Agency:एजेंसियां
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ब्लैकस्टोन के प्रेसिडेंट जॉन ग्रे ने भारत को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला देश बताया. उन्होंने भारत की युवा आबादी और मजबूत अर्थव्यवस्था की तारीफ की. ये भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्वेस्टमेंट वाली सोच काफी कुछ बदल रही है.
blackstone के प्रेसिडेंट Jon Gray ने भारत की तारीफ की.
दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट इक्विटी कंपनी ब्लैकस्टोन के प्रेसिडेंट जॉन ग्रे इन दिनों भारत की तारीफों के पुल बांध रहे हैं. उनका कहना है कि भारत अब ब्लैकस्टोन के लिए दुनियाभर में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला देश बन चुका है. लेकिन यह सफर एकदम आसान नहीं रहा. ग्रे खुद बताते हैं कि जब ब्लैकस्टोन ने सालों पहले भारत में कदम रखा था, तो हालात बिल्कुल उलटे थे. हमने उस समय कुछ खास किया ही नहीं. आंकड़े ठीक नहीं लग रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से सबसे अच्छा रिटर्न मिल रहा है.
जॉन ग्रे ने कहा, भारत में कुछ सालों तक काम करने के बाद हमें लगा कि कुछ तरीका बदलना चाहिए. हमने बदला और नतीजा सबके सामने है. अब कंपनी छोटी-मोटी हिस्सेदारी लेने के बजाय कंपनियों में बराबर की हिस्सेदारी ले रही है. फोकस भी साफ है- आईटी सेवाएं, कमर्शियल रियल एस्टेट और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग. नतीजा यह हुआ कि भारत ब्लैकस्टोन के लिए दुनिया का सबसे मुनाफे वाला बाजार बन गया.
ग्रे का मानना है कि भारत अब उस मुकाम के करीब पहुंच रहा है, जहां से विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है. उन्होंने कहा, भारत लगातार उस प्वाइंट के करीब जा रहा है, जहां से असली उछाल शुरू होगा.
क्यों भारत आया पसंद
- ग्रे ने कहा, 2005 में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में 14वें नंबर पर थी. आज यह 3.69 ट्रिलियन डॉलर की हो चुकी है और जर्मनी, ब्रिटेन व फ्रांस को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंच गई है. 2026 के वित्त वर्ष में विकास दर 7.6 फीसदी रही, जो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है.
- देश की सबसे बड़ी ताकत इसकी युवा और पढ़ी-लिखी आबादी है. हर साल करीब 1.1 करोड़ युवा कॉलेज से निकलते हैं. इनमें 8 से 10 लाख इंजीनियर या इंजीनियरिंग से जुड़े छात्र होते हैं. करीब 5 लाख युवा ऐसे हैं जिन्हें टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए तैयार माना जाता है.
पूर्व इंफोसिस सीएफओ मोहनदास पई ने कहा, अमेरिका और भारत अगर साथ आएं तो दुनिया की टेक्नोलॉजी में छा सकते हैं. अमेरिका के पास पर्याप्त स्टेम ग्रेजुएट नहीं हैं, जबकि भारत के पास युवा ताकत है. दोनों के सहयोग से बड़ी सफलता मिल सकती है.
कुछ अड़चनें भी हैं
ग्रे ने माना कि अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ और ऊर्जा की कीमतों जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से बेहतर होते जा रहे हैं. चाहे अमेरिका में कोई भी सरकार हो, भारत के साथ संबंध मजबूत होने की दिशा में ही बढ़ रहे हैं.
ग्रे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि देश में बुनियादी ढांचे, कानूनी व्यवस्था और पूंजी बाजार को मजबूत करने का काम बहुत अच्छा हुआ है. उन्होंने कहा, बहुत सी चीजें अब सही जगह पर आ रही हैं. ब्लैकस्टोन के लिए भारत में सबसे बड़ी सीख धैर्य रखने की रही. अब नतीजे सामने आने लगे हैं.