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Chapra Women Success Story: छपरा के ग्रामीण क्षेत्रों में जीविका से जुड़कर महिलाएं सिक्की घास से हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर रही हैं. मेलों और ऑनलाइन माध्यमों से इनकी अच्छी बिक्री हो रही है, जिससे बेरोजगार महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिल रही है.
छपरा: छपरा के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं के हुनर को पहचान कर अब जीविका के द्वारा रोजगार देने का काम किया जा रहा है. उस हुनर को बाजार भी मिल रहा है और महिला अपना कसीदा दिखाकर अच्छा कमाई कर रही है. जिससे सीधा घर में बैठी बेरोजगार महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है. सारण में हजारों महिला ऐसी है जो अपने हाथ के कला कसीदा हुनर को लेकर जानी जाती है. उस कलाकारी से अब जीविका के माध्यम से कमाई भी कर रही है.
छपरा में महिला कसीदा और हुनर से करती तगड़ी कमाई
मांझी प्रखंड के बरेजा गांव के दो दर्शन से अधिक महिला अपने हाथ के कसीदा को एक ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए जी-जान लग रही है. एक से बढ़कर एक चीज सिक्की घास से तैयार कर बड़े-बड़े शहरों में स्टॉल लगाकर बेचने काम कर रहीं है. ऐसी महिलाओं को जीविका के माध्यम से जोड़ा जा रहा है और रोजगार देने का काम किया जा रहा है. पटना सरस मेला, सोनपुर मेला सहित कई बड़े-बड़े मेला और बाजार में सरकार के द्वारा ऐसी महिलाओं के कसीदा और हुनर को दिखाने के लिए मौका मिलता है. जहां स्टॉल लगाकर महिला अपने हाथ से बने हुए सामान को अच्छे कीमत पर बेचकर तगड़ा कमाई कर रही है.
पहले बेरोजगार थे, अब ऑनलाइन और ऑफलाइन ऑडर्र
लोकल 18 से पुष्पा देवी ने बताया कि मैं बरेजा पंचायत के एस जे वाई का सदस्य हूं. पहले हम लोग बेरोजगार थे. कुछ भी काम नहीं कर रहे थे. लेकिन अब सिक्की पीजी के काम से जुड़ गए हैं. प्रोडक्ट तैयार करने से पहले सिक्की घास जंगल से काट कर लाते हैं. उसके बाद सुखाया जाता है. सूख जाने के बाद कलर उसमें चढ़ाया जाता है. जिससे कई प्रोडक्ट हम लोग तैयार करके मार्केट में बेचते हैं.
सिक्की घास से कान के बाली, चूड़ी, दौड़ी, हेयर बैंड, फूल डालिया बहुत सामान बनाते हैं. यह सभी प्रोडक्ट अपने हाथ से हम लोग तैयार करते हैं. यह सभी प्रोडक्ट को बिक्री करने के लिए गांधी मैदान, सरस मेला,सोनपुर मेला सहित बड़े-बड़े कार्यक्रम में बेचने के लिए स्टॉल उपलब्ध कराया जाता है. जहां अच्छा बिक्री होता है. ऑनलाइन भी बहुत ज्यादा ऑर्डर आता है. ऑनलाइन के माध्यम से भी बिक्री हम लोग करते हैं.
अब हो रही है इतनी कमाई
पहले हम लोग घर में रहते थे. कोई काम नहीं कर रहे थे. पहले यह सभी प्रोडक्ट हम लोग बनाते थे. लेकिन इससे पैसा कैसे कमाना है जानकारी नहीं था. अपने हाथ से बनाया हुआ प्रोडक्ट को अपने ही घर के काम में प्रयोग करते थे. अब इस प्रोडक्ट को बड़े-बड़े बाजार मेला में बेचकर हम लोग आगे बढ़ गए हैं. सरकार भी जीविका से जोड़कर हम लोगों को रोजगार देने के काम कर रही है. इस काम को करने के लिए लोन भी जीविका दीदी को दिया गया है. इस बार के सर्च मेला में 45 हजार की बिक्री हुई है. अब इसको बेचकर हम लोग अपने घर को अच्छे से चला लेते हैं. जीविका मेरे जैसे बेरोजगार महिलाओं को रोजगार देने का काम कर रहा है. सरकार की योजना हम सभी महिलाओं के लिए काफी बेहतर है.