Parenting Tips: मोबाइल- इंटरनेट के दौर में बच्चों की परवरिश कैसे करें? श्री श्री रविशंकर की सलाह पैरेंट्स इन 9 बातों का रखें ध्यान

Parenting Tips: मोबाइल- इंटरनेट के दौर में बच्चों की परवरिश कैसे करें? श्री श्री रविशंकर की सलाह पैरेंट्स इन 9 बातों का रखें ध्यान


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Parenting Tips For Digital Age: आज के समय में बच्चों की जिंदगी मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल गेम्स के इर्द-गिर्द घूमने लगी है. तकनीक से जहां नई चीजें सीखने, पढ़ाई में मदद मिलती है. वहीं, जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने से नींद, शारीरिक गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. ऐसे में श्री श्री रविशंकर सलाह देते हैं कि माता-पिता बच्चों को सही तरह से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिखाएं.

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आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और धर्म गुरु श्री श्री रविशंकर ने अपने एक प्रवचन के दौरान डिजिटल युग में बच्चों की परवरिश के लिए जरूरी पैरेंटिंग टिप्स शेयर किया है. उन्होंने बताया कि अच्छी परवरिश का मतलब सिर्फ बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना नहीं, बल्कि उन्हें भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना भी है. इसलिए बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए इन 8 बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.

स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें- बच्चों के मोबाइल और टीवी देखने का समय तय करें. पढ़ाई और मनोरंजन के बीच संतुलन रखें. बच्चों को बाहर खेलने और परिवार के साथ समय बिताने के लिए भी प्रेरित करें. यदि आप शुरू से बच्चे को साफ करते हैं कि उसे मोबाइल एक निश्चित समय के लिए मिलेगा तो वो कभी ज्यादा मोबाइल देखने के लिए जिद्द नहीं करेगा.

नींद और सेहत का रखें ध्यान- ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों की नींद और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं. सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करवाएं और रोजाना खेलने की आदत डालें. खेलने से थकावट होगी और रोज बच्चा समय पर और अच्छी नींद लेगा जो कि उसकी ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है.

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ऑनलाइन सुरक्षा समझाएं- बच्चों को अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करने, निजी जानकारी साझा करने और साइबर बुलिंग के बारे में बताएं. उन्हें भरोसा दें कि किसी परेशानी में वे आपसे खुलकर बात कर सकते हैं.

हर परेशानी का हल खुद न निकालें- बच्चों को छोटी-मोटी मुश्किलों का सामना खुद करने दें. इससे वे समस्याओं को समझना, फैसले लेना और असफलताओं से सीखना सीखते हैं.

योग और ध्यान की आदत डालें- बच्चों को उम्र के अनुसार योग, गहरी सांस लेने के अभ्यास और ध्यान के लिए प्रेरित करें. ये गतिविधियां उन्हें शांत रहने और तनाव संभालने में मदद कर सकती हैं.

खुद भी बनें उदाहरण- अगर माता-पिता हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे, तो बच्चों पर भी इसका असर पड़ेगा. इसलिए आप खुद भी परिवार के साथ भोजन करें, बातचीत करें और खेल के लिए समय निकालें.  डिजिटल दौर में बच्चों को तकनीक से दूर रखने के बजाय उसका सही इस्तेमाल सिखाना जरूरी है. माता-पिता का सहयोग, खुला संवाद और भावनात्मक सुरक्षा बच्चों को संतुलित जीवन जीने में मदद कर सकते हैं.

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