किसी एयरपोर्ट का नाम रखने और बदलने का फैसला कैसे होता है? क्या प्रक्रिया? अब तक किसके नाम बदले गए


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किसी एयरपोर्ट का नाम रखने और बदलने का फैसला कैसे होता है? क्या प्रक्रिया?

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जेवर वाले एयरपोर्ट को अब नरेंद्र मोदी इंटरनैशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा. आखिर किसी एयरपोर्ट का नाम रखने और बदलने का फैसला कैसे होता है? इसकी प्रक्रिया और नियम कानून क्या है? अब तक भारत में किन एयरपोर्ट्स का नाम बदला जा चुका है.

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जेवर एयरपोर्टका नाम बदला

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट की बैठक के बाद अहम फैसला लिया है. गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर में बनकर तैयार हुए नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर प्रधानमंत्री के नाम पर रखा गया है. जेवर वाले एयरपोर्ट को अब नरेंद्र मोदी इंटरनैशनल एयरपोर्ट के नाम से जाना जाएगा. आखिर किसी एयरपोर्ट का नाम रखने और बदलने का फैसला कैसे होता है? विधायिका से लेकर न्यायपालिका तक के प्रॉसेस से गुजरना होता है. इसकी प्रक्रिया और नियम कानून क्या है? अब तक भारत में किन एयरपोर्ट्स का नाम बदला जा चुका है.

भारत में किसी भी नए हवाई अड्डे का नाम रखने या पुराने एयरपोर्ट का नाम बदलने की प्रक्रिया केवल किसी मंच से मौखिक घोषणा करने या फिर राजनीतिक बयानों से पूरी नहीं होती है. इसके लिए एक निश्चित प्रशासनिक, विधायी और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. इसके लिए राज्य विधानसभा का प्रस्तव, केंद्रीय एविएशन मंत्रालय की रिकमेंडेशन, गृह मंत्रालय की सुरक्षा मंजूरी, केंद्रीय कैबिनेट का अप्रूवल और अंत में भारत के गजट नोटिफिकेशन की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ये कैसे होता है, आइए समझते हैं पूरा प्रॉसेस.

नया नाम रखने या बदलने की प्रक्रिया

  • राज्य विधानसभा में प्रस्ताव: किसी भी एयरपोर्ट का नाम बदलने की प्रक्रिया अमूमन उस राज्य से शुरू होती है, जहां वह हवाई अड्डा स्थित है. संबंधित राज्य की विधानसभा में एक सर्वसम्मत या बहुमत वाला प्रस्ताव पास किया जाता है. इस प्रस्ताव में उस शख्सियत या जगह का नाम सुझाया जाता है जिसके नाम पर एयरपोर्ट का नाम रखा जाना है.
  • केंद्रीय सिविल एविएशन को भेजना: एयरपोर्ट वाले राज्य की विधानसभा की तरफ से पारित प्रस्ताव को औपचारिक रूप से भारत सरकार के सिविल एविएशन मंत्रालय के पास रिव्यू के लिए भेजा जाता है.
  • मंत्रालयों और सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी: मंत्रालय इस प्रस्ताव को अलग-अलग संबंधित विभागों, खुफिया एजेंसियों और गृह मंत्रालय के पास NOC यानी कि नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए भेजता है. यह जांच की जाती है कि जिस नाम का प्रस्ताव है, उससे जुड़े किसी विवाद या कानून-व्यवस्था की समस्या तो नहीं है.
  • केंद्रीय कैबिनेट की मुहर: सभी विभागों से हरी झंडी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखा जाता है. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही नाम के परिवर्तन पर मुहर लगती है.
  • गैजेट में नोटिफिकेशन: केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलने के बाद भारत सरकार के राजपत्र ऑफिशियल गैजेट में एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी की जाती है. गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही देश और दुनिया के नक्शे पर एयरपोर्ट का नाम कानूनी रूप से बदलता है.

नए एयरपोर्ट्स के नामकरण को लेकर क्या नीति है?

पिछले कुछ सालों में सरकार और नीति निर्माताओं की ओर से इस बात पर भी जोर दिया गया है कि नए बनने वाले अधिकांश ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स के नाम किसी महान हस्ती या राजनेता के बजाय उस शहर या स्थानीय क्षेत्र के नाम पर रखे जाएं, जहां वे स्थित हैं.

इसकी मुख्य वजह यह है कि शहर के नाम से यात्रियों और खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और विदेशी एयरलाइंस को एयरपोर्ट की भौगोलिक स्थिति समझने में आसानी होती है. हालांकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों या जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कई बार पुरानी परंपरा के अनुसार शख्सियतों के नाम भी जोड़े जाते हैं.

  1. कानूनी प्रैक्टिकल समस्या: एयरपोर्ट के नामकरण में प्रैक्टिकल पेचीदगियां हो जाती हैं. जैसे चंडीगढ़ या नवी मुंबई एयरपोर्ट का मामला अहम है. एयरपोर्ट के नामकरण से जुड़े कई मामले अक्सर राजनीतिक और कानूनी विवादों में भी घिर जाते हैं.
  2. स्वामित्व का विवाद: कई बार एयरपोर्ट का स्वामित्व यानी कि मालिकाना हक केंद्र और राज्य सरकारों या जॉइंट वेंचर के पास होता है. उदाहरण के लिए अगर कोई एयरपोर्ट दो राज्यों की सीमा पर या साझा हिस्सेदारी वाला है तो आम सहमति बनाने में लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया लगती है. जैसे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर पंजाब और हरियाणा दोनों का दावा रहा है.
  3. जूडिशरी का रोल: सुप्रीम कोर्ट या बॉम्बे हाईकोर्ट जैसी अदालतों ने कई बार य स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट का नामकरण पॉलिसी से जुड़ा हुआ मामला है. इसमें कोर्ट सामान्य तौर पर दखल नहीं देती हैं. यह फैसला सरकार और संबंधित प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आता है.

अब तक इन एयरपोर्ट्स का नाम बदला-

  • मुंबई का छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 2016 में बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट किया गया.
  • चंडीगढ़ का इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 2022 में इसका नाम बदलकर शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट किया गया.
  • अयोध्या का एयरपोर्ट: मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बदलकर दिसंबर 2023 में नया नाम महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम रखा गया.
  • बेंगलुरु का इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 2013 में नाम को बदलकर केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट किया गया.
  • अमृतसर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट: 2010 में राजासांसी से नाम बदलकर श्री गुरु राम दास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट किया गया.
  • लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट: 2008 में नाम बदलकर चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट किया गया.
  • गोरखपुर एयरपोर्ट (एयरफोर्स स्टेशन): 2017 में नाम बदलकर महायोगी गोरखनाथ एयरपोर्ट किया गया.
  • आगरा एयरपोर्ट (एयरफोर्स स्टेशन): 2017 में बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय एयरपोर्ट किया गया.
  • त्रिपुरा का अगरतला एयरपोर्ट: 2018 में बदलकर महाराजा बीर बिक्रम मणिक्य किशोर एयरपोर्ट किया गया.
  • नोएडा का जेवर एयरपोर्ट: 2026 में नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी इंटरनैशनल एयरपोर्ट कर दिया गया.



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