क्या AI ने खोजा नया जैविक सिस्टम? Anthropic के दावे पर वैज्ञानिक ने क्यों जताई आपत्ति


Powered by :

Last Updated:

AI अब विज्ञान की दुनिया में भी नए रास्ते खोल रहा है. Anthropic का दावा है कि उसके AI मॉडल Claude ने बैक्टीरियोफेज वायरस में एक ऐसी जैविक प्रणाली की पहचान की है, जिसमें CRISPR जैसी कुछ विशेषताएं हो सकती हैं. लेकिन इस कथित खोज पर विवाद भी शुरू हो गया है. एक वैज्ञानिक का कहना है कि वह वर्षों से इसी प्रणाली पर शोध कर रहे हैं. आखिर क्या है ART और कितनी बड़ी है ये खोज? जानिए

ख़बरें फटाफट

Amazon Prime DayTop Deals Inside

 Anthropic के दावे पर वैज्ञानिक ने क्यों जताई आपत्ति, जानिएZoom

AI ने वायरस में खोजी नई जैविक प्रणाली? जानिए पूरी कहानी.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कोडिंग या गणित तक सीमित नहीं रह गई है. बायोलॉजी के क्षेत्र में भी AI कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं. हाल ही में Anthropic ने दावा किया कि उसके एआई मॉडल क्लॉड ने बैक्टीरियोफेज वायरस में एक अनोखी जैविक प्रणाली (Biological System) की पहचान की है. कंपनी ने इसे आर्ट (Array-Associated Reverse Transcriptases) नाम दिया. यह प्रणाली कुछ हद तक CRISPR जैसी दिखती है, जो जीन एडिटिंग का मशहूर टूल है.

सितंबर में हुआ ये ऐलान वैज्ञानिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया. लेकिन जल्द ही एक शोधकर्ता ने आपत्ति जताई कि वे वर्षों से इसी प्रणाली पर काम कर रहे थे. इससे एआई की खोज की मौलिकता पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि, एंथ्रोपिक का ये दावा अभी प्रयोगशाला में साबित नहीं हुआ है और पीयर-रिव्यू जर्नल में भी प्रकाशित नहीं हुआ है.

एंथ्रोपिक ने क्या कहा?

एंथ्रोपिक के अनुसार क्लॉड ने बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरसों में एक असामान्य पैटर्न पहचाना. लगभग 950 एआई एजेंटों ने दो लाख से अधिक रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइमों की जांच की. करीब 21 घंटे के विश्लेषण के बाद एक संभावित उम्मीदवार मिला. कंपनी का कहना है कि इस प्रणाली में CRISPR जैसी कुछ विशेषताएं हैं. CRISPR ने जेनेटिक रिसर्च और कुछ बीमारियों के इलाज में क्रांति ला दी है. हालांकि वैज्ञानिकों ने अभी तक यह साबित नहीं किया है कि आर्ट वास्तव में जीन एडिटिंग कर सकता है या नहीं.

वैज्ञानिक का विरोध और विवाद की जड़

डेनमार्क की कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मारियो रोड्रिग्ज मेस्त्रे ने दावा किया कि उनकी टीम वर्षों से इसी जैविक प्रणाली का अध्ययन कर रही है. उन्होंने अपनी डॉक्टरेट रिसर्च के दौरान क्लॉड का व्यापक इस्तेमाल किया था और अप्रकाशित सामग्री (Unpublished Content) भी शेयर किया था. मेस्त्रे का सवाल है कि क्या एंथ्रोपिक की खोज पूरी तरह स्वतंत्र थी या उनकी बातचीत का प्रभाव पड़ा.

एंथ्रोपिक का जवाब और मौजूदा स्थिति

एंथ्रोपिक ने स्पष्ट किया कि उसका मॉडल यूजर ट्रांसक्रिप्ट पर ट्रेन नहीं किया गया है. कंपनी के अनुसार क्लॉड के एजेंट जेनेटिक डेटाबेस में पैटर्न ढूंढते हैं, परिकल्पना बनाते हैं और वैज्ञानिक शुरुआती डायरेक्शन देने के साथ लैब टेस्ट करते हैं. एंथ्रोपिक ने ये भी माना कि मूल रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज पहले से जाना जाता था.

उनका योगदान दोहराए जाने वाले डीएनए अनुक्रमों के पैटर्न को पहचानना था, जो इसे एक नई प्रणाली की ओर इशारा करता है। फिर भी ये सिर्फ शुरुआत है. सिस्टम कैसे काम करता है और व्यावहारिक उपयोग क्या है, ये अभी स्पष्ट नहीं हुआ है. रिसर्च पीयर-रिव्यू जर्नल में भी प्रकाशित नहीं हुई है.



Source link