क्या कोई महिला पुलिसकर्मी किसी पुरुष को हिरासत में ले सकती है? फ्लाइट में अभिजीत दिपके के साथ क्या हुआ

क्या कोई महिला पुलिसकर्मी किसी पुरुष को हिरासत में ले सकती है? फ्लाइट में अभिजीत दिपके के साथ क्या हुआ


जंतर-मंतर पर आज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले ही पुलिस और प्रशासन ने कड़ा रवैया अपनाया. मेट्रो से लेकर ट्रेन और प्लेन तक की नाकेबंदी की गई. इस प्रोटेस्ट से पहले ही पुलिस ने अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया. वह सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ मुंबई से दिल्ली पहुंचे और फ्लाइट में से निकने से पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया. विमान के लैंड होते ही महिला पुलिसकर्मी अंदर गईं और उन्हें हिरासत में लिया गया. इस दौरान दोनों पक्षों में जमकर बहस भी हुई. लेकिन सवाल है कि क्या किसी पुरुष को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने का हक किसी महिला पुलिसकर्मी को है?

भारत में यह सामान्य नियम तो सब जानते हैं कि किसी महिला या लड़की को गिरफ्तार करने के लिए महिला पुरुषकर्मियों की जरूरत पड़ती है. हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में पुरुष पुलिसकर्मी भी गिरफ्तारी कर सकते हैं लेकिन उसके लिए भी लिखित में वैलिड कारण रहना चाहिए. लेकिन किसी मेल यानी पुरुष के लिए क्या नियम हैं? क्या महिला पुलिसकर्मियों को ये हक है कि अभिजीत दिपके को हिरासत में ले सकती है?

हां, भारत में महिला पुलिसकर्मी किसी पुरुष को हिरासत में ले सकती है और गिरफ्तार भी कर सकती है. कानून में ऐसा कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है कि महिला पुलिस अधिकारी पुरुष को गिरफ्तार नहीं कर सकती. हालांकि गिरफ्तारी की प्रक्रिया, पुलिसकर्मी के अधिकार और आरोपी के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर कुछ कानूनी नियम हैं. इस सवाल को समझने के लिए तीन बातें अलग-अलग जानना जरूरी है. गिरफ्तारी का अधिकार, शारीरिक रूप से पकड़ने के नियम और तलाशी के नियम.

महिला पुलिसकर्मी पुरुष को गिरफ्तार कर सकती है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 43 गिरफ्तारी करने की प्रक्रिया बताती है. इसमें पुरुष को गिरफ्तार करने के लिए महिला पुलिसकर्मी पर कोई सामान्य रोक नहीं लगाई गई है. गिरफ्तारी कानून के मुताबिक और वैध आधार पर होनी चाहिए.

क्या महिला पुलिसकर्मी पुरुष को पकड़ सकती है?

हां. गिरफ्तारी करते समय पुलिस अधिकारी जरूरत के मुताबिक किसी इंसान को छूकर या उसे अपने नियंत्रण में लेकर हिरासत में ले सकता है. अगर व्यक्ति गिरफ्तारी का विरोध करता है या भागने की कोशिश करता है, तो कानून की निर्धारित सीमाओं के भीतर जरूरी बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

क्या महिला पुलिसकर्मी, पुरुष की तलाशी ले सकती है?

गिरफ्तारी और तलाशी के नियम अलग हैं. BNSS की धारा 49(2) के अनुसार, किसी महिला की तलाशी केवल दूसरी महिला द्वारा शालीनता का पूरा ध्यान रखते हुए की जानी चाहिए. यह विशेष सुरक्षा महिला की तलाशी के लिए है; पुरुष की गिरफ्तारी पर ऐसी रोक नहीं लगाती है.

क्या पुरुष को गिरफ्तार करने के लिए पुरुष पुलिसकर्मी का होना जरूरी है?

सिर्फ इस आधार पर कि आरोपी पुरुष है, पुरुष पुलिसकर्मी की मौजूदगी को हर गिरफ्तारी के लिए अनिवार्य नहीं माना जा सकता है. हालांकि किसी खास परिस्थिति में लागू अन्य कानूनी नियमों और पुलिस की निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होगा.

गिरफ्तारी के समय पुरुष के क्या अधिकार हैं?

उसे गिरफ्तारी के आधार और लागू कानून के अनुसार जमानत के अधिकार की जानकारी दी जानी चाहिए. गिरफ्तारी की प्रक्रिया का रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए. उसके बताए किसी रिश्तेदार, दोस्त या अन्य नॉमिनेट इंसान को गिरफ्तारी की सूचना देने का प्रावधान है. पूछताछ के दौरान उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने का अधिकार है, हालांकि जरूरी नहीं कि वकील पूरी पूछताछ के दौरान मौजूद रहे.

सीजेपी नेता अभिजीत दिपके अपने साथी सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे. करीब 10 बजकर 18 मिनट पर उनकी फ्लाइट दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुई. लैंड होते ही फ्लाइट के अंदर दिल्ली पुलिस की टीम पहुंची. जब दिपके और उनकी टीम विमान में ही थी, तभी दिल्ली पुलिस की महिला टीम आ धमकी.

फ्लाइट के अंदर का एक वीडियो भी सामने आया है. इस वीडियो में अभिजीत दिपके महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर सवाल उठाते हैं. वह कहते हैं कि आप फ्लाइट में कैसे आ गए. आप अपने मेल ऑफिसर्स को आगे भेजिए. आशुतोष रांका ने कहा कि महिला पुलिस कर्मी क्यों आ रहे हैं, आप मेल पुलिस कर्मियों को भेजिये. सभी को हिरासत में लिया गया. इससे पहले यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया.

क्यों हो रहा है ये प्रदर्शन?  

मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के मुद्दे पर यह प्रदर्शन हो रहा है. SIR के प्रॉसेस में गड़बड़ी, फॉर्म-6 से जुड़े बदलाव की बात पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था. दिल्ली सहित देशभर से प्रदर्शनकारी यहां जुटने के लिए तैयार थे. हालांकि सरकार ने पहले से ही कमर कस रखी थी और बड़े पैमाने पर सुरक्षा के साथ प्रदर्शन को थाम लिया गया. विपक्षी दलों के कई नेता और सांसद भी हिरासत में लिए जा चुके हैं.



Source link