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Banana farming tips : गोंडा के किसान अरुण कुमार तिवारी 8 बीघे में G9 वैरायटी के केले की खेती कर रहे हैं. केले की पहली फसल तैयार करने में एक बीघे पर 35 से 40 हजार रुपये की लागत आती है. लोकल 18 से किसान अरुण तिवारी बताते हैं कि केले की फसल तैयार होने में 14 से 15 महीने का समय लगता है. पेड़ी की फसल में लागत घटने से कमाई बढ़ जाती है. सही देखभाल और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किसान इससे बेहतर कमाई कर सकते हैं. अरुण बताते हैं कि खेती शुरू करने से पहले खेत की मिट्टी, जल निकासी और सिंचाई की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है.
गोंडा. यूपी के किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ केले की खेती भी करने लगे हैं. गोंडा के वजीरगंज विकासखंड के किसान अरुण कुमार तिवारी करीब 8 बीघे में G9 वैरायटी के केले की खेती कर रहे हैं. उन्हें इस बार एक बीघे से करीब 40 हजार रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है. खेत से ही व्यापारी केले खरीदकर ले जाते हैं, जिससे बिक्री के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता है. लोकल 18 से किसान अरुण तिवारी बताते हैं कि केले की G9 वैरायटी व्यावसायिक खेती के लिए अच्छी मानी जाती है. केले की फसल तैयार होने में 14 से 15 महीने का समय लगता है. खेती शुरू करने से पहले खेत की मिट्टी, जल निकासी और सिंचाई की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है. पौधों को समय-समय पर खाद और पानी देना पड़ता है.
पहली फसल में ज्यादा लागत
अरुण तिवारी बताते हैं कि केले की पहली फसल तैयार करने में एक बीघे पर 35 से 40 हजार रुपये की लागत आती है. शुरुआत में पौधे लगाने और उनकी देखभाल पर अधिक खर्च करना पड़ता है. हालांकि, इसके बाद निकलने वाली पेड़ी की फसल में लागत कम हो जाती है. पेड़ी की फसल तैयार करने में एक बीघे पर करीब 20 हजार रुपये खर्च आता है. किसान अरुण के मुताबिक पेड़ी की फसल में लागत घटने से कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है. इस बार उन्हें एक बीघे से करीब 40 हजार रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है. हालांकि, वास्तविक कमाई उत्पादन, बाजार भाव और खेती पर होने वाले खर्च पर निर्भर करती है.
ले जाना नहीं पड़ता कहीं
अरुण कुमार तिवारी बताते हैं कि उनके खेत से ही केले की बिक्री हो जाती है. अयोध्या से व्यापारी खेत पर आते हैं और केले खरीदकर ले जाते हैं. इससे उन्हें बाजार तक उपज पहुंचाना नहीं पड़ता है. अरुण बताते हैं कि केले की खेती नकदी फसल के रूप में आमदनी का अच्छा विकल्प बन सकती है. सही देखभाल और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किसान इससे बेहतर कमाई कर सकते हैं.