ग्वालियर की आबादी 17 लाख, पोर्टल पर दर्ज 24 लाख; समग्र ID में फर्जीवाड़े से बड़ा खेल


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Gwalior News: ग्वालियर में समग्र आईडी की बड़ी घपलेबाजी सामने आई है, जहां ई-केवाईसी और सत्यापन अभियान के दौरान बड़ा खुलासा है. बताया जा रहा है कि ग्वालियर शहर की आबादी करीब 17 लाख है और समग्र पोर्टल पर 24 लाख आईडी दर्ज हैं. अब प्रशासन की तरफ से फर्जी और डुप्लीकेट आईडी को हटाया जा रहा है.

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ग्वालियर: आबादी 17 लाख, पोर्टल पर दर्ज 24 लाख; समग्र ID में फर्जीवाड़े से खेलZoom

ग्वालियर में समग्र आईडी में फर्जीवाड़े से बड़ा खेल (AI तस्वीर)

Gwalior News: ग्वालियर में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से जुड़ी समग्र आईडी व्यवस्था में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. ई-केवाईसी और सत्यापन अभियान के दौरान ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल, ग्वालियर शहर की आबादी करीब 17 लाख है, जबकि समग्र पोर्टल पर 24 लाख आईडी दर्ज थीं. यानी आबादी से करीब 7 लाख ज्यादा समग्र आईडी सिस्टम में मौजूद थीं. यही अंतर अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है. ई-केवाईसी अभियान के तहत जब इन आईडी का सत्यापन शुरू किया गया, तो कई आईडी में पता गायब मिला. कहीं मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था, तो कई आईडी के रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए.

सत्यापन के बाद अब तक 4 लाख से ज्यादा समग्र आईडी डिलीट की गई. बीते एक महीने में ही 2 लाख से ज्यादा समग्र आईडी डिलीट की गई, जो डुप्लीकेट या मृतकों की थीं.

किन योजनाओं में समग्र आईडी का होता है इस्तेमाल
समग्र आईडी का इस्तेमाल राशन, खाद्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा और छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष्मान कार्ड, प्रसूति एवं मातृत्व सहायता, जन्म-मृत्यु पंजीयन सहित 20 से ज्यादा सरकारी योजनाओं में किया जाता है.

दिसंबर 2013 से पहले नहीं था ऑनलाइन सिस्टम
दिसंबर 2013 से पहले समग्र आईडी बनाने का पूरा प्रोसेस पूरी तरह ऑनलाइन नहीं थी. उस दौर में बड़ी संख्या में आईडी ऑफलाइन तरीके से जनरेट की गईं. आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट और संदिग्ध रिकॉर्ड सिस्टम में शामिल होते चले गए. इनमें से कई आईडी के जरिए सालों तक राशन, पेंशन, लाडली बहना और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की आशंका है.

अब उठ रहे बड़े सवाल
सवाल ये है कि आखिर बिना सत्यापन के इतनी बड़ी संख्या में समग्र आईडी वर्षों तक सरकारी सिस्टम में कैसे बनी रहीं. इनके जरिए किन लोगों ने योजनाओं का लाभ लिया? नगर निगम की ओर से इन संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन का अभियान जारी है.



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