कौन हैं JNU प्रोफेसर अंगोमचा, क्या है सेक्सुअल हैरेसमेंट का पूरा केस?
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JNU के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को विश्वविद्यालय ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है. यह कार्रवाई छात्राओं की ओर से लगाए गए सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोपों की जांच के बाद हुई. रिपोर्ट के मुताबिक 11 छात्राओं ने मई में शिकायतें दर्ज कराई थीं. आरोप वाइवा परीक्षा के दौरान कथित अनुचित टिप्पणियों से जुड़े हैं. JNU की इंटरनल कमेटी ने जांच के बाद बड़ी सजा की सिफारिश की थी. दूसरी ओर अकोइजम ने बर्खास्तगी पर सवाल उठाते हुए इसे अपने खिलाफ कथित ‘विच हंट’ बताया है. जानिए पूरा मामला और प्रोफेसर की पूरी कहानी.
JNU ने कांग्रेस सांसद और प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद बर्खास्त किया. (फाइल फोटो PTI)
कांग्रेस पिछले चार दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़कों पर है. शुक्रवार को कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी दलों के नेताओं ने सांसद मार्च किया. लेकिन शुक्रवार को ही एक खबर आई जिसने राहुल गांधी के ‘स्मैश द पैट्रिआर्की’ नारे पर गहरा प्रहार किया. दरअसल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने अकादमिक जगत और राजनीति दोनों में हलचल बढ़ा दी है. विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है. अकोइजम सिर्फ JNU में पढ़ाने वाले प्रोफेसर नहीं हैं. वह कांग्रेस के लोकसभा सांसद भी हैं और मणिपुर की इनर मणिपुर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. विश्वविद्यालय के आदेश के मुताबिक इंटरनल कमेटी ने शिकायतों की जांच की और बड़ी सजा देने की सिफारिश की थी. इसके बाद प्रशासन ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया. अब इस मामले में प्रोफेसर की राजनीतिक भूमिका से लेकर छात्रों की शिकायतों और उनके जवाब तक पर चर्चा हो रही है.
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर है कि आखिर शिकायतें क्या थीं और जांच के बाद विश्वविद्यालय ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मई में 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ सेक्सुअल हैरेसमेंट से जुड़ी शिकायतें की थीं. आरोप वाइवा यानी मौखिक परीक्षा के दौरान कथित तौर पर की गई टिप्पणियों से जुड़े हैं. शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने इंटरनल कमेटी के जरिए जांच शुरू कराई. वहीं अकोइजम ने अपनी बर्खास्तगी पर सवाल उठाते हुए इसे अपने खिलाफ कथित ‘विच हंट’ यानी सुनियोजित निशाना बनाने की कार्रवाई बताया है. उनका कहना है कि आरोपों से जुड़े दस्तावेज उन्हें दिखाए जाने चाहिए. ऐसे में मामले के दोनों पक्षों को समझना जरूरी है.
फिलहाल JNU ने जांच के बाद प्रोफेसर की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है. (फोटो X/ANI)
JNU ने किस आधार पर प्रोफेसर को बर्खास्त किया?
JNU की ओर से 9 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में कहा गया कि प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की इंटरनल कमेटी ने जांच की थी. समिति ने बड़ी सजा की सिफारिश की. विश्वविद्यालय ने जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला किया. आदेश पर JNU की कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर हैं. विश्वविद्यालय ने यह कार्रवाई सेवा नियमों के तहत की है. इनमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के निर्धारित नियम और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम शामिल हैं.
11 छात्राओं ने क्या आरोप लगाए थे?
- हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मई में 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं. आरोप है कि मई के पहले सप्ताह में वाइवा परीक्षा के दौरान उन्होंने यौन संकेतों वाली अनुचित टिप्पणियां कीं.
- रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से बताया गया कि कथित तौर पर छात्राओं से यौन संबंधी पेशकश स्वीकार करने पर अतिरिक्त अंक देने जैसी बातें कही गई थीं. हालांकि ये शिकायतों में लगाए गए आरोप हैं. इन्हें स्वतंत्र रूप से साबित हुआ तथ्य नहीं माना जाना चाहिए.
- बताया गया कि एक छात्रा ने अपने अनुभव को छात्रों के व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किया. इसके बाद कुछ अन्य छात्राएं भी सामने आईं और उन्होंने अपने कथित अनुभव बताए. शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने संबंधित छात्राओं के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की और इंटरनल कमेटी से जांच कराई.
बर्खास्तगी पर प्रोफेसर अकोइजम ने क्या कहा?
- समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक अकोइजम ने अपनी बर्खास्तगी को अपने खिलाफ कथित ‘विच हंट’ को उजागर करने का मौका बताया. उन्होंने कहा कि अगर आरोप हैं तो उन्हें सामने रखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक उन्हें जांच रिपोर्ट या बर्खास्तगी का आदेश नहीं मिला था.
- उनकी प्रतिक्रिया से साफ है कि वह इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि उपलब्ध जानकारी में उनकी ओर से आरोपों के प्रत्येक बिंदु का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है. ऐसे में मामले में विश्वविद्यालय की जांच और प्रोफेसर के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है.
कौन हैं अंगोमचा बिमोल अकोइजम?
अंगोमचा बिमोल अकोइजम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर रहे हैं. शिक्षण और अकादमिक काम के साथ वह राजनीति में भी सक्रिय हैं. वह कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं और मणिपुर की इनर मणिपुर संसदीय सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनकी दोहरी भूमिका के कारण यह मामला राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है. एक तरफ विश्वविद्यालय की कार्रवाई है तो दूसरी तरफ विपक्षी दल के सांसद पर लगे आरोपों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर उठाए सवाल
- इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस को निशाने पर लिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी पितृसत्ता खत्म करने की बात करती है वह अपने ही सांसद पर यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में क्या कार्रवाई कर रही है.
- वहीं JNU में ABVP के अध्यक्ष मयंक पंचाल ने विश्वविद्यालय के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि यह छात्राओं की शिकायतों और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जवाबदेही की दिशा में अहम कदम है. ABVP ने छात्राओं को न्याय दिलाने और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की मांग भी की.
आगे क्या होगा?
फिलहाल JNU ने जांच के बाद प्रोफेसर की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया है. दूसरी ओर अकोइजम ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. इस मामले में आगे की स्थिति जांच से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित पक्षों की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगी. यह मामला विश्वविद्यालयों में शिकायतों की जांच और महिला सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े करता है. लेकिन आरोपों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच यह ध्यान रखना जरूरी है कि शिकायतों में लगाए गए हर आरोप और जांच के निष्कर्षों को उनके वास्तविक संदर्भ में ही समझा जाए.