भागलपुर में गोभी खेती से डबल मुनाफा, एक फूल पर 20 रुपये शुद्ध लाभ
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Gobhi Farming: भागलपुर जिले को सब्जी की खेती के लिए जाना जाता है. यहां बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती होती है. अन्य फसलों के मुकाबले किसानों को इसमें ज्यादा मुनाफा दिखता है. इसलिए लोग तेजी से सब्जी उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं.
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सब्जी की खेती थोड़ी नुकसानदायक हो सकती है. लेकिन सही तकनीक से खेती करने पर अच्छी सफलता मिलती है. बाढ़ के पानी के कारण नुकसान से बचने के लिए किसानों को पहले से एक्टिव रहना होगा. बाढ़ का पानी उतरते ही गोभी की खेती शुरू की जा सकती है.
अक्सर किसान बाढ़ खत्म होने के बाद बीज बोते हैं. फिर बिचड़ा तैयार कर पौधे लगाते हैं. इसमें काफी समय बर्बाद हो जाता है. इसके बजाय किसान अभी से ट्रे (प्लास्टिक प्रो-ट्रे) में गोभी का बिचड़ा तैयार कर लें. जैसे ही बाढ़ का पानी निकले, कीचड़ में ही इन पौधों को लगा दें. इससे फसल जल्दी तैयार होगी और पैदावार भी काफी अच्छी मिलेगी.
किसान बताते हैं कि गोभी की खेती बहुत मुनाफेदार है. लेकिन सही समय और तरीके से खेती करना जरूरी है. देर से खेती करने पर गोभी की कीमत 2 से 3 रुपये प्रति फूल तक गिर जाती है. वहीं सही समय पर अगेती फसल बाजार में लाने पर एक फूल का भाव 25 से 30 रुपये तक मिल जाता है.
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लागत की बात करें तो गोभी के एक पौधे की कीमत लगभग 25 पैसे आती है. खाद और देखभाल मिलाकर कुल लागत प्रति पौधा करीब 5 रुपये पड़ती है. इस तरह एक पौधे से किसान को सीधे 20 रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है. इसके अलावा किसान एक ही खेत से दोहरी कमाई भी कर सकते हैं. गोभी के साथ मूली की अंतरवर्तीय (इंटर-क्रॉपिंग) खेती करके किसान एक ही जमीन से डबल मुनाफा कमा सकते हैं.
भागलपुर और आसपास के इलाकों के लिए गोभी की अगेती किस्मों में सबसे बेहतरीन ‘सबौर अग्रिम’ को माना गया है. इसे बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर द्वारा विकसित किया गया है. यह किस्म किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है. इसकी उत्पादन क्षमता काफी अच्छी है और इसके फूल भी बड़े और आकर्षक होते हैं. इस किस्म को लगाकर किसान कम समय में बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.