किन तरीकों से दी जाती है मौत की सजा? दुनिया के कौन से देशों में है जान लेने का हक, नियम क्या

किन तरीकों से दी जाती है मौत की सजा? दुनिया के कौन से देशों में है जान लेने का हक, नियम क्या


अमेरिका के एक आर्मी ऑफिसर ने 17 साल पहले एक ऐसा कांड हुआ था, जिसकी सजा का ऐलान हो गया है. यह सजा-ए-मौत है. गद्दार अफसर को कुर्सी पर बांधकर बैठाया जाएगा, फिर उसके सिर और मुंह को काले कपड़े से ढक दिया जाएगा. सीने पर घेरा बनाकर हार्ट वाले हिस्से पर फायरिंग स्क्वैड के जवान गोली मारेंगे. यह मामला अमेरिका के पूर्व आर्मी मेजर निदाल हसन से जुड़ा है, जिसने सेना के अपने ही 13 साथियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. अब यहां यह जानना दिलचस्प है कि सजा-ए-मौत किन किन तरीकों से दी जाती है? दुनिया के किन देशों में जान लेने का अधिकार है?

5 नवंबर 2009 को अमेरिका के फोर्ट हुड में अमेरिकी फौजी जब अफगानिस्तान और इराक की जंग में पोस्टिंग से पहले मेडिकल चेकअप करवा रहे थे, तभी मेजर हसन ने कट्टरता में आकर अपने ही साथी सैनिकों को भून डाला. जिहाद के लिए किए इस घातक हमले में 13 की मौत हो गई थी, जबकि 32 अन्य घायल हो गए थे. उसे पकड़ लिया गया था. अब लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 3 दिसंबर 2026 को उसी फोर्ट हुड में सजा-ए-मौत की सजा दी जाएगी. जब किसी अदालत की तरफ से किसी अपराधी को मौत की सजा सुनाई जाती है, तो दुनिया के अलग-अलग देश अपनी कानूनी व्यवस्था और तकनीक के आधार पर अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं.

  1. फांसी देना: यह दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है. भारत, मिस्र, ईरान, इराक, जापान, सिंगापुर जैसे देशों में इसका उपयोग होता है. अमेरिका के ज्यादातर राज्यों में इसे खत्म कर दिया गया है, जबकि ब्रिटेन में रेयर केस में इसकी सजा दी जाती है. इसमें अपराधी के गले में फंदा डालकर उसे एक निश्चित ऊंचाई से गिराया जाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी टूट जाती है और तुरंत मौत हो जाती है.
  2. फायरिंग स्क्वाड: इस विधि में सैनिकों या पुलिसकर्मियों का एक स्क्वाड अपराधी को गोली मारता है. यह तरीका मुख्य रूप से सैन्य अदालतों, युद्ध के दौरान या फिर उत्तर कोरिया, चीन, और वियतनाम जैसे देशों में अपनाया जाता है.
  3. घातक इंजेक्शन: इसे सबसे आधुनिक और मानवीय तरीका माना जाता है. इसमें दोषी को नसों के जरिए जहरीली दवाओं जैसे एनेस्थेटिक और पैरालाइजिंग एजेंट का मिश्रण दिया जाता है, जिससे दिल की धड़कन रुक जाती है. अमेरिका, चीन और वियतनाम इसका उपयोग करते हैं.
  4. इलेक्ट्रिक चेयर पर झटका: दोषी को इलेक्ट्रिक चेयर पर बैठाकर फिर उसको बिजली का झटका देने के लिए यह तकनीक अपनाई गई. करीब 140 साल से अमेरिका में इस प्रॉसेस को किया जाता है. इसके तहत 500 से लेकर 2 हजार वोल्ट तक का झटका कैदी को दिया जाता है. यह 30 सेकेंड से लेकर मिनट तक रह सकता है. डॉक्टर कुछ समय इंतजार करने के बाद यह देखते हैं कि दिल क्या अभी भी धड़क रहा है या नहीं. धड़कते रहने पर फिर से झटका दिया जाता है. मौत की पुष्टि हो जाने तक ऐसा चलता रहता है.
  5. सिर कलम करना: पुराने जमाने का यह तरीका आज भी कुछ देशों में कानूनी रूप से अस्तित्व में है. वर्तमान समय में मुख्य तौर पर सउदी अरब में शरिया कानून के तहत इसका इस्तेमाल किया जाता है.
  6. नाइट्रोजन गैस से दम घुटना: यह सबसे नया और आधुनिक तरीका है, जिसे हाल ही में अलबामा जैसे अमेरिका के कुछ राज्यों में शुरू किया गया है. इसमें दोषी को केवल शुद्ध नाइट्रोजन गैस सांस के जरिए दी जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है और उसकी मौत हो जाती है.

किन देशों के पास है जान लेने का अधिकार?

कानूनी भाषा में कहें तो सरकार के पास संप्रभुता के तहत अपने कानूनों का उल्लंघन करने पर नागरिकों की जान लेने का अधिकार होता है, जिसे कैपिटल पनिशमेंट कहा जाता है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र इसे मानवाधिकारों का हनन मानते हैं और इसे पूरी तरह से खत्म करने की वकालत करते हैं.

इसके बावजूद, दुनिया के कई संप्रभु देशों ने अपने संविधान और दंड संहिताओं में यह अधिकार सुरक्षित रखा है कि गंभीर से गंभीर अपराध जैसे आतंकवाद, देशद्रोह, और क्रूर हत्या में वे अपराधियों को मौत की सजा दे सकते हैं.

अभी किन-किन देशों में है सजा-ए-मौत? 

एमनेस्टी इंटरनेशनल की हालिया रिपोर्ट और वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के देशों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. पूरी तरह से मौत की सजा समाप्त करने वाले देश: दुनिया के 100 से अधिक देशों जैसे अधिकांश यूरोपीय देश, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया ने कानूनन मौत की सजा को पूरी तरह खत्म कर दिया है.
  2. प्रैक्टिकल तौर पर रोक लगाने वाले देश: कुछ देशों में कानूनन सजा-ए-मौत का प्रावधान तो है, लेकिन उन्होंने कई सालों से कोई अमल नहीं किया है. इसमें रूस और ताजिकिस्तान जैसे देश शामिल हैं.
  3. सजा-ए-मौत देने वाले ऐक्टिव देश: वर्तमान में भी कई प्रमुख देशों में सजा-ए-मौत का कानून और इसका इम्प्लिमेंटेशन दोनों ही सक्रिय हैं. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं.

चीन: दुनिया में सबसे ज्यादा मौत की सजाएं और उनका क्रियान्वयन चीन में होता है. हालांकि सटीक आंकड़े गोपनीय रखे जाते हैं.

ईरान और सऊदी अरब: मिडिल ईस्ट के इन देशों में आतंकवाद, ड्रग्स तस्करी और हत्या के मामलों में सबसे अधिक मौत की सजाएं दी जाती हैं. फांसी और सिर कलम करके दी जाती हैं.

अमेरिका: संयुक्त राज्य अमेरिका के कई राज्यों में आज भी घातक इंजेक्शन और नाइट्रोजन गैस जैसे तरीकों से मौत की सजा दी जाती है.

उत्तर कोरिया, इराक, यमन, वियतनाम, सिंगापुर, पाकिस्तान, और मिस्त्र आदि देशों में भी सजा-ए-मौत का प्रावधान और इसका अमल जारी है. भारत देश की बात करें तो इसमें भी दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में सबसे कठोर अपराधों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है, हालांकि इसका पालन दुर्लभ मामलों में ही हो पाता है.



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