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छत्तीसगढ़ में शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. दिव्यांगों के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद हाईकोर्ट ने यह बड़ा फैसला दिया है. लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को और शिक्षक पद के लिए परीक्षा 25 अक्टूबर को आयोजित होनी थी. अब परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थियों का इंतजार बढ़ गया है.
छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती पर लगी रोक (AI तस्वीर)
छत्तीसगढ़ के हजारों युवाओं का शिक्षक बनने का सपना फिलहाल थोड़ा और लंबा खिंच गया है. बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य में होने वाली ‘शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने भर्ती के विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों, पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के आरक्षण रोस्टर में गड़बड़ी को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की और उसके बाद यह सख्त कदम उठाया है.
आरक्षण रोस्टर और नियमों को दी गई चुनौती
दरअसल राज्य सरकार ने हाल ही में सहायक शिक्षक और शिक्षक के अलग-अलग पदों पर सीधी भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की थी. भर्ती विज्ञापन सामने आते ही इसकी शर्तों और आरक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे. पूर्णतः दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों ने नियमानुसार उचित आरक्षण न दिए जाने का आरोप लगाया. इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रूंगटा ने अदालत के समक्ष दलील रखी कि भर्ती विज्ञापन में तय रोस्टर दिव्यांगजनों के अधिकारों का हनन करता है और यह कानूनी प्रावधानों के अनुकूल नहीं है.
सरकार से किया जवाब तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने लिखित परीक्षा के आयोजन पर रोक लगा दी. इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने की बात कही. इसके अलावा विस्तार से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.
11 अक्टूबर को होनी थी परीक्षा
कुल 2,292 पदों पर भर्ती निकाली गई है. इन पदों को 2 संवर्गों में बांटा गया है. ई-संवर्ग में 795 पद हैं, जबकि टी-संवर्ग में 1497 पद हैं. सहायक शिक्षक पद के लिए लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को और शिक्षक पद के लिए परीक्षा 25 अक्टूबर को आयोजित होनी थी.
क्या बोले डिप्टी सीएम अरुण साव?
भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट के स्टे के बाद राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. मामले पर बोलते हुए छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि माननीय हाईकोर्ट ने विषय का संज्ञान लिया है. राज्य सरकार पूरी संजीदगी से अदालत के समक्ष अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करेगी.