OPINION: ओटीटी पर ‘डार्क थ्रिलर’ और ‘मर्डर मिस्ट्री’ का क्यों होता जा रहा है बोलबाला?

OPINION: ओटीटी पर ‘डार्क थ्रिलर’ और ‘मर्डर मिस्ट्री’ का क्यों होता जा रहा है बोलबाला?


नई दिल्ली. कॉमेडी या लव स्टोरी शो में कहानी बहुत सीधी होती है. हमें पहले से पता होता है कि आगे क्या होगा. हालांकि, थ्रिलर शो में हर मोड़ पर एक नया ट्विस्ट होता है. यह ट्विस्ट दर्शकों को बांधे रखता है. टीवी देखते समय रोमांच और दिल की धड़कन बढ़ने वाली फीलिंग ही लोगों को डार्क थ्रिलर की ओर खींचती है. थिएटर और टीवी पर दिखाई जाने वाली फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की कड़ी नजर होती है. कई सीन और डायलॉग काट दिए जाते हैं. हालांकि, OTT प्लेटफॉर्म पर मेकर्स को पूरी आजादी होती है. वे कहानी को ठीक वैसे ही दिखा सकते हैं जैसे असल जिंदगी में होता है. जब ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘पाताल लोक’ या ‘असुर’ जैसे शो आए, तो लोगों ने पहली बार स्क्रीन पर असली क्राइम, गलत इस्तेमाल और समाज की कड़वी सच्चाई देखी, वो भी बिना किसी रोक-टोक के. जब दर्शक स्क्रीन पर पूरी तरह से असली और बिना मिलावट वाली कहानी देखते हैं, तो वे उससे ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं. इस आजादी ने मेकर्स को बिना डरे डार्क और थ्रिलिंग कहानियां बनाने का मौका दिया है.

पूरी सीरीज एक ही बार में देखना
OTT पर कोई भी मर्डर मिस्ट्री या थ्रिलर सीरीज इस तरह से बनाई जाती है कि हर एपिसोड के आखिर में एक बहुत बड़ा सस्पेंस रह जाता है. इसे ‘क्लिफहैंगर’ कहते हैं. जैसे ही कोई एपिसोड खत्म होता है, दर्शक के मन में यह सवाल रह जाता है- ‘आगे क्या होगा?’ इस सवाल का जवाब पाने के लिए दर्शक तुरंत ‘अगला एपिसोड’ पर क्लिक कर देता है. इससे लोग पूरी रात जागते हैं और पूरी सीरीज एक ही बार में खत्म कर देते हैं. इसे बिंज-वॉचिंग कहते हैं. कॉमेडी या ड्रामा शो में आप एक एपिसोड देखकर टीवी बंद कर सकते हैं, लेकिन थ्रिलर सीरीज में सस्पेंस आपको टीवी बंद करने से रोकता है.

कुछ नया और अलग देखने की चाहत
पिछले 20-25 सालों से भारतीय टीवी चैनल वही पुराने ‘सास-बहू’ के झगड़े, फालतू का ड्रामा और मनगढ़ंत कहानियां दिखा रहे हैं. नई पीढ़ी इस घिसे-पिटे कंटेंट से पूरी तरह बोर हो गई थी. वे कुछ ऐसा चाहते थे जो उनके दिमाग को चुनौती दे और असल जिंदगी से जुड़े. OTT के आने से यह कमी पूरी हुई. यहां, हीरो कोई सुपरमैन या परफेक्ट इंसान नहीं है. बल्कि, वह भी किसी भी आम इंसान की तरह गलतियां करता है. उसमें भी कमियां हैं. थ्रिलर शो में पुलिस ऑफिसर, क्रिमिनल और आम लोग सभी असली लगते हैं. यही वजह है कि युवाओं ने टीवी छोड़कर डार्क OTT शो अपना लिए हैं.

दर्शक खुद बन जाते हैं जासूस
मर्डर मिस्ट्री और थ्रिलर शो देखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दर्शक सिर्फ टीवी नहीं देख रहा होता, बल्कि अपने मन में भी एक जासूस बन जाता है. जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वे अपने अंदाजे लगाने लगते हैं- ‘इस किरदार ने शायद यह मर्डर किया है’ या ‘यह सबूत झूठा है.’ जब सीरीज के आखिर में दर्शकों का अंदाजा सही निकलता है, तो उन्हें एक अनोखी खुशी और जीत का एहसास होता है. अगर अंदाजा गलत भी निकलता है, तो भी कहानी के सरप्राइज उन्हें हैरान कर देते हैं. दोनों ही हालात में दर्शक का मनोरंजन जरूर होता है. यही माइंड-गेम लोगों को क्राइम थ्रिलर का आदी बनाता है.

क्या डार्क थ्रिलर का यह ट्रेंड कभी खत्म होगा?
कई लोगों का मानना ​​है कि OTT प्लेटफॉर्म पर मर्डर मिस्ट्री और क्राइम शो की भरमार दर्शकों को थका रही है. हर दूसरे हफ्ते एक नई क्राइम सीरीज आती है, जिससे कभी-कभी कहानियां एक जैसी लग सकती हैं. लेकिन थ्रिलर जॉनर का क्रेज इतनी आसानी से खत्म नहीं होगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि सिर्फ खून-खराबा दिखाने के बजाय, मेकर्स अब नई तरह की कहानियां लाएंगे, जैसे साइंस पर आधारित थ्रिलर, साइकोलॉजिकल थ्रिलर और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्राइम. सीधे शब्दों में कहें तो OTT पर डार्क थ्रिलर और मर्डर मिस्ट्री की सफलता का एक आसान कारण है- थ्रिल और सस्पेंस. जब तक लोग मिस्ट्री सुलझाने और नई कहानियां देखने का मजा लेते रहेंगे, OTT पर सस्पेंस और क्राइम सीरीज का जादू चलता रहेगा.



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