नारायणी शिला पर भीड़ ज्यादा? हरिद्वार में यहां करें पिंडदान, मिलेगा उतना ही फल
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Pitru Visarjan Amavasya : हिंदू धार्मिक ग्रंथों में आश्विन मास की अमावस्या सबसे पवित्र, फलदाई और कल्याणकारी मानी गई है. इस दिन ज्ञात-अज्ञात, भूले-बिसरे और तिथि भूल चुके सभी पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण, हवन और श्राद्ध कर्म किया जा सकता है. इससे पितृ प्रसन्न होकर अपने लोक लौट जाते हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित हेमा शुक्ला लोकल 18 से बताती हैं कि हरिद्वार में कुछ ऐसे तीर्थ स्थल हैं जिन्हें पितृ कर्म के लिए सबसे उत्तम बताया गया है. हर की पौड़ी के कुशावर्त घाट, ब्रह्मकुंड घाट और अस्थि विसर्जन घाट पर पितरों के श्राद्ध से वंशजों को अक्षय फल मिलता है. पंडित हेमा शुक्ला के मुताबिक पितृ अमावस्या पर देश-विदेश से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं. इससे प्रमुख घाटों पर भीड़ ज्यादा हो जाती है.
हरिद्वार. आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी सर्व पितृ विसर्जन अमावस्या 10 अक्टूबर को आ रही है. एक संवत में आने वाली सभी अमावस्याओं में आश्विन मास की अमावस्या तिथि सबसे पवित्र, फलदाई और कल्याणकारी मानी गई है. इस दिन ज्ञात-अज्ञात, भूले-बिसरे और तिथि भूल चुके सभी पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण, हवन और श्राद्ध कर्म करने पर पितृ प्रसन्न हो जाते हैं. शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के अंतिम दिन पितृ लोक से आए सभी पितृ पूर्वज अपने वंशजों से विदा लेते हैं. इस दिन पितरों के निमित्त श्रद्धा से किया गया तर्पण और दान पितरों को तृप्त कर मोक्ष प्रदान करता है और वंशजों को सुख-समृद्धि, पितृदोष से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है.
सीधे जाएंगे ब्रह्मलोक
हरिद्वार की ज्योतिषाचार्य और कर्मकांड की प्रकांड पंडित हेमा शुक्ला लोकल 18 से बताती हैं कि धर्मनगरी में कुछ ऐसे तीर्थ स्थल हैं जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में पितृ कर्म के लिए सबसे उत्तम बताया गया है. हरिद्वार में प्राचीन नारायणी शिला पितृ उद्धार का सबसे मुख्य स्थल है. इसके अलावा, हर की पौड़ी के कुशावर्त घाट, ब्रह्मकुंड घाट और अस्थि विसर्जन घाट पर पितरों के निमित्त किए गए श्राद्ध से वंशजों को अक्षय फल प्राप्त होता है. नीलधारा के चंडी घाट पर भी पिंडदान और तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होकर अपने लोक चले जाते हैं. इन विशेष स्थानों पर पितृ कर्मकांड कराने से पितृ सीधे ब्रह्मलोक को प्राप्त होते हैं.
अगर हरिद्वार में इन स्थानों पर भीड़ मिले या यहां किसी कारणवश न हो पाए तो कहां पर पिंडदान पितृ हवन आदि कर सकते हैं. ज्योतिषाचार्य हेमा शुक्ला बताती हैं कि पितृ अमावस्या पर देश-विदेश से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं, जिससे प्रमुख घाटों पर भीड़ और स्थान का संकट खड़ा हो जाता है. अगर प्रमुख तीर्थों पर अनुष्ठान करने की जगह न मिले तो श्रद्धालुओं को परेशान नहीं होना चाहिए. ऐसी स्थिति में वे हरिद्वार में गंगा के किसी भी घाट पर पितृ अनुष्ठान करा सकते हैं. इससे भी उनके पितृ तृप्त होकर अपने लोक चले जाएंगे.