाई के चलते, यही मैदान उनके खुद को जाहिर करने का मंच भी बना.”

हार्दिक के लिए महिका का पोस्ट

उन्होंने आगे लिखा, “सालों तक एक बल्लेबाज के रूप में उम्दा प्रदर्शन करने के बाद भी टीम में उनकी जगह पक्की नहीं हो पा रही थी. राजनीति और सामाजिक मेलजोल के दिखावटी तौर-तरीकों में खुद को न ढाल पाने की मजबूरी ने उन्हें उनके हक के चयन से दूर रखा. तेज दौड़ने के शौकीन होने के नाते जो कि आमतौर पर बल्लेबाजों में कम ही दिखता है, उनमें घोड़ों की तरह जी-तोड़ मेहनत करने का हुनर था. खुद उन्हें भी खबर नहीं थी कि यही उनका सबसे बड़ा ‘चीट कोड’ साबित होने वाला था.”



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