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Success Story: बुरहानपुर जिले के 60 वर्षीय किसान चार एकड़ जमीन पर मिक्स खेती कर सफलता की मिसाल पेश कर रहे हैं। वे केला, कपास, गन्ना, मक्का और विभिन्न सब्जियों की खेती से बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं.
Success Story: बुरहानपुर जिले के एक 60 वर्षीय किसान ने अपनी मेहनत और खेती के प्रति लगन से सफलता की मिसाल पेश की है. करीब 25 साल पहले खेती की शुरुआत करने वाले किसान आज चार एकड़ जमीन पर मिक्स खेती कर रहे हैं. वे अपने खेत में केला कपास, गन्ना, मक्का, चना, सोयाबीन, तुअर के साथ पालक और अन्य सब्जियों की खेती करते हैं. अलग-अलग फसलों को अपनाकर वे खेती से बेहतर आमदनी हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं. किसान की यह कहानी दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. 60 साल की उम्र में भी नई चीजें सीखने और खेती में प्रयोग करने का उनका जज्बा बताता है कि अनुभव के साथ नई तकनीक अपनाना भी जरूरी है. उनकी मेहनत और मिक्स खेती का तरीका अन्य किसानों को भी खेती के नए विकल्प तलाशने की प्रेरणा देता है.
एक साथ कई फसलों की खेती
लोकल 18 की टीम को किसान सोहन महाजन ने जानकारी देते हुए बताया कि चार एकड़ खेत में मौसम और जरूरत के अनुसार अलग-अलग फसलों का उत्पादन करते हैं. खेत में केला कपास और गन्ने जैसी फसलों के साथ मक्का, चना, सोयाबीन और तुअर भी लगाते हैं. इसके अलावा पालक और अन्य सब्जियों की खेती भी करते हैं. उनका मानना है कि खेती में विविधता रखने से अलग-अलग फसलों से आमदनी के अवसर मिलते हैं. इसी सोच के साथ वे लंबे समय से मिक्स खेती कर रहे हैं.
खेती की कमाई से खरीदी एक एकड़ जमीन
किसान ने करीब 25 साल पहले खेती का सफर शुरू किया था. समय के साथ अनुभव बढ़ा और उन्होंने खेती के तरीकों में बदलाव करना भी सीखा.मेहनत और खेती से होने वाली कमाई के दम पर उन्होंने एक एकड़ जमीन भी खरीदी. यह उपलब्धि उनके वर्षों के परिश्रम और खेती के प्रति समर्पण को दर्शाती है. वे आज भी खेतों में मेहनत कर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं.
कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और सोशल मीडिया से सीखते हैं नई तकनीक
किसान खेती में बेहतर परिणाम पाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेते हैं. इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी नई तकनीकों और खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी हासिल करते हैं. उनका कहना है कि किसानों को समय-समय पर नई जानकारी लेते रहना चाहिए और जरूरत के अनुसार खेती में बदलाव करना चाहिए. इससे फसलों की बेहतर देखभाल करने और उत्पादन सुधारने में मदद मिल सकती है.