नई दिल्ली. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदाता सूची में शामिल या शामिल किए जाने वाले नामों पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए फॉर्म-7 आवेदन के नियम सख्त कर दिए हैं. आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिया कि किसी एक व्यक्ति की ओर से फॉर्म-7 के जरिए दाखिल किए जाने वाले आवेदनों की संख्या सीमित की जाए. नए नियमों के तहत मतदाता सूची में नाम हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए एक व्यक्ति दावा और आपत्ति की अवधि में अधिकतम 10 आवेदन कर सकेगा. वहीं, मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन के दौरान एक व्यक्ति के लिए यह सीमा हर महीने पांच आवेदन होगी.
चुनाव आयोग ने यह कदम उन मामलों के सामने आने के बाद उठाया है, जिनमें कुछ मतदाताओं की ओर से बिना ठोस आधार के कई नामों के खिलाफ आपत्तियां दाखिल की गईं. निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस तरह की शिकायतों से वास्तविक मतदाताओं को परेशानी होती है, जिनके नामों पर सवाल उठाए जाते हैं. साथ ही चुनाव अधिकारियों पर भी अनावश्यक प्रशासनिक बोझ बढ़ता है. निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-7 के ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से दाखिल किए जाने वाले आवेदनों के लिए स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की हैं. अब दावा और आपत्ति की अवधि के दौरान कोई व्यक्तिगत मतदाता अधिकतम 10 आवेदन ही दाखिल कर सकेगा. मतदाता सूची के निरंतर अपडेट करने की प्रक्रिया में यह सीमा प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 आवेदन होगी.
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने या नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है. मतदाता सूची पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार, संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत व्यक्ति ही इस फॉर्म के जरिए आपत्ति दाखिल कर सकता है. प्रत्येक आवेदन की जांच संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को करनी होती है.
राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को भी फॉर्म-7 के जरिए सामूहिक रूप से आवेदन जमा करने की अनुमति है, लेकिन उनके लिए पहले से ही सीमाएं निर्धारित हैं. विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले बीएलए प्रतिदिन अधिकतम 50 फॉर्म जमा कर सकते हैं. मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद यह सीमा प्रतिदिन 10 फॉर्म है. निर्वाचन आयोग के वर्ष 2023 के मतदाता सूची संबंधी मैनुअल में व्यक्तिगत मतदाताओं की ओर से बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल करने पर रोक लगाने और पांच से अधिक नामों पर आपत्ति किए जाने की स्थिति में अतिरिक्त सत्यापन करने का प्रावधान था. हालांकि, ऑफलाइन आवेदनों की संख्या को लेकर स्पष्ट सीमा नहीं होने के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में अधिकारियों के स्तर पर असमंजस की स्थिति बनती थी. अब आयोग ने ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों के लिए एक स्पष्ट व्यवस्था लागू की है.
आयोग ने निर्देश दिया है कि फॉर्म-7 में आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति को आवेदन में सभी जरूरी विवरण भरने होंगे और उस पर अपने मूल हस्ताक्षर करने होंगे. हस्ताक्षर की मुहर यानी सिग्नेचर सील के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को आवेदन करने वाले व्यक्ति के विवरण का मतदाता सूची से मिलान कर उसकी पहचान और पात्रता की पुष्टि करने के निर्देश भी दिए गए हैं. नियमों के मुताबिक, निर्धारित समय सीमा के भीतर या निर्धारित प्रारूप और प्रक्रिया के अनुसार दाखिल नहीं किए गए आवेदनों को ईआरओ नियम 17 के तहत खारिज करेंगे. इससे आवेदन की प्रक्रिया में एकरूपता लाने और गलत तरीके से दाखिल की गई आपत्तियों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-7 के जरिए दाखिल हर आपत्ति की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी. मतदाता सूची पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 19 और 20 के तहत ईआरओ को किसी आपत्ति पर निर्णय लेने से पहले शिकायतकर्ता को नोटिस देना होगा. इसके बाद व्यक्तिगत सुनवाई करनी होगी और प्रत्येक फॉर्म-7 आवेदन के लिए अलग-अलग बयान दर्ज करना होगा. यदि जांच में आपत्ति सही पाई जाती है, तो संबंधित मतदाता का नाम हटाने का अंतिम आदेश जारी करने से पहले उस व्यक्ति को भी अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य होगा, जिसके नाम पर आपत्ति की गई है. इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी वास्तविक मतदाता का नाम बिना उचित जांच और सुनवाई के मतदाता सूची से न हटाया जाए.
आयोग ने झूठी या मनगढ़ंत शिकायतों के मामलों में कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं. यदि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी को लगता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत बयान या घोषणा के आधार पर आवेदन दाखिल किया है, तो उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी. यह धारा जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करने से संबंधित है. निर्वाचन आयोग की ओर से ये निर्देश अवर सचिव संदीप कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र के माध्यम से जारी किए हैं. सीईओ को निर्देश दिया गया है कि नए नियमों की जानकारी सभी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों और मैदानी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों तक तत्काल पहुंचाई जाए. साथ ही, आम लोगों को भी नई व्यवस्था के बारे में व्यापक स्तर पर जागरूक करने को कहा गया है.